Tuesday, 9 May 2017

'लता:सुर-गाथा' को राष्ट्रीय पुरस्कार ‘स्वर्ण कमल’2016


लता:सुर-गाथा

को राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्ण कमल’2016

राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह निदेशालय (भारत सरकार) द्वारा स्वर्ण कमल’2016 पुरस्कार वाणी प्रकाशन व लेखक यतीन्द्र मिश्र को विज्ञान भवन में कल 64वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के द्वारा दिया गया है। यह पुरस्कार वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित फ़िल्म क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण पुस्तक लेखन लता:सुर-गाथा’ के लिए दिया गया है । 
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार में सम्मान चिह्न स्वर्ण कमल तथा रु75000/- की राशि प्रकाशक व लेखक को पृथक-पृथक प्रदान की गयी है।



सम्मान ग्रहण करते हुए अरुण माहेश्वरी 

वाणी प्रकाशन 54 वर्षों से 32 विधाओं से भी अधिक मेंबेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा हैइसने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं| 
वाणी प्रकाशन ने देश के 3,00,000 से भी अधिक गाँव2,800 कस्बे54 मुख्य नगर और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई हैवाणी प्रकाशन भारत की प्रमुख पुस्तकालय प्रणालियोंसंयुक्त राष्ट्र अमेरिकाब्रिटेन और मध्य पूर्वसे भी जुड़ा हुआ हैवाणी प्रकाशन की सूची मेंसाहित्य अकादेमी से पुरस्कृत 32 पुस्तकें और लेखकहिन्दी में अनूदित 9 नोबेल पुरस्कार विजेता और 24 अन्य प्रमुख पुरस्कृत लेखक और पुस्तकें शामिल हैंसंस्था को क्रमानुसार नेशनल लाइब्रेरीस्वीडनइण्डोनेशियन लिटरेरी क्लब और रशियन सेंटर ऑफ़ आर्ट कल्चर तथा पोलिश सरकार द्वारा इंडो-स्वीडिशरशियन और पोलिश लिटरेरी सांस्कृतिक विनिमय विकसित करने का गौरव प्राप्त हैवाणी प्रकाशन ने 2008 में भारतीय प्रकाशकों के संघ द्वारा प्रतिष्ठित ‘गण्यमान्य प्रकाशक पुरस्कार’ भी प्राप्त किया हैलन्दन में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा 25 मार्च 2017 को वातायन सम्मान तथा 28 मार्च 2017 को वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक व वाणी फ़ाउंडेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी को ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में एक्सीलेंस अवार्ड से नवाज़ा गया । प्रकाशन की दुनिया में पहली बार हिन्दी प्रकाशन को इन दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है । हिन्दी प्रकाशन के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना मानी जा रही है। और राष्ट्रीय फिल्म निदेशलय द्वारा हिन्दी की पुस्तक पर यह पुरस्कार 12 वर्षों बाद दिया गया है।


सम्मान ग्रहण करते हुए यतीन्द्र मिश्र 


यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कविसम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनके तीन कविता-संग्रहशास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह एवं शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर हिन्दी में प्रामाणिक पुस्तकें भी वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर निबन्धों की एक किताब ‘विस्मय का बखान’ तथा कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन ‘भैरवी नाम से प्रकाशित हुआ है। फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे’ तथा ‘मीलों से दिन’ नाम से सम्पादित हैं। ‘गिरिजा’ का अंग्रेजी, ‘यार जुलाहे’ का उर्दू तथा अयोध्या शृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। उन्हें रज़ा पुरस्कारभारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कारभारतीय भाषा परिषद् युवा पुरस्कारहेमन्त स्मृति कविता सम्मान, महाराणा मेवाड़ सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सरायनयी दिल्ली की स्वतंत्र शोधवृत्ति मिली हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिकाइंग्लैण्डमॉरीशस एवं आबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउण्डेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं।




लता:सुर-गाथा’ पुस्तक भारत-रत्न लता मंगेशकर से युवा संगीत व सिनेमा अध्येता यतीन्द्र मिश्र के बीच छह वर्षों तक चले लम्बे संवाद पर आधारित है  लता जी के आत्मीय सहयोग से निर्मित उनके सुरों की यह गाथा उनके प्रशंसकों को समर्पित है। उनकी जीवंत यात्रा का दस्तावेज़जिसमें लता मंगेशकर का अद्भुत संगीतसंसार उजागर हुआ है।

 मीडिया कवरेज 
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4 मई  2017, पृष्ठ संख्या - 12
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4 मई  2017, पृष्ठ संख्या - 16 
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4 मई  2017
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4 मई  2017, पृष्ठ संख्या - 5

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5  मई  2017, पृष्ठ संख्या - 
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