Monday, 3 August 2015

SAMVIDHAN KI PADTAL / संविधान की पड़ताल


                                       
Book : SAMVIDHAN KI PADTAL

Author : KANAK TIWARI


Publisher -Vani Prakashan


Total Pages : 412
ISBN : 978-93-5229-072-7 (HB)
Price :595/- (HB)
Size (Inches) : 5.50"X8.50"
First Edition : 2015
Category  : Sociology


पुस्तक के संदर्भ में -

भारत का संविधान मुझे छात्र जीवन से चैन से जीने नहीं देता। वह फलसफा है। करोड़ों भारतीयों का रुदन है। युवाओं की आँखों का स्वप्न है। उसमें अतीत के शिखर पुरुष हर वक्त अपनी कालजयी वाणी में कौंधते हैं। यह किताब हमारे जीवन का पथ, पथ प्रदर्शक और पाथेय सभी कुछ है। मैं इसकी डगर पर कहीं कहीं पहुँचने के लिए चलता रहता हूँ। इस बाइस्कोप से जीवन को समझने के लिए मुझे न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती, न्यायमूर्ति जी. एल. ओझा, न्यायमूर्ति रमेश चन्द्र लाहोटी, न्यायमूर्ति देवदत्त माधव धर्माधिकारी, न्यायमूर्ति एस.बी. सिन्हा, न्यायमूर्ति अनंग कुमार पटनायक और अब न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा से समय-समय पर प्रेरणा मिली है। बुद्धिजीवी मित्रा स्व. दिलीप चित्रो, अभय कुमार दुबे, आदित्य निगम, उदयप्रकाश, पुरुषोत्तम अग्रवाल, रविभूषण, धु्रुव शुक्ल और स्व. शंकरगुहा नियोगी भी मेरी समझ को उलटते-पलटते रहे हैं। पुस्तक के भूमिकाकार और लेखक दोनों की अविचल समझ में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश तथा शलाका पुरुष स्वर्गीय हंसराज खन्ना की स्मृति ही हकदार है कि इस पुस्तक का सारा श्रम उनकी याद में न्यौछावर कर दिया जाए। आम आदमी के अधिकारों और सपनों के लिए संविधान की ताकत सहेजे उनसे बड़ी लड़ाई अब तक तो किसी ने नहीं लड़ी है।



लेखक के संदर्भ में - 
                                                          कनक तिवारी
गाँधी, विवेकानन्द, राममनोहर लोहिया और भगतसिंह से प्रभावित वरिष्ठ अधिवक्ता और लेखक कनक तिवारी गम्भीर और देशभक्त विचारक हैं। 26 जुलाई 1940 को जन्मे कनक तिवारी ने अंगरेज़ी साहित्य के प्राध्यापक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की। 8-9 वर्षों तक विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ाने के बाद प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स, नवभारत, नागपुर टाइम्स आदि कई पत्रों के संवाददाता के रूप में पत्राकारिता के क्षेत्रा में कदम रखा। 1971 में रविशंकर विश्वविद्यालय से एल. एल. बी. की परीक्षा में स्वर्ण पदक लेकर वकालत का व्यवसाय चुना। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ बार एसोसिएशन, इंडियन लॉ इन्स्टीट्यूट और इ।टरनेशनल काउन्सिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स के सक्रिय सदस्य हैं।
कनक तिवारी मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री, छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्यकारी अध्यक्ष, मध्यप्रदेश लघु उधोग निगम तथा मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। मध्यप्रदेश में महात्मा गाँधी एक सौ पच्चीसवाँ जन्म वर्ष समारोह समिति के राज्य समन्वयक के रूप में उन्होंने केवल पचास महीनों में राष्ट्रीय स्तर के विचारकों के सौ सम्मेलन किए तथा कुल मिलाकर लगभग नब्बे पुस्तक- पुस्तिकाओं का सम्पादन-प्रकाशन किया। कनक तिवारी को छात्र-जीवन में सर्वश्रेष्ठ वक्तृत्व के लिए राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया है। उन्हें गजानन माधव मुक्तिबोध, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र, नरेश मेहता और विनोद कुमार शुक्ल जैसे महत्त्वपूर्ण लेखकों के आत्मीय होने का अवसर मिला है। देश की महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में पिछले 50 वर्षों से कनक तिवारी लिखने के अतिरिक्त मानसेवी प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।
प्रकाशित पुस्तकें: संविधान का सच, काल इनमें ठहर गया है, फिर से हिन्द स्वराज, बस्तर-लाल क्रान्ति बनाम ग्रीन हंट, हिन्द स्वराज का सच, विवेकानन्द का जनधर्म, गाँधी और पंचायती राज, छत्तीसगढ़ के विवेकानन्द तथा गाँधी का देश।


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http://www.vaniprakashan.in/details.php?prod_id=7261&title=KITNE%20KATHGHARE