Thursday, 2 March 2017

हिंदी महोत्सव'17 के वक्तागण



हिंदी महोत्सव'17 के वक्तागण 



निष्ठा गौतम दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ाती हैं और एशिया की विख्यात विचार मंडली ‘आब्जर्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन’ से सम्बद्ध हैं। संस्कृति, जेंडर और सैन्य विषयों से सम्बन्धित उनके लेख ‘वाल स्ट्रीट जर्नल,’ ‘डेली मेल,’ ‘द कैरवान,’ ‘इंडिया टुडे,’ ‘हिन्दुस्तान टाइम्स,’ ‘द पायनियर’ और ‘डीएनए’ जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होते रहते हैं। टेलीविजन और रेडियो के प्रमुख कार्यक्रमों में भी वे एक विशेषज्ञ के रूप में लगातार हिस्सा लेती रहती हैं।

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निज़ामी बंधु उस्ताद चन्द निज़ामी, शादाब फरीदी निज़ामी और शोराब फरीदी निज़ामी का एक विख्यात कव्वाली समूह है। निज़ामी बंधुओं के पास इस हुनर की सात शताब्दी लम्बी और समृद्ध विरासत है। प्रतिष्ठित सिकंदर घराना से सम्बन्धित निज़ामी बंधु हज़रत निजामुद्दीन औलिया के दरगाह पर अमीर ख़ुसरो की लिखी कव्वाली की प्रस्तुति करते हैं। उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित मंचों और महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शिरकत की है। 2003 में नई दिल्ली में ‘जहाँ-ए-ख़ुसरो’ में उनकी प्रस्तुति यादगार रही। इसके अलावा उन्होंने क़ुतुब फेस्टिवल (नई दिल्ली), विरासत फेस्टिवल (देहरादून), उद्यान म्यूजिक फेस्टिवल (मुम्बई), आई टी सी संगीत रिसर्च एकेडमी (कोलकाता), स्पिक मैके (भारत के विभिन्न जगहों में) और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (नई दिल्ली) में बेहतरीन और यादगार प्रस्तुतियाँ की हैं। उन्होंने अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड, ईरान, वेस्ट इंडीज, तंजानिया और मोरक्को आदि देशों में भी खूब नाम कमाया है। 2011 की सुपरहिट फ़िल्म ‘रॉकस्टार’ में इनकी कव्वाली प्रस्तुति को फ़िल्म के एक अभिन्न हिस्से के रूप में दिखाया गया। निजामी बंधु अपनी प्रस्तुतियों से न केवल कला के इस माध्यम की खूबियों को जाहिर करते हैं, बल्कि ख़ुदा के पाक संदेश को भी पूरी दुनिया में फैलाते हैं।

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ओम थानवी साहित्य, कला, सिनेमा, रंगमंच, पुरातत्त्व और पर्यावरण में गहरी रुचि रखते हैं। देश-विदेश में भ्रमण कर चुके हैं। बहुचर्चित यात्रा-वृत्तान्त मुअनजोदाड़ो के लेखक हैं। अपने अपने अज्ञेय पुस्तक का मूलत: उद्देश्य सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। अज्ञेय के साथ ओम थानवी के पारिवारिक सम्बन्ध भी रहे हैं, थानवी जी अज्ञेय से मिलते रहते थे। एक लगाव से वह अज्ञेय को कितना समझ पाए और अज्ञेय के बारे में कितना संकलन कर पाए। इन्होंने इसका सही रूप 'अपने अपने अज्ञेय' पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया है!

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बिहार के मुंगेर जिले में जन्मे और पले-बढ़े प्रचण्ड प्रवीर ने 2005 में भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान, दिल्ली से रासायनिक अभियान्त्रिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। 2010 में हार्पर हिन्दी से प्रकाशित इनके पहले उपन्यास ‘अल्पाहारी गृहत्यागी : आई आई टी से पहले’ ने कई युवा हिन्दी लेखकों को प्रेरित किया। 2016 में प्रकाशित इनकी दूसरी पुस्तक ‘अभिनव सिनेमा : रस सिद्धान्त के आलोक में विश्व सिनेमा का परिचय’ हिन्दी के वरिष्ठ आलोचकों द्वारा काफी सराही गई। प्रचण्ड प्रवीर वर्तमान में गुड़गाँव (हरियाणा) में एक रिस्क मैनेजमेंट फर्म में काम कर रहे हैं।

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प्रतीक्षा पांडे का परिचय ख़ास उन्हीं के अंदाज़ में कुछ यों है : “सिमिट्री डिसऑर्डर हैचिप्स का पैकेट गलत तरीके से फाड़ दो तो बुरे गाने सुनाकर ‘डिवाइन रिवेंज’ लेती हैकॉन्वेंट से पढ़ी है और कनपुरिया हैजन्नेटर जैसी हँसीटीम की इंगलिस पिचर है जब भी बड़ी होगी तो कवियत्री बनेगी सुअर की आवाज निकालती है क्यूट फेस बनाकरएक हाथ पर कौआ और दूजे पर मछली बनवा रखी है थोड़ी सिलबिल्ली हैं और पूरी ठस लड़कियों को लेकर कोई हलकी बात कहे तो मौके पर ही पेल देती हैंस्कार्फ और सर्फिंगदोनों से प्यार है।” 
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प्रतिष्ठा सिंह ने कुछ समय तक लोकसभा सचिवालय में इन्टर्नशिप की है और इटैलियन भाषा में अध्ययन और शोध कार्य किया है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में यू. टी. ए. रह चुकी हैं और वहाँ इटैलियन पढ़ाती भी हैं। लेखन में और देश-दुनिया के भ्रमण में खूब रुचि है और जब कभी समय मिलता है, कविताएँ और कहानियाँ लिखती हैं। वाणी प्रकाशन से हाल ही में आई उनकी पुस्तक ‘वोटर माता की जय!’ इन दिनों बहुत तेजी से चर्चित हो रही है। यह पुस्तक बिहार के चुनाव में महिलाओं की भागीदारी का प्रामाणिक दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है।
 
