Tuesday, 11 April 2017

'Sadak Mod Ghar Aur Main' by Nirmala Todi


संयत तापक्रम पर पिघलती हुई कविताएँ 
 सड़क मोड़ घर और मैं 
 निर्मला तोदी 


ISBN: 978-93-5229-602-6 
 विषय - कविता संग्रह वर्ष - 2017 
मूल्य - 295 /- पृष्ठ संख्या - 120  

पुस्तक अंश 

इस समय जब हिन्दी कविता में आत्मालोचना का स्वर लगभग विलुप्त सा हो गया हैनिर्मला तोदी की कविताओं में इस स्वर का सुनना उम्मीद जगाता है। वो जितना अपने से बाहर की स्थितियों का विश्लेषण करते हुए सवाल उठाती हैं उतना ही अपने स्व का भी विश्लेषण करती हैं। यह कविता जानती है कि वह अपनी कमजोरी को अपने बड़प्पन में छिपा रही हैउसमें इसे स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं है। वह जरूरी जगह पर भी चुप रह जाने को जानती है और इसलिए अपनी इस चुप्पी पर सवाल भी करती है। निर्मला की कविता यह सवाल करती है कि जब घर में ही चुप हूँ तो परिवारपड़ोससमाज और देश के लिए कुछ भी कैसे कहूँनिर्मला तोदी की कविताएँ भाषा को बरतने में न केवल मितव्ययी हैं बल्कि अपनी आवाज के तापक्रम को भी वह एक संयत तापक्रम पर ही बनाये रखती हैं। उसमें अतिरिक्त मुखरता या अतिशयोक्तियाँ नहीं हैंशायद इसलिए इन कविताओं की आवाज हमें ज्यादा भरोसेमन्द लगती है।
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इन कविताओं में अपनी परम्पराओं की धीमी गूँज को सुना जा सकता है। उसमें नाते-रिश्तों में आ रहे बदलाव की पीड़ा भी है और उनकी अनेक स्मृतियाँ भी। उसमें जरूरत के समय काम आने वाले घरेलू नुस्खों की भी यादें बसी हुई हैं। ये कविताएँ दो अलग अलग स्थानीयताओं के बीच न केवल एक दूसरे को याद करती हैं बल्कि दोनों के बीच पुल बनाने का भी काम करती हैं।
इन कविताओं की शान्त दिखती सतह के नीचे एक गहरी बेचैनी है। ये कविताएँ जो रात भर सोने नहीं देतींकभी ये अधूरी सी लगती हैं और बार बार अपने को पूरा करने के लिए परेशान करती हैं। कभी-कभी ये जादू की तरह दिमाग पर छा जाती हैं। और कभी एक टिकिट पर लिखी कविता पर पूरी पृथ्वी घूमने लगती है। 

निर्मला तोदी

कलकत्ता में जन्म और शिक्षा,
देश की सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन
इन दिनों कहानी लेखन में सक्रिय
तद्भव’ 2016 में प्रकाशित लम्बी कहानी रिश्तों के शहर’ बहुप्रशंसित व बहुचर्चित
मूलतः कवि प्रकाशन: अच्छा लगता है’ काव्य-संग्रह 2013 सम्प्रति: स्वतन्त्र लेखन

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