Thursday, 10 May 2018

‘बात अभी ख़त्म नहीं हुई’ की समीक्षा।


'बात अभी ख़त्म नहीं हुई'
 क्षमा शर्मा 


क्षमा शर्मा पिछले चालीस सालों से कहानियाँ लिख रही हैं। उनकी कहानियों को एक तरह से भारत में स्त्रियों की पल-पल बदलती स्थितियों के दस्तावेज़ के रूप में भी देखा जाता है। वह बदलती स्त्री, उसके बदले तेवर को बार-बार रेखांकित करती हैं। किसी भी विमर्श या वाद की बेड़ी से मुक्त वह स्त्रियों ही नहीं पुरुषों की समस्याओं को भी मानवीय नज़र से देखती हैं। उनका मानना है कि किसी भी एक नज़रिए की झाड़ू से पूरे समाज को हाँका नहीं जा सकता।

पेशे से पत्रकार क्षमा ज़िन्दगी की हर क्षण बदलती तसवीर को किसी चित्रकार की तरह पेश करती हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, इस पुस्तक में संकलित,उनकी ये कहानियाँ अनूठी शैली और ताज़गी से भरपूर हैं।

क्षमा शर्मा 


प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार क्षमा शर्मा के लेखन का दायरा बहुत विस्तृत रहा है। उनके दस कहानी संग्रह, चार उपन्यास और स्त्री-विमर्श से सम्बन्धित पाँच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। व्यावसायिक पत्रकारिता का कथा-साहित्य के विकास में योगदानउनकीशोध-कृति है।

बाल साहित्य के लेखन और सम्पादन में शुरू से ही क्षमा शर्मा की रुचि रही है। उनके सत्रह बाल उपन्यास और चौदह बाल कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने बच्चों के लिए विश्व स्तर के बीस क्लासिक्स का हिन्दी रूपान्तरण किया है। देश के सभी पत्र-पत्रिकाओं में बच्चों, महिलाओं और पर्यावरण से सम्बन्धित विषयों पर सैकड़ों लेख लिख चुकी हैं। आकाशवाणी के लिए कहानियाँ, नाटक, वार्ताएँ, बाल कहानियाँ आदि नियमित रूप से लिखती रही हैं। उनकी टेली-फ़िल्म गाँव की बेटीदूरदर्शन से प्रसारित हो चुकी है। उनकी कहानी रास्ता छोड़ो डार्लिंगपर दूरदर्शन द्वारा फ़िल्म बनाई गयी है। क्षमा शर्मा की अनेक रचनाओं का अनुवाद पंजाबी, उर्दू,अंग्रेज़ी और तेलुगु में हो चुका है। क्षमा शर्मा हिन्दी अकादेमी, दिल्ली द्वारा तीन बार पुरस्कृत की जा चुकी हैं। बाल कल्याण संस्थान, कानपुर, इण्डो-रूसी क्लब, दिल्ली तथा सोनिया गाँधी ट्रस्ट, दिल्ली ने भी उन्हें सम्मानित किया है। भारत सरकार के सूचना मंत्रालय ने उन्हें भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से पुरस्कृत किया है।

अनेक समितियों तथा चयन मंडलों की सदस्य क्षमा शर्मा के लेखन पर एक विश्वविद्यालय में शोधकार्य सम्पन्न हो चुका है तथा छह विश्वविद्यालयों में शोधकार्य जारी है। संस्कृति मन्त्रालय की सीनियर फैलो रही हैं।


'बात अभी ख़त्म नहीं हुई' पुस्तक  की समीक्षा यहाँ पाएँ : 

25 अप्रैल, 2018, लखनऊ 

साभार : अमर भारती 


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स्त्री जीवन की विडंबनाएँ यथार्थ और स्वप्न 


साभार : पुस्तक वार्ता 

समीक्षक : विज्ञान भूषण 

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कहानी में मध्यवर्ग 

साभार : गम्भीर पत्रिका, ओम निश्चल जी 


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साभार : दैनिक जागरण, डॉ. दया दीक्षित 

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समय पत्रिका
12 अप्रैल, 2018  


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 'बात अभी ख़त्म नहीं हुई' पुस्तक आप यहाँ पाएँ :- 







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