Friday, 14 April 2017

'Hashiya' by Shailendra Singh


वाणी प्रकाशन से प्रकाशित 
शैलेन्द्र सिंह का नया उपन्यास 


पुस्तक अंश 

शैलेन्द्र सिंह का नया उपन्यास हाशिया’ मदन नाम के एक ग़रीब मज़दूर के संघर्ष की करुण-कथा है। एक ग़रीब के जीवन में आने वाले जितने संघर्ष और चिन्ताओं की कल्पना हम कर सकते हैं वे सब इस पात्र के दैनिक जीवन में सहज ही शामिल हैं। आर्थिक बदहाली की वजह से मदन के लिए अपने बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई की चिन्ता ही सबसे बड़ी चिन्ता बन जाती है। पूरे उपन्यास में वह अपने और अपने परिवार के अस्तित्व के लिए एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष करता पाया जाता है।


यद्यपि मदन का परिवार ग़रीबी रेखा के नीचे आता है लेकिन उसके पास बीपीएल कार्ड नहीं है। महज एक कार्ड न होने की वजह से वह अपने अधिकार और सुविधाओं से वंचित रह जाता है। तिकड़मी और पहुँच वाले लोग ही ऐसी योजनाओं का लाभ उठाने में सफल होते हैं। वह नरेगा योजना के तहत भी काम करता है लेकिन वहाँ भी चेक से ही पेमेंट होता है और वह चेक को भुना नहीं सकता। चेक उसके लिए बहुत बड़ी समस्या बन जाता है। अपने दैनिक जीवन में आये दिन उसे ऐसी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अपने चचेरे भाई तरसेम की मदद से उसके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी होती है और धीरे-धीरे सरकारी योजनाओं की असलियत को लेकर उसकी जागरूकता बढ़ने लगती है।

पूरे उपन्यास से गुज़रते हुए बार-बार सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की विसंगतियाँ ज़ाहिर होती हैं। एक ओर वैसे लोग हैं जो बीपीएलनरेगा या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं और दूसरी ओर इनसे वंचित रह जाने वाले लोग हैं। इस प्रकार ऐसी तमाम सरकारी योजनाएँ सुविधाभोगी और वंचितों के बीच सीमा-रेखा के रूप में उभरती हैं जिससे उपन्यास के कथानक और घटनाक्रम में बराबर एक विडम्बना का स्वर गूँजता रहता है।

शैलेन्द्र सिंह


जन्म: 1 अगस्त 1968 (पाक अधिकृत कश्मीर के छम्ब कस्बे में)। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद सपरिवार विस्थापन और कृष्णपुर कैम्पबोमाल कैम्प व ज्योड़ियाँ में निवास।
शिक्षा: अलग-अलग जगहों पर पढ़ाई-लिखाई। नौवीं से बारहवीं तक पढ़ाई अखनूर के सरकारी स्कूल में,इंजीनियरिंग की पढ़ाई श्रीनगर में और एम.बी.ए. की जम्मू यूनिवर्सिटी से।
कार्यक्षेत्र: एम.बी.ए. के बाद पाँच वर्ष तक जम्मू-कश्मीर के लोक निर्माण विभाग में सहायक अभियन्ता, 1999 में जम्मू-कश्मीर पुलिस सेवा में डी.एस.पी. नियुक्त। बेहतरीन सेवा के लिए डी. जी. पी. कमैण्डेशन मैडल प्राप्त। फिलहाल एस.एस.पी. के रूप में सेवारत।
प्रकाशन: पहला उपन्यास हाशिये पर’ पद्मश्री रामनाथ शास्त्री अवार्ड (2014) और साहित्य अकादेमी अवार्ड (2014) से सम्मानित। हाशिये पर’ डोगरी का एकमात्र पहला उपन्यास है जिसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने अंग्रेज़ी भाषा में रूपान्तर करवाया है। डोगरी में दूसरा उपन्यास सेवाधनी’  2012 में प्रकाशित।

डॉ. चंचल भसीन (अनुवादिका)

शिक्षा: एम.ए. (डोगरीहिन्दी)एम.फिल. और पीएच.डी. (डोगरी)।
प्रकाशित कृति: डोगरी उपन्यासों में वर्ग-संघर्ष (आलोचना)हाशिया (हिन्दी अनुवाद)बदलोंदे रिश्ते (तमिल उपन्यास का डोगरी अनुवादसाहित्य अकादेमी के सहयोग से जारी)।
सम्प्रति: सीनियर लेक्चररस्कूल शिक्षा विभागजम्मू।
मद्र भद्र केकैई सांस्कृतिक संगठनजम्मू (सचिव और खजांची)। सदस्यडोगरी संस्थाजम्मू (साहित्य सचिव)।


पुस्तक खरीदने हेतु इस लिंक पर क्लिक करें -