Thursday, 9 February 2017

Fresh Arrival : Ismat Aapa Edited by Sukrita Paul Kumar, Amitesh Kumar



इस्मत चुग़ताई पर एक नायाब किताब I 

​​
 सुकृता पॉल कुमार व अमितेश कुमार 

द्वारा सम्पादित पुस्तक

इस्मत आपा



आई.एस.बी.एन: 978-93-5000-092-2 (हार्ड कवर)
आई.एस.बी.एन: 978-93-5000-978-9 (पेपरबैक)
 विषय:  आलोचना 
 संस्करण:  प्रथम 
वर्ष: 2016  
 मूल्य: 895/-  हार्ड कवर पेपर बॅक - 295/-
 पृष्ठ संख्या: 318   


मशहूर और हर दिल अजीज अफ़सानानिगार इस्मत चुग़ताई के प्यार और सम्मान का नाम है
 इस्मत आपा’ और यही इस किताब का भी नाम है। पाठक इस किताब को इस्मत चुग़ताई के अदबी
 संसार की एक झाँकी के रूप में देख भी सकते हैं। 


  पुस्तक के सन्दर्भ में 

इस्मत आपा’ में इस्मत के अदबी संसार के बेहतरीन नमूने हैं, अफ़साने हैंगैर अफ़सानवी नस्त्र हैंबक़लम ख़ुद है और उन्हीं के लफ़्ज़ों में उनका सिनेमाई सफ़र भी दर्ज है। यानी इस किताब में आप इस्मत के चुनिन्दा अफ़साने तो पढ़ेंगे हीयह भी पढ़ेंगे कि ख़ुद इस्मत उन अफ़सानों को कैसे पढ़ती हैं या अपनी चीजों को देखने का उनका नज़रिया क्या है। किताब के आख़िर में इस्मत के चुनिन्दा ख़तूत और डायरियाँ भी हैं जो आपके पढ़ने के लुत्फ़ को बढ़ायेंगी। यहाँ इस्मत के अफ़सानेफ़न और किरदार पर मुकम्मल लेख तो हैं हीइस्मत को याद करते हुए उनकी शख्सियत और मिज़ाज पर अपने ज़माने की नामचीन अदीबों की यादें और लेख भी पढ़ने को मिलेंगे। ये यादें बहुत करीने से संजोकर रखे गए कतरनों को मिलाकर बनायी गयी हैं और ये तमाम लेख बहुत दिल लगाकर लिखे गए हैं। कुछ लेखों को बहुत मेहनत से तर्ज़ुमा करके हिन्दी में पहली बार नयी-नवेली बनाकर लाया गया है। सम्पादकों ने न जाने कहाँ-कहाँ की ख़ाक छानकर धूल फाँकती हुई पत्र-पत्रिकाओं में छिपे हुए दूभर खज़ाने को आपके लिए ढूँढ़ निकाला है। किताब में संकलित छोटी-बड़ी रचनाएँ गोया हीरे के छोटे-बड़े टुकड़े हैं जिनसे पूरी किताब जगर-मगर करती है। इनसे आपकी आँखें ज़रूर चौंधाएँगी लेकिन उनमें जलन नहीं होगीमगर बहुत दूर तक मुसलसल आगे बढ़ते रहने के लिए हौसला और रोशनी मिलेगी।  

इस किताब के बहाने आपके सामने इस्मत के अदबी समय का एक दरीचा खुलता चला जाएगा। हिन्दी में पहली बार इस्मत के बारे में किसी एक किताब में इतना सबकुछ एक साथ! इस्मत के सौ साल पूरे होने की मुबारक घड़ी में वाणी प्रकाशन की ख़ास सौगात!


सुकृता पॉल कुमार



जन्म: 1949 में नैरोबी (केन्या)। 
अध्यापन/फैलोशिप: सुकृता पॉल कुमार ने लगभग चार दशकों से स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं में अंग्रेज़ी-अमेरिकन साहित्य और अनुवाद के माध्यम से भारतीय साहित्य का अध्यापन किया है। उन्हें अब तक लगभग पन्द्रह फैलोशिप प्राप्त हो चुके हैं जिनमें भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (शिमला) की फैलोशिप के अलावा टोरंटोकैम्ब्रिजलन्दनलोवाकैलिफोर्निया और हांगकांग के विश्वविद्यालयों में व्याख्यान और प्रस्तुति के लिए प्रतिष्ठित फैलोशिप और सम्मान शामिल हैं। वर्ष 2012 में भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय द्वारा भारत की सांस्कृतिक विविधता से सम्बन्धित एक पुस्तक परियोजना के लिए उन्हें टैगोर फेलोशिप प्रदान किया गया है। 
प्रमुख कृतियाँ: मैनवुमन एंड एंड्रोग्यनीकनवरशेसंस ऑन मॉडर्निज़्मद न्यू स्टोरीनैरेटिंग पार्टिशन (आलोचना)मैपिंग मेमोरीजइस्मत: हर लाइफहर टाइम्सक्रॉसिंग ओवरस्पीकिंग फॉर मायसेल्फद डाइंग सन (सम्पादन)अपूर्णाफोल्ड्स ऑफ साइलेंसविदाउट मार्जिन्सरोइंग टूगेथरपोयम्स कम होमसेवेन लीव्स: वन ऑटम (कविता संग्रह)।
सम्प्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय में अरुणा आसफ अली चेयर और विश्वविद्यालय के क्लस्टर इन्नोवेशन सेंटर में पाठ्यक्रम समन्वयक।


अमितेश कुमार

जन्म: 16 जनवरी 1987, सीतामढ़ी (बिहार)।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से हबीब तनवीर के रंगकर्म पर पीएच.डी. करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में ही अध्यापन। रंगमंच पर हिन्दी के पहले ब्लॉग रंगविमर्श’ का संचालन। रंगमंच से सक्रिय जुड़ाव। वाक्प्रतिमानकथादेशपाखीपक्षधरबनास जनजनसत्ताजनवाणी और देशबन्धु समेत हिन्दी की अनेक स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित।

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धन्यवाद