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प्रियदर्शन की गिनती उन दुर्लभ मीडियाकर्मियों में होती है जिन्होंने मीडिया को केवल यश कमाने का जरिया न बनाकर उसे व्यावहारिक स्तर पर सोचने-समझने का एक लोकतान्त्रिक स्पेस दिया है। किसी ख़ास पेशे में रहते हुए भी अपने व्यापक सरोकारों के चलते वे निरन्तर एक संस्कृतिकर्मी की सक्रिय भूमिका में आते रहे हैं। प्रियदर्शन जी का साहित्य से भी बहुत गहरा लगाव है और वे लम्बे अरसे से साहित्य, समाज, सिनेमा तथा मीडिया पर लगातार लिख रहे हैं। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित ‘ग्लोबल समय में गद्य,’ ‘ग्लोबल समय में कविता’ और ‘नये दौर का नया सिनेमा’ जैसी पुस्तकों में उनके अध्ययन के बहुआयामी पहलुओं को देखा जा सकता है। अब तक उनके दो कविता संग्रह और दो कहानी संग्रहों के अलावा आलोचना की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने कई विश्वप्रसिद्ध कालजयी कृतियों का अनुवाद भी किया है। ‘उसके हिस्से का जादू’ कहानी संग्रह के लिए उन्हें वर्ष 2009 का स्पंदन सम्मान मिल चुका है और वाणी प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक ‘नये दौर का नया सिनेमा’ को नवम्बर 2016 में मुम्बई के मामी फिल्म समारोह में हिन्दी के लिए ‘राइटिंग इन एक्सिलेंस स्पेशल मेंशन’ में शामिल किया गया है।

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पुष्पेश पन्त ने अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध, भारतीय विदेश नीति, संस्कृति, धर्म, यात्रा और भारतीय व्यंजनों पर लगभग 50 पुस्तकों का लेखन किया है। उनकी पुस्तक ‘इंडिया : कुक बुक’ को न्यूयॉर्क टाइम्स की ओर से वर्ष 2010 का बेस्टसेलर घोषित किया गया है। पुष्पेश पन्त अंग्रेज़ी और हिन्दी अखबारों में नियमित स्तम्भ लिखते हैं और रेडियो और टेलीविजन पर लगातार चर्चा-परिचर्चा में भाग लेते रहे हैं। उन्होंने डिस्कवरी और बीबीसी जैसे चैनल के कार्यक्रमों में शिरकत की है एवं मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों के जनजातीय जीवन पर डॉक्यूमेंट्री का निर्माण भी किया है।
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रचना यादव एक ऐसी पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती हैं जहाँ भारतीय संस्कृति के मूल्यों को हमेशा बढ़ावा दिया जाता रहा है। वे भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली से जन संचार में स्नातकोत्तर हैं और संस्थान का ‘सिल्वर साल्वर अवार्ड’ भी प्राप्त कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से कत्थक में ‘प्रभाकर’ का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। रवि जैन के निर्देशन में उन्होंने नृत्याभ्यास शुरू किया और बाद में दृष्टिकोण डांस फाउंडेशन, अदिति मंगलदास डांस कंपनी से जुड़कर अपना प्रशिक्षण जारी रखा। आगे चलकर पं. जयकिशन महाराज के निर्देशन में नृत्य में उच्चतर प्रशिक्षण जारी रखा। रचना यादव ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई सांस्कृतिक समारोहों में शिरकत की है और भारत के कई शहरों में एकल नृत्य प्रस्तुति भी दी है। वे अपनी संस्था ‘रचना यादव कत्थक स्टूडियो’ के माध्यम से 60 छात्रों को प्रशिक्षण देती हैं और ‘हम कदम’ नाम से एक वार्षिक आयोजन भी करती हैं जिसमें नयी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया जाता है।

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राहुल देव CNEB न्यूज चैनल के प्रधान सम्पादक और सी ई ओ हैं। उन्हें जनसत्ता, आजतक, जी न्यूज, दूरदर्शन तथा जनमत न्यूज जैसे प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों में वरिष्ठ पदों पर काम करने का लगभग चार दशकों का लम्बा अनुभव प्राप्त है। वे मंगलायत विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जन संचार विभाग से एक फैकल्टी के रूप में भी जुड़े हैं। अकादमिक जगत के अपने अन्य सहयोगियों के साथ राहुल देव का भी यह विश्वास है कि वे अपने सुदीर्घ अनुभवों के आधार पर अकादमिक क्षेत्र में व्याप्त व्यवहारिक समस्याओं को दूर कर इस क्षेत्र को और भी समृद्ध बना सकते हैं।

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