Monday, 10 April 2017

'Shaharnama Faizabad' by Yatindra Mishra

हिन्दी कविसम्पादक और संगीत अध्येता यतीन्द्र मिश्र की
'श्री हरिकृष्ण त्रिवेदी स्मृति युवा पत्रकार प्रोत्साहन पुरस्कार'

द्वारा पुरस्कृत कृति

शहरनामा : फैज़ाबाद 


आई.एस.बी.एन - 978-93-5229-583-8(हार्ड कवर)
आई.एस.बी.एन - 978-93-5229-587-6 (पेपर बैक )
 विषय - संस्कृति/इतिहास/कला
संस्करण - प्रथम 
वर्ष - 2017 
मूल्य - 995 /-  हार्ड कवर|495/- पेपरबैक 
पृष्ठ संख्या - 638  
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 पुस्तक अंश 

इतिहास के पन्नों पर फ़ैज़ाबाद शहर अवध की नवाबकालीन शासन-व्यवस्था व संस्कृति का प्रवेश-द्वार है। इसी से होकर अवध के उन गलियारों में जाया जा सकता हैजिसने इस अद्भुत गंगा-जमुनी तहज़ीब वाले समय की आधारशिला रची है। फ़ैज़ाबाद को अवध के नवाबी दौर की पहली राजधानी होने का गौरव प्राप्त है। ...और यह भी कि बाद में यहाँ से उठकर जब नवाबी शासन की सारी रस्मो-रवायत व संस्कृति लखनऊ जाकर अपना अस्तित्व पाती हैतो उसमें कहीं नींव की ईंट की तरह फ़ैज़ाबाद (तत्कालीन बंगला) ही धड़कता मिलता है।


शहरनामा फ़ैज़ाबाद कहीं न कहीं आधुनिक ढंग से इस पुराने शहर की परम्परा और संस्कृति को नये सन्दर्भों में देखने का एक रीडर या गाइड सरीखा हैजिसे हम सांस्कृतिक-गज़ेटियर’ की तरह भी बरत सकते हैं। यह पुस्तक जो पूरी तरह इतिहास में प्रवेश करके वर्तमान तक लौटती हैइसमें तमाम ऐसे रास्ते और पगडण्डियाँ आसानी से देखी जा सकती हैंजिनसे होकर हम अपनी सभ्यता में रचे-बसे पुराने शहर का कोई ऐतिहासिक पाठ बना सकते हैं। ऐसा पाठजो वर्तमान और अतीत के किसी निर्णायक बिन्दु पर आपकी जवाबदेही तय करता है। फ़ैज़ाबाद को यह गौरव हासिल रहा है कि इस शहर ने नवाबी संस्कृति के आगाज़ और यहीं से उसके प्रस्थान का बदलता हुआ दौर देखा है। यह वह शहर हैजहाँ अपने सारे गंगा-जमुनी प्रतीकों के साथ रहते हुएहिन्दुओं की आस्था-नगरी व सप्तपुरियों में से एक अयोध्या भी स्थित है। यह फ़ैज़ाबाद ही हैजिसने 1857 ई. के पहले स्वतन्त्रता आन्दोलन के लिए बड़ी सार्थक ज़मीन उपलब्ध करायी है और बाद में आज़ादी की लड़ाई के दौर में क्रान्तिकारियों के रूप में हमें अधिसंख्य नायक दिये हैं।

शहरनामा फ़ैज़ाबाद’ को लेकर कुछ प्रमुख बिन्दुओं की ओर भी ध्यान देना आवश्यक हैजिसके आधार पर ही इस पूरे ग्रन्थ का निर्माण किया गया है। इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि फ़ैज़ाबाद शहर का जो ऐतिहासिक मूल्यांकन किया गया हैउसके लिए इतिहास-निर्धारण की तिथि वहाँ से ली गयी हैजब नवाब सआदत ख़ाँ बुरहान-उल-मुल्क’, 1722 ई. में इस शहर की आधारशिला अवध की राजधानी के तौर पर रखते हैं। अतः इस पुस्तक में विवेचित सामग्रीउसी वर्ष से अपना अस्तित्व पाती है।

 यतीन्द्र मिश्र 


यतीन्द्र मिश्र युवा हिन्दी कविसम्पादकसंगीत और सिनेमा अध्येता हैं। उनके अब तक चार कविता-संग्रह- यदा-कदा’, ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’, ‘ड्योढ़ी पर आलाप’ और विभास’; शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी पर एकाग्र गिरिजा’, नृत्यांगना सोनल मानसिंह से संवाद पर आधारित देवप्रिया’ तथा शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ के जीवन व संगीत पर सुर की बारादरी’ प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर विस्मय का बखान’, कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन भैरवी’, हिन्दी सिनेमा के सौ वर्षों के संगीत पर आधारित हमसफ़र’ के अतिरिक्त फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः यार जुलाहे’ तथा मीलों से दिन’ नाम से सम्पादित हैं। गिरिजा’ और विभास’ का अंग्रेज़ी, ‘यार जुलाहे’ का उर्दू तथा अयोध्या शृख़ला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। इनके अतिरिक्त वरिष्ठ रचनाकारों पर कई सम्पादित पुस्तकें भी प्रकाशित हैं। इन्हें भारतीय ज्ञानपीठ फैलोशिपरज़ा सम्मानभारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कारभारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कारहेमन्त स्मृति कविता सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सरायनयी दिल्ली की स्वतन्त्र शोधवृत्ति मिली हैं। इन्होंने दूरदर्शन (प्रसार भारती) के कला-संस्कृति के चैनल डी.डी. भारती के सलाहकार के रूप में सन् 2014-2016 तक अपनी सेवाएँ दी हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिकाइंग्लैण्डमॉरीशस एवं अबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउण्डेशन न्यास’ के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं।

दिनांक 7 अप्रैल 2017 को फिल्म समारोह निदेशालय, भारत सरकार द्वारा वाणी प्रकाशन से आई यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक 'लता सुर-गाथा' को 'स्वर्ण 

कमल' से सम्मानित करने की घोषणा की गयी है। 
यह पुरस्कार लेखक एवं प्रकाशक, यानी वाणी प्रकाशन दोनों, को दिया जायेगा


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