Saturday, 15 October 2016

ग़ज़लों का कारवाँ ।। नज़्मों का गुलिस्ताँ




।। ग़ज़लों का कारवाँ ।। नज़्मों का गुलिस्ताँ ।।

'दास्ताँ-कहते कहते' शृंखला की चार किताबें अब जल्द ही आपके हाथों में...



'मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ' -जॉन एलिया

'देर कर देता हूँ मैं' - मुनीर नियाज़ी

'ख़्वाबों की हँसी' - हरिओम

'इतवार छोटा पड़ गया' - प्रताप सोमवंशी 



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