Monday, 12 December 2016

Book Launch - Voter Mata Ki Jai ! by Pratishtha Singh


ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर में वोटर माता की जय !
क बेहद खुशनुमा शाम और श्रोताओं से खचाखच भरे हॉल में Pratishtha Singh की
 किताब के विमोचन और परिचर्चा की कुछ तस्वीरें:









मैं जब-जब बिहार गयी, वहाँ के लोगों से मिलती रही 
और महिलाओं से दिल खोलकर बातें की। 
उन सबको लिखती रही, नैरेटिव विकसित होता गया 
और अन्ततः इस किताब की शक्ल में सामने आया।"--@Pratishtha Singh

 कार्यक्रम की रिपोर्ट लाइव हिन्दुस्तान न्यूज़ ने जारी की है  

सोमवार, दिनांक : 12 दिसम्बर 2016 
पृष्ठ संख्या : 5 
साभार : LiveHindustan.com

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 वोटर माता की जय !

आई.एस.बी.एन: 978-93-5072 -846-8
आई.एस.बी.एन: 978-93-5072-847-5 
 विषय:  समाजविज्ञान
 संस्करण:  प्रथम 
वर्ष: 2016
 मूल्य: 425/-  हार्ड कवर पेपर बॅक - 195/-
 पृष्ठ संख्या: 172  


 पुस्तक अंश  

वोटर माता की जय' बिहार की महिला समाज की ऐसी कथा है जिसमें पूरे बिहार की पृष्ठभूमि की झलक नजर आती है। पुस्तक की भाषा में बिहारी लहजा इसकी रोचकता और पठनीयता को एक नई पहचान देता है यह किताब बिहार की राजनीति में महिलाओं की भूमिका को दर्शाता एक ऐसा प्रयास है जिसमें बिहार की महिलाओं की जागरूकता का प्रमाण मिलता है। किताब यह संदेश देती है की बिहार के वोटर खासकर महिला वोटरों की आवाज को कोई नहीं दबा सकता। वोटर माता की जय बिहार के चुनावी संघर्ष की कहानी है।

वोटर माता की जयकी लेखिका प्रतिष्ठा सिंह ने इटैलियन भाषा में शोध कियाऔर दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ती हैं। 

पुस्तक खरीदने हेतु इस लिंक पर क्लिक करें-



वाणी प्रकाशन समाचार ( वर्ष :10, अंक : 115, दिसम्बर 2016)

प्रिय पाठकों,

प्रस्तुत है वाणी प्रकाशन समाचार 

वर्ष :10, अंक : 115, दिसम्बर 2016

























Friday, 9 December 2016

पुस्तक परिचर्चा : वोटर माता की जय !


नमस्कार!
वाणी प्रकाशन से प्रकाशित 
प्रतिष्ठा सिंह  
की नयी कृति 
 वोटर माता की जय ! 
का लोकार्पण और परिचर्चा 

मुख्य वक्ता 
अभय कुमार दुबे 
वरिष्ठ समाजशास्त्री 

मोहम्मद अजहरुद्दीन 
भूतपूर्व क्रिकेटर 

संचालन 
अदिति माहेश्वरी-गोयल 

शनिवार, 10 दिसम्बर 2016, सायं 6:00 बजे


 आप सादर आमंत्रित हैं

विनीत 
 वाणी प्रकाशन व ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर 
धन्यवाद

Saturday, 26 November 2016

शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे मुनव्वर राना जी को वाणी प्रकाशन की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!



शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे

मुनव्वर राना जी 

को वाणी प्रकाशन की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 



"जागते रहना ही अब अपना मुक़द्दर है..." 

अलग मज़हब के थे लेकिन दुखों में साथ रहते थे 
हम ऐसी दोस्ती का रंग कच्चा छोड़ आए हैं...

गले मिलती थीं आपस में जहाँ पर मुख्तलिफ़ क़ौमें
वहाँ का किसलिए हम आबो-दाना छोड़ आए हैं...

हमें इस ज़िन्दगी पर इसलिए भी शर्म आती है 
कि हम मरते हुए लोगों को तन्हा छोड़ आए हैं...

हमेशा जागते रहना ही अब अपना मुक़द्दर है

हम अपने घर में सब लोगों को सोता छोड़ आए हैं...