Monday, 5 September 2016

'फेमिना हिन्दी' में वाणी प्रकाशन की किताबें


'फेमिना हिन्दी' में वाणी प्रकाशन की किताबें 

समाज व मानव जीवन के अंधेरे-उजले पक्षो की दास्तां
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Pankaj Chaturvedi का कविता-संग्रह "रक्तचाप और अन्य कविताएं" हर तरह के छद्म को खंडित करता हुआ चलता है और मानव जीवन के ऐसे पहलुओं को पाठक के सामने रखता है जिनसे रू-ब-रू होकर वे जीवन की सहजता और विसंगतियाँ को एक साथ समझ सकते हैं। यह संग्रह केवल पीड़ा ही नहीं, बल्कि प्यार की सघनता को भी अभिव्यक्त करता है।
इस किताब पर पढिए उत्पल बैनर्जी की समीक्षा जो 'फेमिना हिन्दी' के विशेष संस्करण में प्रकाशित हुई है। इस विशेष संस्करण में 2015-16 की श्रेष्ठ किताबों के तहत 'रक्तचाप और अन्य कविताएँ' को पहले नंबर पर रखा गया है।

 इस्लाम का" हलाला" 
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भगवानदास मोरवाल की किताब 'हलाला' में इस्लाम के नियमों का एक पुनरावलोकन किया गया है, हलाला जैसे नियमों का प्रत्याख्यान किया गया है और स्त्री के संघर्ष का एक हैरतनाक चित्र खींचा गया है। और इन सबकी पृष्ठभूमि में मेवात की एक कहानी है जिसे लेखक अपने निराले अंदाज में कहता चला जाता है। इस उपन्यास की संरचना मोहित करती है और इसकी भाषा शैली इसे पढने के लिए विवश कर देती है।



समाज में बिखरे स्त्री विमर्श के प्रश्नों की विवेचना
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Mamta Kalia की किताब "भविष्य का स्त्री विमर्श" मे स्त्रियों की अस्मिता पर उठते सावालों का कटाक्ष पूर्ण जवाब, स्त्रियों को सलाह कि वे अपने दर्द को बेचकर खुद को कमजोर साबित न करे,लेखिका का उनसे आग्रह है की अपनी पीड़ा को पेशा न बनाए, किताब की शैली पाठकों को आकर्षित करने का माद्दा रखती हैं।


पुलिस के आतंक,भय, निराशा, प्रेम और कुंठा की रोचक कहानी
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Salman Rushdie की किताब 'जोसेफ एण्टन' में भूमिगत रहने की मजबूरी, पुलिस द्वारा सताये लोगो की दास्तां, संत्रास, भय, प्रेम-कथा और एक कठिन वक़्त मे जीने की त्रासदी की कहानी--सब कुछ एक साथ पढ़ने को मिलेगा। इस किताब के कथानक की बहुस्तरीय बुनावट लेखक के जीवन की पारिस्थितियों की जानकारी तो देता ही है, पढ़ने का एक रोमांच भी पैदा करता है।

 Femina Hindi औरमुख्य कॉपी संपादक Amrendra Yadav जी का शुक्रिया! 


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