Thursday, 10 November 2016

Book Launch : Lata Sur-Gatha by Yatindra Mishra



 ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में एक सुरमई शाम की कुछ गवाहियाँ... 

यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक 'लता सुर-गाथापर आयोजित परिचर्चा की कुछ तस्वीरें:

पुस्तक का विमोचन करते हुए 
 विद्या  शाह , यतीन्द्र मिश्र , मनीष पुष्कले और अदिति  माहेश्वरी-गोयल 



लता जी में एक दुर्लभ फोटोग्राफिक मेमोरी है 
इसलिए जब उनसे बातचीत का सिलसिला चल निकला
 तो उनकी सांगीतिक ज़िन्दगी की परत-दर-परत खुलती चली गयी..- यतीन्द्र मिश्र




महान कला और कलाकारों में हमेशा एक सादृश्य होता है 
और यतीन्द्र जी की यह किताब इस खूबी को बखूबी उजागर करती है...- विद्या शाह


'लता : सुर-गाथा' पुस्तक के कलात्मक पहलू में एक 'नोस्टेल्जिक एलिमेंट' है...- मनीष पुष्कले


***


लता सुर-गाथा 
आई.एस.बी.एन: 978-93-5072-841-3
आई.एस.बी.एन: 978-93-5072-842-0
 विषय:  संगीत/सिनेमा/कला 
 संस्करण:  प्रथम 
वर्ष: 2016
 मूल्य: 1495/-(हार्ड कवर  पेपर बॅक - 695/-
 पृष्ठ संख्या: 640 


 पुस्तक अंश  

उनकी आवाज़ से चेहरे बनते हैं। ढेरों चेहरे,जो अपनी पहचान को किसी रंग-रूप या नैन नक्शे से नहीं, बल्कि सुर और रागिनी के आइनें में देखने से आकार पाते हैं। एक ऐसी सलोनी निर्मिती, जिसमें सुर का चेहरा दरअसल भावनाओं का चेहरा बन जाता है। कुछ-कुछ उस तरह,जैसे बचपन में पारियों की कहानियों में मिलने वाली एक रानी परी की उदारता और प्रेम से भीगा हुआ व्यक्तित्व हमको सपनों में भी खुशियों और खिलोंनों से भर देता था। बचपन में रेडियों या ग्रामोफोन पर सुनते हुए किसी प्रणय-गीत या नृत्य की झंकार में हमें कभी यह महसूस ही नहीं हुआ कि इस बक्से के भीतर कुछ निराले द्रंग से मधुबाला या वहीदा रहमान पियानो और सितार कि धुन पर थिरक रही हैं, बल्कि वह एक सीधी-सादी महिला कि आवाज़ कम झीना-सा पर्दा ज्यादा है, जिस पर फूलों का हर सिंगार, पंखुरियों का रंग और धरती पर चंद्रमा कि टूटकर गिरी हुई किरणों का झिलमिलाहट पसरी हुई है।


यतीन्द्र मिश्र

यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, सम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनके अब तक तीन कविता-संग्रह, शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह एवं शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर हिन्दी में प्रामाणिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर निबन्धों की एक किताब विस्मय का बखानतथा कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन भैरवीनाम से प्रकाशित हुआ है। वरिष्ठ कवि कुँवरनारायण पर एकाग्र तीन पुस्तकों क्रमशः कुँवरनारायण - संसारएवं उपस्थिति’, ‘कई समयों मेंएवं दिशाओं का खुला आकाश’, अशोक वाजपेयी के गद्य का एक संचयन किस भूगोल में किस सपने मेंतथा अज्ञेय काव्य से एक चयन जितना तुम्हारा सच हैप्रकाशित हैं। साथ ही, फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः यार जुलाहेतथा मीलों से दिननाम से सम्पादित हैं। गिरिजाका अंग्रेजी, ‘यार जुलाहेका उर्दू तथा अयोध्या शृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। उन्हें रज़ा पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, हेमन्त स्मृति कविता सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सराय, नयी दिल्ली की स्वतंत्र शोधवृत्ति मिली हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं आबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउण्डेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं।

'लता सुर-गाथा' के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -
http://www.vaniprakashan.in/lpage.php?word=LATA+%3A+SUR+GATHA

   पुस्तकें यहाँ भी उपलब्ध है