Monday, 12 September 2016

'हलाला' : मेवाती लोकगन्ध में लिपटा किस्सा


'हलाला' : मेवाती लोकगन्ध में लिपटा किस्सा


'इंडिया टुडे' के ताज़ा अंक में पढ़ें भगवानदास मोरवाल के उपन्यास 'हलाला' की समीक्षा 'मेवाती लोकगन्ध में लिपटा किस्सा'।
मुस्लिम समुदायों में धर्म की आड़ में होने वाले स्त्री के मानसिक और दैहिक शोषण को केन्द्र में रखकर लिखी गयी और ‘फेमिना हिन्दी' द्वारा चयनित साल 2015-16 की सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में शामिल इस पुस्तक में लेखक ‘हलाला’ जैसे विधान की चिंता में डूबे स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की व्यवस्था पर मंडराने वाले व्यावहारिक और वास्तविक संकट को पेश करता है।

'मेवाती लोकगन्ध में लिपटा किस्सा' शीर्षक यह समीक्षा लिखी है जीवन सिंह ने।
 धन्यवादJeevan Singh, धन्यवाद India Today Hindi !

'हलाला' पुस्तक के लिए इस लिंक पर जाएँ : 
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