Friday, 9 September 2016

Sudama Pandey Ka Prajatantra by Dhoomil

द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया : सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

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'सुदामा पाँड़े का प्रजातन्त्र' | धूमिल 
ISBN978-93-5072-645-7  | मूल्य:225/- 
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वाणी प्रकाशन प्रस्तुत करता है साठोत्तरी पीढ़ी के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कवि और हिन्दी कविता के 'एंग्री यंग मैन' धूमिल का अन्तिम और दुर्लभ कविता संग्रह 'सुदामा पाँड़े का प्रजातन्त्र'
इस संग्रह के बारे में विष्णु खरे लिखते हैं : "सुदामा पाँड़े का प्रजातन्त्र’—कविता तथा संग्रह का यह शीर्षक ही कवि एवं उसके सृजन संसार के बारे में हमें आगाह कर देता है। धूमिल उसमें अपने वास्तविक जन्म-नाम का प्रयोग कर रहे हैं किन्तु वे स्वयं को ब्राह्मणत्व तथा सम्भावित अभिजात साहित्यिकता का प्रतीक पाण्डेयनहीं लिखते, न वे ठेठ पाण्डेका प्रयोग करते हैं बल्कि अपने आर्थिक वर्ग तथा समाज के व्यंग्य-उपहास को अभिव्यक्ति देने वाले पाँड़ेको स्वीकार करते हैं।
सुदामाके अतिरिक्त सन्दर्भों से यह पूरा नाम और कई अर्थ प्राप्त कर लेता है। 
ऐसे मामूली नाम वाले व्यक्ति का प्रजातन्त्रकैसा और क्यों हो सकता है वही इन कविताओं में बहुआयामीय अभिव्यक्ति पाता है। इसमें सुदामा पाँड़े दि मैन हूँ सफ़र्सहैं जबकि धूमिल दि माइंड विच क्रिएट्सहैं। आप चाहें तो इन पर द्वा सुपर्णाको भी लागू कर सकते हैं।


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