Tuesday, 7 July 2015

TODOON DILLI KE KANGOORE/ तोडूँ दिल्ली के कंगूरे



                                       
Book : Todoon Dilli Ke Kangoore

Author : Baldev Singh

Translator : Dr.Jasvinder Kaur Bindra

Publisher -Vani Prakashan



Total Pages : 344 
ISBN : 978-93-5072-940-3 (HB)
Price :495/- (HB)
Size (Inches) : 5.50"X8.50"
First Edition : 2015
Category  : Novel

पुस्तक के संदर्भ में -
कई सदियों तक दिल्ली में शासन करने वाले मुग़ल शासकों में सबसे अधिक प्रसिद्ध, चर्चित और लोकप्रिय रहे अकबर महान की महानता में भी कई ऐसे सूराख़ रहे, जिनसे मालूम होता है कि शासन-सत्ता सँभालने वाला सबसे पहले बादशाह होता है, अन्य रिश्ते-नाते सब बाद में आते हैं। बादशाहत को बनाये रखने में अनेकानेक ऐसे कूटनीतिक दाँव-पेंच षड्यन्त्र रखे जाते हैं, जिन्हें अक्सर इतिहास में सामने नहीं लाया जाता। मुग़ल शासक अकबर का शासनकाल भी इससे अछूता नहीं।
दुल्ला भट्टी बार इलाके का निवासी इतना जांबाज़ था कि उसने सरेआम अकबर के कारिन्दों को लगान वसूलने पर फटकार भेज दिया। उसका मानना था, धरती उनकी, परिश्रम उनका, तो लहलहाती फ़सल पर हक बादशाह का कैसे...? मुगल सल्तनत के दौर में दुल्ला भट्टी एक ऐसे नायक के रूप में सामने आया, जिसने अपनी हिम्मत, दिलेरी तथा जांबाज़ तबीयत से मुग़ल सेना के छक्के छुड़ा दिये। अवाम की हिफाजत के लिए उसके हित को सर्वोपरि रख, जान हथेली पर रख कर लड़ने वालादुल्ला लोकनायक के रूप में उभरा ऐसा सितारा है, जिसने अपने मुट्ठी भर साथियों के साथ मुगल सेना का मुक़ाबला कर उनमें भगदड़ मचायी और दूसरी ओर धोखे से कैद कर, फाँसी के तख्ते पर सरेआम लटकाये जाने से वह सदा के लिए अविभाजित पंजाब तथा राजस्थान के बार इलाके में अमर हो गया। लोगों में उसकी वीरता के किस्से मशहूर हुए और आज भी पश्चिमी पंजाब तथा उत्तर पंजाब में उसकीवारें गायी जाती हैं। ऐसे लोकनायक दुल्ला भट्टी के जीवन तथा जांबाज़ी पर आधारित उपन्यास की रचना बलदेव सिंह ने की है। इस उपन्यास पर उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
छोटे-छोटे वाक्यों द्वारा इस वीर नायक की गाथा को इस प्रकार घटनाओं में पिरोया गया है कि अन्त तक रोचकता बनी रहती है। लध्धी के रूप में दुल्ले की माँ पंजाबी स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है, जो आज भी प्रासंगिक है। इस उपन्यास में पंजाबी रहन-सहन तथा जीवन-शैली को देखा जा सकता है जो पंजाबियों की विशेषता रही है।
लोकनायक वही कहलाते हैं
जो लोगों के दिलों में समा जाते हैं।

लेखक के संदर्भ में -

बलदेव सिंह
पंजाबी के विशिष्ट विभिन्न विधाओं में लिखने वाले साहित्यकार। लगभग पचास पुस्तकों के रचयिता, जिनमें 13 उपन्यास, 10 कहानी संग्रह, गद्य की 3 पुस्तकें, 9 नाटक, 3 यात्रा वृत्तान्त, 5 पुस्तकें बाल साहित्य के साथ, साहित्यिक आत्मकथा-2 पुस्तकें तथा नेशनल बुक ट्रस्ट साहित्य अकादेमी से तीन पुस्तकों का अनुवाद भी शामिल हैं।
अन्नदाताउपन्यास भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा हिन्दी में तथा अंग्रेजी में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से प्रकाशित। लम्बे अर्से तकसड़कनामा  लालबत्ती उपन्यास गद्य पुस्तकों के कारण चर्चित रहे।
मैक्सिम गोर्की अवार्ड, दिल्ली अकादमी, बलराज साहनी पुरस्कार, नानक सिंह अवार्ड, कर्त्तार सिंह धालीवाल तथा अनेक महत्त्वपूर्ण पुरस्कारों सहिततोड़ो दिल्ली के कंगूरे (2011) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।