Wednesday, 5 April 2017

ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेज से एक्सीलेंस अवार्ड पाने वाले पहले हिन्दी प्रकाशक बने अरुण माहेश्वरी




ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेज से एक्सीलेंस अवार्ड पाने वाले पहले हिन्दी प्रकाशक बने अरुण माहेश्वरी 

वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक व वाणी फ़ाउंडेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी को ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेजऑक्सफ़ोर्ड में एक्सीलेंस अवार्ड से नवाज़ा गया। यह हिंदी प्रकाशन के इतिहास में  अभूतपूर्व घटना मानी जा रही है। गौरतलब है कि अगले साल, यानी 2018 में वाणी प्रकाशन की गौरवशाली हिंदी प्रकाशन परंपरा के 55 वर्ष पूरे होंगे। 

सम्मान ग्रहण करते हुए अरुण माहेश्वरी 

सन 1985 में निर्मित ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेज की संस्थापना यूनाइटेड किंगडम में हुई। विश्व में शिक्षा की राजधानी माने जाने वाले शहर ऑक्सफ़ोर्ड का यह सबसे पुराना बिज़नेस स्कूल है। ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेज के गवर्निंग कॉउन्सिल के चेयरमैन प्रोफेसर स्टीव ब्रिस्टो, जो कि यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग्लेमोर्गन के कुलपति व बी. ए. सी. के कॉउन्सिल मेंबर व् ट्रस्टी रह चुके हैं,  द्वारा दिया गया। 

यह सम्मान वाणी प्रकाशन के प्रोफेशनलिज्म और निरंतर रूप से भारतीय भाषाओं की सेवा को समर्पित है। विश्व भर में शिक्षा का केंद्र रहे ऑक्सफ़ोर्ड में दिया गया यह सम्मान भारतीय भाषाओं में हिंदी के सर्वोत्कृष्ट प्रकाशन हेतु वाणी प्रकाशन को दिया गया है। ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेज के चेयरमैन प्रोफ़ेसर स्टीव ब्रिस्टो ने कहा कि भारत विविधता का देश है और भारतीय भाषाएँ इस विविधता को मुखरता से परिभाषित करती हैं। यह गौरव का विषय है कि भारतीय भाषाओं में प्रमुख भाषा हिन्दी के श्रेष्ठ प्रकाशक को हम सम्मानित कर रहे हैं।

21 वीं शताब्दी का सबसे बड़ा निवेश व बाजार का केन्द्र माने जाने वाला देश 
भारत भाषायी रूप से सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था का सोपान है।

वाणी प्रकाशन को वर्ष 2008 में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा डिस्टिंग्विश्ड पब्लिशर्स अवार्ड से नवाजा गया है। अरुण माहेश्वरी नेशनल लाइब्रेरी, स्वीडेन; इंडो-रशियन लिटरेरी क्लब-रशियन सेंटर ऑफ आर्ट कल्चर तथा पोलिश कल्चरल सेंटर द्वारा क्रमशः इंडो-स्वीडिश, रशियन और पोलिश साहित्यिक आदान-प्रदान के लिए सम्मानित किए जा चुके हैं। अरुण माहेश्वरी टी.एम. नागपुर विश्वविद्यालय में अध्ययन बोर्ड के एक प्रतिष्ठित सदस्य हैं | वे भारतीय नेशनल एकेडमी ऑफ लेटर्स-साहित्य अकादेमी की भारतीय प्रकाशन संसर्ग के चयनित प्रतिनिधि भी हैं। इसके अतिरिक्त अरुण माहेश्वरी हिन्दी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के नामित सदस्य हैं। 

वाणी प्रकाशन अब तक 6000 से अधिक पुस्तकें और 2500 से अधिक लेखकों को प्रकाशित कर चुका है।

हिन्दी के अलावा भारतीय और विश्व साहित्य की श्रेष्ठ रचनाओं का प्रकाशन कर इसने हिन्दी जगत में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। नोबेल पुरस्कार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार और अनेक लब्धप्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त लेखक वाणी प्रकाशन की गौरवशाली परम्परा का हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में  वाणी प्रकाशन ने अंग्रेज़ी में भी महत्त्वपूर्ण शोधपरक पुस्तकों का प्रकाशन किया है।


सम्मान ग्रहण के अवसर मौके पर वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक व वाणी फाउंडेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी ने भारतेंदु हरिश्चन्द को याद करते हुए कहा कि

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।।’

ये पंक्तियाँ सिर्फ हिंदी नहीं , बल्कि विश्व की सभी भाषाओं के गौरव को रेखांकित करती हैं। वाणी प्रकाशन व वाणी फाउंडेशन इसी भारतीय गौरव के संरक्षण में जुटा हुआ है। प्रकाशन एक नोबल कॉज है, एक मुहीम है। मैं इश्वर को धन्यवाद करता हूँ कि मुझे हिन्दी का प्रकाशक बनाया क्योंकि २१वीं शताब्दी में भारतीय भाषाओं का प्रकाशन व्यवसाय विश्व के सभी व्यवसायों से अलग साबित होगा। मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि मेरे देश के युवा इस मुहीम में अग्रसर हैं और नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। मैं किताबवाला हूँ और अपने काम को कवि सतेंद्र 'मनम' की इन पंक्तियों से परिभाषित करता हूँ -

दुकान किताब की महज़ इक दुकान नहीं
जमा है इसमें समंदर उफ़नते ख़यालों का
किताबें बेचने वाली दुकानें ख़ास होती हैं
यहाँ जज़्बात मिलते हैं, ख़यालात मिलते हैं
यहाँ आदमी को इंसाँ बनाने के सारे समानात मिलते हैं


भारतीय परिदृश्य में प्रकाशन जगत की बदलती हुई भूमिका और पाठक वर्ग की बदलती हुई दिलचस्पी को ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने अपनी 51वीं वर्षगाँठ पर गैर-लाभकारी उपक्रम वाणी फ़ाउंडेशन की स्थापना की है। फ़ाउंडेशन की स्थापना के मूल प्रेरणा स्रोत सुहृद साहित्यानुरागी और अध्यापक स्व. डॉ. प्रेमचन्द्र ‘महेश’ हैं जिन्होंने 1960 में वाणी प्रकाशन की नींव रखी। वाणी फ़ाउंडेशन का लोगो विख्यात चित्रकार सैयद हैदर रज़ा द्वारा बनाया गया है। मशहूर शायर और फ़िल्मकार श्री गुलज़ार  वाणी फ़ाउंडेशन के प्रेरणास्रोत हैं। वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी  वाणी फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। 

वाणी फ़ाउंडेशन कई महत्त्वपूर्ण शोधवृत्तियों का भी संयोजन करता है। इनमें हिन्दी में नवाचार विषयक लेखन के लिए प्रेमचन्द्र ‘महेश’ शोधवृत्ति, अनुवादकों और चित्रकारों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोधवृत्ति के अलावा बाल साहित्य शोधवृत्ति की योजनाएँ हैं। अनुवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2016 के ‘डिस्टिंग्विश्ड ट्रांसलेटर अवार्ड’ हेतु सुश्री अनामिका का चयन किया गया। 



मीडिया कवरेज

1 अप्रैल 2017 
पृष्ठ संख्या - 3 
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2  अप्रैल  2017 
पृष्ठ संख्या - 21 
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मई   2017 
पृष्ठ संख्या - 6  


वाणी प्रकाशन समाचार ( वर्ष :10, अंक : 118, मार्च 2017 )


प्रिय पाठकों,

प्रस्तुत है वाणी प्रकाशन समाचार 

 वर्ष :10, अंक : 118, मार्च  2017