Thursday, 25 May 2017

'Bhartiya Neetiyon Ka Samajik Paksh' by Editor Jean Dreze, Co-Editor Kamal Nayan Chaubey


भारतीय नीतियों का सामाजिक पक्ष

 सम्पादक : ज्याँ द्रेज 
सह-सम्पादक : कमल नयन चौबे 


• स्वास्थ्य  शिक्षा  खाद्य सुरक्षा  रोजगार गारंटी  पेंशन  नगद हस्तान्तरण  विषमता  सामाजिक बहिष्कार

भारतीय नीतियों का सामाजिक पक्ष उक्त विषय और उससे जुड़े मुद्दों पर लिखे गये उन आलेखों का संग्रह हैजो पहले इकोनॉमिक ऐंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित हो चुके हैं। पुस्तक के 18 अध्याय मुख्यतः इन बिन्दुओं के आसपास केन्द्रित हैं प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा किये गये इन आलोचनात्मक मुद्दों के व्यापक विश्लेषण को पहली बार किसी एक पुस्तक में समाहित किया गया है। इन अध्ययनों में आँकड़ों की बहुलता है जो इस क्षेत्र में शोध करने वालों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी।

                           अनुक्रम


प्रस्तावना - 11

ज्याँ द्रेज
 भारत में जन-स्वास्थ्य: गम्भीर उपेक्षा - 35मोनिका दास गुप्ता

 ग्रामीण राजस्थान में स्वास्थ्य सेवा वितरण - 57अभिजीत बनर्जीएंगस डेटॉनएस्थर डुफलो

 भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा: एक लम्बा और पेचीदा रास्ता- 77गीता सेन

 भारत में अर्द्ध-शिक्षक: स्थिति और प्रभाव -101गीता गाँधी किंगडनवन्दना सिपाहीमलानी-राव

 क्या स्कूल का चयन वंचित तबकों के ग्रामीण बच्चों के लिए मददगार है? -130डी.डी. कारोपैडी

 विद्यालयों में दलित या आदिवासी बच्चा होने का क्या अर्थ है? -154विमला रामचन्द्रनतारामणि नाओरेम

• रोज़गार गारंटीनागरिक समाज और भारतीय लोकतन्त्र- 184मिहिर शाह

 महिला मज़दूर और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के
बारे में धारणाएँ -211रीतिका खेड़ानंदिनी नायक

 मनरेगा काम और उनके प्रभाव: महाराष्ट्र का अध्ययन- 238क्रुश्न रनावरेउपासक दासअश्विनी कुलकर्णीसुधा नारायणन

 लोकतन्त्र और भोजन का अधिकार -265ज्याँ द्रेज

• समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) कार्यक्रम पर पुनर्विचार:एक अधिकार आधारित दृष्टिकोण -291दीपा सिन्हा

• जनवितरण प्रणाली का पुनरुत्थान: साक्ष्य और व्याख्याएँ- 310रीतिका खेड़ा
भारत में सामाजिक सुरक्षा पेंशन: एक अवलोकन -358सलोनी चोपड़ाजेसिका पुडूसेरी

 नीति से व्यवहार तक: सामाजिक पेंशन को कैसे बढ़ाया जाना चाहिए? -378श्रयाना भट्टाचार्यमारिया मिनी जोससौम्या कपूर मेहतारिंकू मुरगई

 भारत में नकद हस्तान्तरण वाद-विवाद की नवीन रूपरेखा 405सुधा नारायणन

 जातिगत भेदभाव और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम -432सुखदेव थोराटजोयल ली

 भारत और चीन में लिंग चयन और जेण्डर असन्तुलन के नकारात्मक
नतीजों का अध्ययन- 442
रविन्दर कौर

• आदिवासीनक्सलवादी और भारतीय लोकतन्त्र-466
रामचन्द्र गुहा
लेखक परिचय 493अनुवादक परिचय 495आभार 496




ज्याँ द्रेज ने यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स से गणितीय अर्थशास्त्र का अध्ययन किया है और इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूटनयी दिल्ली से पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने लन्दन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और डेल्ही स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्यापन किया है और वर्तमान में राँची विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफ़ेसर और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्रोफ़ेसर हैं। विकास अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीतियोंविशेषकर उनके भारतीय सन्दर्भों में उन्होंने बहुमुखी योगदान दिया है। ग्रामीण विकाससामाजिक असमानताप्राथमिक शिक्षाशिशु पोषणस्वास्थ्य सेवाएँ और खाद्य सुरक्षा उनके शोध के प्रमुख विषय हैं। ज्याँ द्रेज ने अमर्त्य सेन के साथ हंगर एंड पब्लिक एक्शन (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1989) और एन अनसर्टेन ग्लोरी: इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शंस (ओयूपी, 2002) का सह-सम्पादन किया है और पब्लिक रिपोर्ट ऑन बेसिक एजुकेशन इन इंडिया के लेखक-मंडल से भी जुड़े हैं जो प्रोब (PROBE) रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है।

कमल नयन चौबे दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में राजनीति विज्ञान पढ़ाते हैं। इनकी प्रकाशित पुस्तकों में जातियों का राजनीतिकरण: बिहार में पिछड़ी जातियों के उभार की दास्तान (2008), और जंगल की हकदारी: राजनीति और संघर्ष (2015) सम्मिलित हैं। इन्होंने जॉन रॉल्स और विल किमलिका जैसे सुप्रसिद्ध राजनीतिक सिद्धान्तकारों की कृतियों का हिन्दी अनुवाद किया है। ये विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस) से प्रकाशित होने वाली समाज विज्ञान की पूर्व-समीक्षित पत्रिका प्रतिमान: समय समाज संस्कृति की सम्पादकीय टीम से भी जुड़े हैं।

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