Monday, 5 June 2017

‘शहरनामा गोरखपुर’ : सम्पादक: डॉ. वेदप्रकाश पाण्डेय


गोरखपुर पर ऐतिहासिक दस्तावेज़
शहरनामा गोरखपुर
सम्पादक: डॉ. वेदप्रकाश पाण्डेय

मूल्य :1495/- | 978-93-5229-698-9 | तिहास  

  पुस्तक के सन्दर्भ में 

मनीषी आचार्यों ने मनुष्य के अस्तित्वउसकी चेतनाउसके आनन्दजिजीविषाइच्छा और आकांक्षा पर बहुत कुछ कहा-लिखा है। उन ढेर सारी बातों में जो बात ज्यादा महत्त्वपूर्ण लगती हैवह है अपने इतिहास-भूगोलस्वस्थ परम्पराओंविरासतोंधरोहरों और यशस्वी व्यक्तियों के विषय में जानना। जानना उनके जीवन-संघर्ष के बारे मेंउनके कृती व्यक्तित्व के बारे मेंउनकी उपलब्धियों के बारे में। यह भी जानना कि आज जहाँ हम खड़े हैं जो सुख-सुविधासंसाधन-संरक्षण-सम्मान हमें प्राप्त है उसकी विकास-यात्रा की कहानी क्या है-कैसी हैहमारे पूर्वजों का हमारे लिए प्रदेय क्या और कितना है?

कहा गया है- जानकारी (परिचय) से विश्वास होता है। विश्वास से प्रेम पैदा होता है और प्रेम ही आगे जाकर भक्ति (श्रद्धा) का रूप धारण कर लेता है। बेहद जरूरी है अपने अतीत कोइतिहास को जाननाउसे खँगालनाउसकी खूबियों-खामियों से परिचित होना और उसके आलोक में अपने वर्तमान को सँवारना तथा अच्छे भविष्य की नींव रखना। अपने इतिहासअतीतविरासत और गौरवशाली परम्पराओं से कटकर कोई व्यक्ति-जाति जिन्दा नहीं रह सकती। इतिहास और वर्तमान के ज्ञान का आसव (रिक्थ) मनुष्य के स्वर्णिम भविष्य के लिए अमृत का काम करता है।


 डॉ. वेदप्रकाश पाण्डेय 


अक्टूबर 1944 को गोरखपुर जनपद के गाँव खोरिया भीटी में जन्म। गोरखपुर विश्वविद्यालय से 1968में हिन्दी में एम. ए. प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान। बढ़ने दो आकाश’ (दोहा संग्रह, 1998), ‘हनुमद् भक्ति: परम्परा और साहित्य’ (शोधग्रन्थ, 2004), ‘बिन पानी सब सून’ (निबन्ध सग्रह, 2004), ‘मेरा गाँव’ (संस्मरणात्मक इतिहास, 2009), ‘धरीक्षण मिश्र’ (साहित्य अकादमी के लिए विनिबंध, 2011) औरप्रश्नचिन्ह गहरे हुए’ (दोहा संग्रह, 2011) प्रकाशित।

पं. धरीक्षण मिश्र की भोजपुरी कविताओं का संग्रह कागज के मदारी,’ ‘धरीक्षण मिश्र रचनावली’ (चार खण्डों में) और सारस्वत बोध के प्रतिमान: आचार्य रामचन्द्र तिवारी’ का सम्पादन।


भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय द्वारा पर्यावरण पर साहित्य लेखन के लिएस्वामी शरणानन्द सरस्वती द्वारा प्राचार्य के रूप में उल्लेखनीय कार्यों के लिएमुख्य वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी)उत्तर प्रदेश द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए, ‘अमृत कलश’ और संगमगोरखपुर द्वारा साहित्य सेवा के लिए पुरस्कृत/ सम्मानित। श्री चन्द्रिका शर्मा फूलादेवी स्मृति सेवा ट्रस्ट रामपुर बुजुर्ग’, महाराजगंज द्वारा आदर्श शिक्षक सम्मान’ 2015 तथा देवशरण पाण्डेय रूमाली देवी एजूकेशनल ट्रस्ट’ महाराजगंज द्वारा आदर्श प्राचार्य सम्मान’ 2015 प्रदत्त।

14 दिसम्बर 1968 से फरवरी 1983 तक जवाहर लाल नेहरू पी.जी. कालेज महाराजगंज में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष। 10 फरवरी 1983 से 30 जून 2006 तक किसान पी.जी. कालेज सेवरहीतमकुही रोड,कुशीनगर के प्राचार्य।

सम्प्रति: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपने दूसरे गाँव बालापारगोरखपुर-273007 में रहकर स्वाध्याय,लेखन और समाज कार्य। 


पुस्तक खरीदने हेतु इस लिंक पर क्लिक करें - 

पुस्तकें यहाँ भी उपलब्ध हैं।