Saturday, 18 March 2017

'कलम-लन्दन' में 'वोटर माता की जय' पर परिचर्चा

'कलम-लन्दन' में लेखिका प्रतिष्ठा सिंह संग 

वोटर माता की जय  पर परिचर्चा


इस चुनावी मौसम में सुनिए #वोटरमाताकीजय की लेखिका प्रतिष्ठा सिंह को 
बिहार चुनाव के अपने अनुभव साझा करते हुए ‘कलम’ में

वाणी प्रकाशन से हाल ही में आयी किताब वोटर माता की जय पर ‘कलम’ के लंदन संस्करण में 19 मार्च 2017 को लेखिका प्रतिष्ठा सिंह के साथ परिचर्चा होगी|  प्रभा खेतान फाउंडेशन और विद्यापथ संस्था मिलकर 19 मार्च 2017 को शाम 4 बजे लन्दन के O2 सेंटर में ‘कलम-लन्दन’ का आयोजन कर रहे हैं|  


'वोटर माता की जय' का आवरण 



'वोटर माता की जय' बिहार के महिला समाज की एक ऐसी कथा है जिसमें पूरे बिहार की पृष्ठभूमि की झलक नज़र आती है| पुस्तक की भाषा का बिहारी लहजा इसकी रोचकता और पठनीयता को एक नयी पहचान देता है| यह किताब बिहार की महिलाओं की राजनीतिक सजगता और प्रगतिशीलता का सजीव प्रमाण है| कि अब का सनेश साफ़ है : बिहार में वोटर की, खासकर महिला वोटर की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता| 2015 के चुनाव में बिहार के महिला वोटर वर्ग ने राजनीतिक सूरत पलट कर रख डाली| 'वोटर माता की जय' बिहार के इसी चुनावी संघर्ष के क्रमिक विकास की कहानी है| 


किताब के बारे में...




वोटर माता की जय पर कुछ सम्मतियाँ 


चुनावों पर अनेक तरह की समीक्षाएँ एवं आलोचनाएँ लिखी जाती रही हैं, ख़ासतौर पर बिहार के चुनावों पर| लेकिन यह किताब उन सबसे अलग है| यहाँ बहुत ही सरलता और सहजता से एक गम्भीर सामाजिक बदलाव को प्रस्तुत किया गया है जिसका हम स्वागत करते हैं| यदि ऐसे विषय पर किसी राजनीतिक दल के द्वारा लेखन किया जाता है तो उसमें कुछ एकतरफ़ा स्वाद रहने का खतरा हमेशा रहता है| यहाँ, चूँकि लेखिका राजनीति से सम्बन्ध नहीं रखती इसलिए उनके लेखन और नज़रिए में निष्पक्षता साफ़ झलकती है| बिहार की महिलाओं ने बेहद निडरता और जोश के साथ लेखक से बातचीत कर ये साबित कर दिया है कि वे प्रगतिशील हैं|  

                                                                                                                     --पवन कुमार वर्मा
            वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक, बुद्धिजीवी एवं साहित्यकार



सफ़र के बारे में...



प्रतिष्ठा सिंह, लेखिका 

एक महिला होने के नाते दूसरे राज्यों की अपनी बहनों को जानने की इच्छा थी| बिहार में रूचि थी| हमारे मिस्टर ने हमारी उत्सुकता को फिर से हवा दे दी| दिल्ली में मन नहीं लग रहा था| चुनाव सर पर थे और हमारे सर पर बिहार भ्रमण का भूत! सो हम चल पड़े!


-    प्रतिष्ठा सिंह 






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