Thursday, 6 April 2017

लेखकों के संग वाणी प्रकाशन को मिला अन्तर्राष्ट्रीय वातायन सम्मान


 लेखकों के संग वाणी प्रकाशन को मिला

 अन्तर्राष्ट्रीय वातायन सम्मान 

लन्दन स्थित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था वातायन ने वर्ष 2017 के लिए अपने वार्षिक सम्मानों की घोषणा की। इस बार हिन्दी की अग्रणी प्रकाशन संस्था वाणी प्रकाशन और उससे जुड़े लेखकों को विभिन्न वातायन सम्मानों से सम्मानित किया गया। प्रकाशन, लेखन और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु सम्मानित करने के लिए वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी, कवि और ग़ज़लकार डॉ. हरिओम और संस्कृतिकर्मी स्मिता परिख का चयन किया गया। इस बार वातायन संस्था का सबसे प्रतिष्ठित अन्तर्राष्ट्रीय वातायन शिखर सम्मान पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी को प्रदान किया गया।


लन्दन, वर्मिंघम और वोलर्टन (मैनचेस्टर) में चार दिनों (23-26 मार्च 2017) तक चलने वाले हिन्दी साहित्योत्सव के दौरान उक्त सम्मान समारोह आयोजित किया गया। भारतीय उच्चायोग, लन्दन द्वारा पश्चिमी बंगाल के गर्वनर श्री केशरीनाथ त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिकारी व ग़ज़ल लेखक हरिओम, वाणी फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष व वाणी प्रकाशन के निदेशक अरुण माहेश्वरी, लिट-ओ-फेस्ट, मुम्बई की निदेशक व लेखिका स्मिता परिख के सम्मान में उच्चायुक्त श्री यशवर्धन कुमार सिन्हा व श्री तरुण कुमार (हिन्दी अधिकारी, उच्चायुक्त, लन्दन) की बैठक भारतीय उच्चायोग में की गयी। वहीं हिन्दी लेखन के लिए यू.के. के हिन्दी सेवियों को पुरस्कृत किया गया।

वातायन यू.के. द्वारा नेहरू सेन्टर, लन्दन में श्री केशरीनाथ त्रिपाठी (गर्वनर, पश्चिम बंगाल) को अन्तर्राष्ट्रीय वातायन शिखर सम्मान, श्री हरि ओम को अन्तर्राष्ट्रीय वातायन कविता सम्मान, श्री अरुण माहेश्वरी, वाणी प्रकाशन को अन्तर्राष्ट्रीय वातायन प्रकाशन सम्मान व लेखिका स्मिता परिख को अन्तर्राष्ट्रीय वातायन संस्कृति सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष व मुख्य अतिथि भारत के उच्चायुक्त महामहिम यशवर्धन कुमार सिन्हा रहे। उच्चायुक्त द्वारा वर्ष 2016-17 के वातायन सम्मान की चयन प्रक्रिया व यू.के. में हिन्दी प्रचार-प्रसार के कार्यक्रमों की जानकारी दी गयी।
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सम्मानित लेखक
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वरिष्ठ कवि श्री केशरीनाथ त्रिपाठी ने शिखर सम्मान ग्रहण करते हुए बताया कि सन्1997 से वे यू.के. के हिन्दी कवि सम्मेलनों से जुड़े हैं अपनी कविता यात्रा के आरम्भिक दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें कवि सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए यू.के. हिन्दी समिति के संस्थापक श्री पद्मेश गुप्त ने 1997 में पहली बार बुलाया था। अपने कवि बनने का श्रेय पद्मेश गुप्त को देते हुए उन्होंने अपनी कविता यात्रा का स्मरण किया। श्री त्रिपाठी की अब तक 22 कविता पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

 वातायन संस्था द्वारा इसी वर्ष से अन्तराष्ट्रीय वातायन प्रकाशन 

 सम्मान की शुरुआत की गयी है। 

वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक और वाणी फ़ाउंडेशन के चेयरमैन श्री अरुण माहेश्वरी को प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय वातायन प्रकाशन सम्मान से सम्मानित किया गया। अरुण माहेश्वरी द्वारा संचालित वाणी प्रकाशन हिन्दी भाषा और साहित्य में स्तरीय पुस्तकों के प्रकाशन के लिए विख्यात है। नोबेल पुरस्कार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार और अनेक लब्ध प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त लेखक वाणी प्रकाशन की गौरवशाली परम्परा का हिंसा हैं। वाणी प्रकाशन साहित्य और विमर्श की गम्भीर पत्रिका वाक और हिन्दी की पहली पूर्व समीक्षित पत्रिका प्रतिमान का नियमित प्रकाशन करता है। एक प्रकाशक के रूप में अरुण माहेश्वरी ने अब तक 6000 से भी अधिक पुस्तकों और2500 से अधिक लेखकों को प्रकाशित किया है। उन्होंने लगभग समूची दुनिया का भ्रमण किया है और हिन्दी भाषा-साहित्य और हिन्दी में छपी पुस्तकों का अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रचार-प्रसार किया है।

