Thursday, 20 October 2016

​धर्मवीर भारती की दो महत्त्वपूर्ण पुस्तकें

सपना अभी भी- धर्मवीर भारती
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..... क्योंकि सपना है अभी भी- 
इसलिए तलवार टूटी, अश्व घायल 
कोहरे-डूबी दिशाएँ
कौन दुश्मन,कौन अपने लोग सब कुछ धुन्ध धूमिल 
किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी 
........क्योंकि है सपना अभी भी!

यह काव्य संकलन विशाल पाठक वर्ग के लिए एक काव्योत्सव ही नहीं है, एक अतिरिक्त विशिष्ट अनुभति भी है, जहां कवि समस्त काव्य-क्षमताएं अपने चरमोत्कर्ष पर हैं! पर वह चरमोत्कर्ष भी विराम नहीं क्योंकि है सपना अभी भी-
( पूरी कविता सपना अभी भीमें संकलित है)

सपना अभी भीके लिए इस लिंक पर जाएँ:  


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निराला के प्रति – धर्मवीर भारती
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वह है कारे कजरारे मेघों का स्वामी
ऐसा हुआ कि
युग की काली चट्टानों पर 
पाँव जमा कर 
वक्ष तान कर 
शीश घुमाकर 
उसने देखा 
नीचे धरती का ज़र्रा-ज़र्रा प्यासा है,
कई पीढ़ियाँ 
बूँद-बूँद को तरस-तरस दम तोड़ चुकी हैं...

(पूरी कविता 'कुछ लम्बी कविताएँ' में संकलित है)

'कुछ लम्बी कविताएँ' के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :