Thursday, 21 September 2017

शाहनामा-ए-फ़िरदौसी : फ़ारसी महाकाव्य में दास्तानगोई/नासिरा शर्मा


शाहनामा-ए-फ़िरदौसी : फ़ारसी महाकाव्य में दास्तानगोई 



शाहनामा की दास्तानें एक हज़ार वर्ष से भी ज़्यादा समय से पढ़ी-गुनी जाती रही हैं। इस महान कृति में वही रस मिलता है जो क्लासिकल साहित्य की अन्य श्रेष्ठ कृतियों में मिलता है। क्लासिकल साहित्य में इनका वही स्थान है जो महाभारतऔर ओडिशीजैसे ग्रन्थों का है। इस कृति का दायरा केवल ईरान ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व है। फ़िरदौसी ने लगभग तीस वर्ष की लम्बी अवधि में इन दास्तानों को महाकाव्य की शैली में लिखा और विश्व साहित्य में अमर हो गये।  

शाहनामाकी दास्तानें इन्सानी खू़बियों और कमियों के बयान के साथ ही अच्छाई और बुराई का फ़र्क़ बताती हुई इश्क़, रश्क़, जंग, ज़ुल्म और नेकी को बहुत ज़ोरदार शब्दों में सामने लाती हैं। इन्हें पढ़ते हुए पाठक उन चरित्रों में इतना तल्लीन हो जाता है कि वह अपने को उसी दौर का एक नायक समझने लगता है। रुस्तम पहलवान शाहनामाकी दास्तानों का मुख्य पात्र ज़रूर है मगर ईरान की तारीख़ में बादशाहों और रानियों के भी बड़े दिलचस्प किरदार हैं जो आज भी किसी न किसी शक्ल में हमारे समाज में नज़र आते हैं। 

शाहनामाकी दस चुनिन्दा दास्तानों का अनुवाद साहित्य जगत की चर्चित लेखिका नासिरा शर्मा ने प्रस्तुत किया है जो प्रवाहपूर्ण और सरल भाषा में ऐसा आस्वाद देता है जैसे वह हिन्दी भाषा की ही प्राचीन कथाएँ हों। अपने अनुवाद में उन्होंने जगह-जगह फ़ारसी के शेरों को हिन्दी में लिपिबद्ध कर उनका अर्थ भी दिया है! फ़िरदौसी का शाहनामानयी भाषा और एक नये कलेवर में हिन्दी में पहली बार!

नासिरा शर्मा 




1948 में इलाहाबाद (उ. प्र.) में जन्मी नासिरा शर्मा को साहित्य के संस्कार विरासत में मिले। फ़ारसी भाषा साहित्य में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. किया। हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी, अंग्रेज़ी और पश्तो भाषाओं पर उनकी गहरी पकड़ है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला और संस्कृति विषयों की विशेषज्ञ हैं। इराक़ अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, सीरिया तथा भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ साक्षात्कार किये जो बहुचर्चित हुए। युद्धबन्दियों पर जर्मन व फ्रांसीसी दूरदर्शन के लिए बनी फ़िल्म में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही साथ स्वतन्त्र पत्रकारिता में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।

उपन्यास: बहिश्ते ज़हरा, शाल्मली, ठीकरे की मंगनी, ज़िन्दा मुहावरे, अक्षयवट, कुइयाँजान, ज़ीरोरोड, पारिजात, काग़ज़ की नाव, अजनबी जज़ीरा, शब्द पखेरू, दूसरी जन्नत; कहानी संग्रह: शामी का, पत्थरगली, इब्ने मरियम, संगसार, सबीना के चालीस चोर, ख़ुदा की वापसी, दूसरा ताजमहल, इन्सानी नस्ल, बुतख़ाना; रिपोर्ताज: जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैंसंस्मरण: यादों के गलियारे; लेख संग्रह: किताब के बहाने, राष्ट्र और मुसलमान, औरत के लिए औरत, औरत की आवा, औरत की दुनिया; अध्ययन: अफ़गानिस्तान: बुज़कशी का मैदान, मरजीना का देश इरा; अनुवाद: शाहनामा-ए-फ़िरदौसी, काइको इरानियन रेवुलूशन: प्रोटेस्ट पोयट्री, बर्निंग पायर, काली छोटी मछली (समदबहुरंगी की कहानियाँ); इसके अलावा ‘6 खण्डों में अदब में अफ़्रो-एशिया की चुनी हुई रचनाएँ, ‘निज़ामी गजवी’, ‘अत्तारमौलाना रूमीएवं क़िस्सा जाम का(खुरासान की लोककथाएँ) का अनुवाद; नाटक: पत्थर गली, सबीना के चालीस चोर, दहली, इब्ने मरियम, प्लेटफार्म नम्बर सात; बाल साहित्य: भूतों का मैकडोनल, दिल्लू दीमक (उपन्यास), दर्द का रिश्ता, गुल्लू; नवसाक्षरों के लिए: धन्यवाद धन्यवाद, पढ़ने का ह, गिल्लो बी, सच्ची सहेली, एक थी सुल्ताना; टी.वी. फ़िल्म व सीरियल: तड़प, माँ, काली मोहिनी, आया बसंत सखी, सेमल का दरख़्त (टेलीफ़िल्म), शाल्मली, दो बहनें, वापसी (सीरियल)।

 2016 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से पुरस्कृत लेखिका नासिरा शर्मा 
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