हिन्दी के उत्थान और विकास के लिए उनके अथक प्रयासों को दुनिया भर में सराहा गया है। उन्हें स्वीडिश,राशियां और पोलिश के साहित्यिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए नेशनल लाइब्रेरी (स्वीडन), इंडो-रशियन लिटरेरी क्लब और पोलिश कल्चरल सेंटर द्वारा सम्मानित किया गया है   
 फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा वर्ष 2008 में उन्हें डिस्टिंग्विश्ड पब्लिशर्स अवार्ड से नवाजा गया है। अरुण माहेश्वरी साहित्य अकादेमी की कार्यकारिणी समिति के सम्मानित सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय के नामित सदस्य भी हैं। उनकी संस्था वाणी फ़ाउंडेशन ने इन्द्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय के साथ मिलकर 3 व 4 मार्च 2017 को दो दिवसीय हिन्दी महोत्सव काआयोजन किया जो देश भर में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

भविष्य की दुनिया अनुवाद पर आधारित होगी : अरुण माहेश्वरी

वाणी फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष व वाणी प्रकाशन के निदेशक अरुण माहेश्वरी ने अन्तर्राष्ट्रीय वातायन प्रकाशन पुरस्कार स्वीकार करते हुए अनुवाद की महत्ता पर जोर दिया और कहा कि भविष्य में आने वाली दुनिया अनुवाद पर आधारित होगी। अनुवाद की भाषा सरल होनी चाहिए। अनुवाद के कारण ही रामचरितमानस’ आज भी हमारे सामाजिक वातावरण में लोकप्रिय है।
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अन्तर्राष्ट्रीय वातायन प्रकाशन सम्मान प्राप्त करते हुए अरुण माहेश्वरी 
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वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व गीतकार हरिओम ने अन्तर्राष्ट्रीय वातायन कविता पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपनी रचना-प्रक्रिया के बारे में बताया और लोक कल्याण के लिए लेखन की महत्ता पर अपने विचार प्रकट किये। श्री हरिओम 1997 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश काडर में कलेक्टर जैसे विभिन्न पदों पर लम्बे समय से कार्यरत हैं उन्होंने हिंदी साहित्य से एम. ए., एम. फिल. पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैंवाणी प्रकाशन ने हाल ही में दास्ताँ कहते-कहते शृंखला के तहत उनकी नई गज़लों का संग्रह ख़्वाबों की हँसी प्रकाशित किया है। 
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 अन्तर्राष्ट्रीय वातायन प्रकाशन सम्मान प्राप्त करते हुए डॉ. हरिओम
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 डॉ. हरिओम को अन्तर्राष्ट्रीय वातायन कविता सम्मान प्रदान करते गवर्नर श्री केशरीनाथ त्रिपाठी 
लिट--फेस्ट मुम्बई की संस्थापक व कवि स्मिता परिख ने अन्तर्राष्ट्रीय वातायन संस्कृति पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी का साहित्य में रुझान बढ़ाने के लिए उन्होंने मुम्बई लिट-ओ फेस्ट की स्थापना की। इसके तहत युवा साहित्य की लगभग 20 महत्वपूर्ण पुस्तकें विभिन्न प्रकाशकों से अनुबंधित कर प्रकाशित हो चुकी हैं और यह योजना भविष्य में भी जारी रहेगी। इसके साथ ही वे भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

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अन्तर्राष्ट्रीय वातायन संस्कृति सम्मान ग्रहण करती हुईं सुश्री स्मिता  परिख
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साहित्योत्सव के अगले पड़ाव में साहित्यिक संस्था कृति यू.के.’ द्वारा भारतीय काउंसलेट, वर्मिंघम में कौंसिल जनरल डॉ. अमन पुरी ने सभी पुरस्कृत लेखकों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संयोजन कृति यू.के. संस्था की ओर से डॉ. केके. श्रीवास्तव एवं तितिक्षा द्वारा किया गया। कृति यू.के. ने अपनी 15 वर्ष की साहित्यिक यात्रा के उत्सव वर्ष पर यू.के. में हिन्दी लेखकों के बारे में बताया।

वोलर्टन (मैनचेस्टर) के आर.के. मिशन परिसर में महामहिम केशरीनाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता में डॉ. रणजीत सिमर एवं डॉ. अंजनी कुमार द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।

इस साहित्योत्सव के अवसर पर यह भी घोषणा की गयी कि वाणी फ़ाउंडेशन के तत्त्वावधान में ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड व लिट-ओ-फेस्ट मुम्बई द्वारा निकट भविष्य में तीन दिन का सांस्कृतिक व साहित्यिक उत्सव मनाया जायेगा। कलम, प्रभाखेतान ट्रस्ट, वाणी प्रकाशन, विद्यापाठ यू.के. द्वारा त्रैमासिक साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। युवा पीढ़ी के लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए भारत से गतिविधि होगी और लन्दन में हिन्दी लेखक की पुस्तक पर आयोजन किया जाएगा। इसी योजना के तहत मार्च 2017 में लेखिका प्रतिष्ठा सिंह की पुस्तक वोटर माता की जय! पर चर्चा हो चुकी है।

कार्यक्रम की सफलता पर सन्देश देते हुए फिल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी ने शायर कैफी आज़मी की पंक्ति कोई तो सूद चुकाएँ, कोई तो ज़िम्मा ले, उस इंकलाब का आज तक उधार सा है को बधाई सन्देश के रूप में भेजा।

कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ 






                                                    


मीडिया कवरेज

साभार:  YourStory Hindi