Friday, 19 August 2016

हज़ारीप्रसाद द्विवेदी : साहित्य में संस्कृति और इतिहास-बोध के सर्जक



 हज़ारीप्रसाद द्विवेदी : साहित्य में संस्कृति और इतिहास-बोध के सर्जक 



हज़ारीप्रसाद द्विवेदी को मानवतावादी रचनाकारों की उस दुर्लभ परम्परा में याद किया जा सकता है जिन्होंने पंडितया आचार्यशब्द को सचमुच अपने कृतित्व और आचरण में चरितार्थ किया था। उनके साहित्य में लोक और शास्त्र का समन्वय मिलता है और व्यक्तित्व में सहज भाव और ज्ञान का।

हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का परिप्रेक्ष्य अखिल भारतीय है और दृष्टि लोकोन्मुखी। अपने रचनात्मक अवदान के कारण उन्होंने हिंदी साहित्य को भारतीय मनीषा की श्रेष्ठता का पर्याय बना दिया है। उनका साहित्य पाठकों और रचनाकारों की कई पीढ़ियों के लिए एक अजस्र प्रेरणा-स्रोत की तरह है।

द्विवेदी जी इतिहास को तीसरी आँख मानते हैं। एक विरल सांस्कृतिक चेतना और गहरे इतिहास-बोध से संवलित होने के कारण उनका रचना संसार आज भी नए सिरे से सांस्कृतिक अध्ययन और मूल्यांकन की माँग करता है।

समस्त वाणी प्रकाशन परिवार की ओर से द्विवेदी जी के जन्मदिन के अवसर पर कृतज्ञ स्मरण !

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