Monday, 24 October 2016

Book launch : Haath Kee Lakeeren by Bhaichand Patel.


हाथों की लकीरों पे मत जा ए ग़ालिब।
किस्मत उनकी भी होती है जिनके हाथ नही होते।।

उपन्यास का विमोचन करते हुए श्याम बेनेगल, साथ में लेखक भाईचन्द पटेल


उपन्यास का विमोचन करते हुए श्याम बेनेगल, साथ में लेखक भाईचन्द पटेल



जाने-माने लेखक और स्तंभकार Bhaichand Patel का उपन्यास (हिन्दी रूपांतरण) ‘हाथ की लकीरें’ एक ऐसे नायक की कथा है जो अपने खोए हुए बचपन की तलाश करते हुए अपनी नियति की भँवरों में लगातार तैरता-उतराता रहता है। वह लड़ता है, जूझता है, थकता है लेकिन हारता नहीं है। 
एक साहसी यात्री की करुण गाथा!



भाईचंद पटेल का यह पहला उपन्यास हाथ की लकीरें एक ऐसे युवक की जीवन गाथा है जिसमें निर्धनता से समृद्धि की ओर एक यात्रा और खोये हुए बचपन की स्मृतियों के चिटीआर हैं। ये स्मृतियाँ और ये यात्राएं कभी क्रमानुसार और कभी व्यतिक्रमानुसार एक साहसी यात्री के अगले पड़ाव की दिशा में बढ़ती रहती है।  





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