Saturday, 26 November 2016

शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे मुनव्वर राना जी को वाणी प्रकाशन की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!



शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे

मुनव्वर राना जी 

को वाणी प्रकाशन की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 



"जागते रहना ही अब अपना मुक़द्दर है..." 

अलग मज़हब के थे लेकिन दुखों में साथ रहते थे 
हम ऐसी दोस्ती का रंग कच्चा छोड़ आए हैं...

गले मिलती थीं आपस में जहाँ पर मुख्तलिफ़ क़ौमें
वहाँ का किसलिए हम आबो-दाना छोड़ आए हैं...

हमें इस ज़िन्दगी पर इसलिए भी शर्म आती है 
कि हम मरते हुए लोगों को तन्हा छोड़ आए हैं...

हमेशा जागते रहना ही अब अपना मुक़द्दर है

हम अपने घर में सब लोगों को सोता छोड़ आए हैं...