Monday, 12 June 2017

भारतीय संविधान राष्ट्र की आधारशिला : ग्रेनविल ऑस्टिन, अनुवाद : नरेश गोस्वामी



भारतीय संविधान राष्ट्र की आधारशिला

ग्रेनविल ऑस्टिन

अनुवाद : नरेश गोस्वामी


प्रस्तुति कृति से पहले भारतीय संविधान से सम्बन्धित अधिकांश लेखन संविधान के नीरस प्रावधानों में उलझ कर रह जाता था। यह तात्कालिकता और वर्णनात्मकता से आक्रान्त एक ऐसा लेखन था जिसमें एक दस्तावेज़ के रूप में संविधान की ऐतिहासिक पूर्व-पीठिकासंविधान सभा की उग्र बहसों के आग्रह-दुराग्रह और चिन्ताएँ अनुपस्थित थीं। इस तरह ग्रेनविल ऑस्टिन की इस रचना ने भारत में संवैधानिक अध्ययन की धारा को एक नया परिप्रेक्ष्य प्रदान किया।

भारतीय संविधान की निर्माण-प्रक्रियाउसके अवधारणात्मक आधार तथा उसकी लोकतान्त्रिाक परिणति से लेकर केन्द्र सरकार के स्वरूपनागरिक अधिकारोंसंघ और राज्य के आपसी सम्बन्धोंन्यायपालिका की भूमिका तथा भाषा के असाध्य विवाद जैसे विभिन्न मुद्दों पर विमर्शी दृष्टि डालती यहकृकृति सिर्फ औपनिवेशिक सत्ता का भाष्य न लिख कर यह दिखाती है कि इन मसलों के सम्बन्ध में भारतीय पक्ष के विभिन्न धड़े क्या सोच रहे थे।

अपने समय के प्रकाशित-अप्रकाशित दस्तावेज़ो के अलावा संविधान सभा के सदस्यों के विस्तृत साक्षात्कारों तथा लेखक द्वारा जुटाये गये अन्य प्राथमिक स्रोतों पर आधारित यह रचना आज एक क्लासिक की हैसियत रखती है।  

                    अनुक्रम 

1. संविधान सभा : बीज से वृक्ष की ओर - 29• सभा : उत्पत्ति और गठन
• 
भारत : एक सूक्ष्म चित्र
• 
सभाकांग्रेस और देश
• 
नेतृत्व तथा निर्णय-प्रक्रिया
2. सामाजिक क्रान्ति : मार्ग का चुनाव – 63• मौज़ूदा विकल्प
• 
चुना गया मार्ग
• 
विकल्प चुनने के कारण
1. कांग्रेस कभी गाँधीवादी थी ही नहीं
2. 
समाजवादी प्रतिबद्घता
3. 
तात्कालिक कारण
4. 
वयस्क मताधिकार की ज़रूरत
3. संविधान की अन्तरात्मा मौलिक अधिकार तथा राज्य के नीति-निर्देशक सिद्घान्त 1 - 98निरन्तरता के साठ वर्ष 
• 1947 का माहौल 
• 
सभा द्वारा मौलिक अधिकारों की रचना
• 
अधिकारों की सीमाएँ
• 
सभा और नीति-निर्देशक सिद्धांत
4. मौलिक अधिकार-2 सामाजिक सुधारराज्य सुरक्षा बनाम 'उचित प्रक्रिया’ - 130 1. उपयुक्त विधि और सम्पत्ति
2. 
सम्पत्ति के अनुच्छेद की संशोधन-प्रक्रिया 
3. 
उपयुक्त विधि और वैयक्तिक स्वतन्त्रता
4. 
निवारक नज़रबन्दी : 1950 से
मौलिक अधिकार तथा नीति-निर्देशक सिद्घान्त : एक सिंहावलोकन
5. कार्यपालिका : लोकतन्त्र की शक्ति
• कार्यपालिका : स्वरूप का प्रश्न 
• 
कार्यपालिका तथा अल्पसंख्यकों के हित
• 
कार्यपालिका : शक्ति की सीमाएँ
1. राष्ट्रपतिमन्त्रिपरिषद् तथा निरीक्षण समितियाँ
2. 
लिखित प्रावधान बनाम पारम्परिक परिपाटियाँ 
कार्यपालिका : सन् 1950 के बाद
6. विधायिका : निर्वाचित सरकार की समन्वयकारी भूमिका 217• मतभेदों के विरुद्घ संघष
• 
द्वितीय सदनों की समस्या
7. न्यायपालिका और सामाजिक क्रान्ति 245• सर्वोच्च न्यायालय
• 
न्यायपालिका की स्वतन्त्रता
• 
एकजुटता का स्थायी विषय
8. संघवाद-1 : एक सौहार्द्रपूर्ण संघ 277शक्तियों का वितरण
1. विधायी सूचियों में शक्ति-विभाजन
2. 
संघीय कार्यपालिका का प्राधिकार तथा शक्तियों का वितरण
संघ का अन्यतम हथियार : आपातकालीन प्रावधान
9. संघवाद-2 : राजस्व का वितरण 321
1. भारत के संघीय वित्त की पृष्ठ भूमि
2. 
वित्तीय प्रावधानों की रचना
10. संघवाद-3 : राष्ट्रीय नियोजन 346• भाषाई प्रान्तों का मुद्दा और संविधान 
• 
संविधान का रियासतों में प्रसार
11. संशोधन : संघ का लचीलापन 373
12. भाषा और संविधान : एक आधा-अधूरा समझौता388
• गाँधी के आगमन से संविधान सभा तक
• 
सभा में शुरुआती झड़प
1. संविधान के मसौदे की रचना
2. 1948 
की घटनाएँ 
3. 
राष्ट्रीय भाषा
4. 
जनवरी-अगस्त, 1949 की घटनाएँ
• सर्वसम्मति पर आधारित निर्णय-प्रक्रिया
• 
सामंजस्य का सिद्घान्त
• 
चयन और समायोजन का हुनर
• 
युद्ध का शंखनाद
• 
उपसंहार
13. निष्कर्ष : एक सफ ल संविधान की अन्तर्कथा450• भारत का मौलिक योगदान
1. सर्वसम्मति पर आधारित निर्णय-प्रक्रिया
2. 
सामंजस्य का सिद्घान्त
• चयन और समायोजन का हुनर
• 
संविधान का आलोचना-पक्ष
• 
इसकी सफलता का श्रेय भारत की जनता को जाता है
परिशिष्ट 1 483परिशिष्ट 2 486परिशिष्ट 3 492ग्रन्थ-सूची 513

 


नरेश गोस्वामी ने मेरठ और दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की है। उन्होंने हिन्दी समाज विज्ञान कोश’ (सं. अभय कुमार दुबे) में लगभग पैंसठ लेखों का योगदान दिया है और ग्रेनविल ऑस्टिन,स्टुअर्ट हॉलजोशुआ फिशमैनबृजबिहारी कचरु आदि पर परिचयात्मक लेखन भी किया है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके कुछ प्रमुख शोध-लेख और समीक्षाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। धर्म और राजनीति के अन्तःसम्बन्धों का अध्ययन उनके शोध का मुख्य विषय है। सम्प्रति वे विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएसदिल्ली) द्वारा प्रकाशित शोध-जर्नल प्रतिमान’ में सहायक सम्पादक हैं।

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