Saturday, 30 August 2014

वाणी न्यास प्रथम फेलोशिप की घोषणा / First Vani Foundation Fellow Announced



 ​वाणी न्यास बाल साहित्य फेलोशिप 
 चित्रकला फेलोशिप विजेता लावण्या कार्तिक 

वाणी न्यास द्वारा आयोजित 'बाल साहित्य ​फे​लोशिप' ​के अंतर्गत वाणी न्यास व ‘बाल साहित्य शोधवृत्ति’ के निर्णायक मंडल (प्रख्यात शायर श्री गुलज़ार साहिब व प्रसिद्ध बाल साहित्यकार सुश्री पारो आनंद) ने सुश्री लावण्या कार्तिक को  'वाणी न्यास बाल साहित्य फेलोशिप' प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। ​​इस फेलोशिप​ में हमारे सहयोगी संगठन  जर्मन बुक ऑफिस व तक्षिला एजुकेशन सोसाइटी ​​​हैं। लावण्या कार्तिक के सन्दर्भ में निम्नलिखित है।  

लावण्या कार्तिक मुम्बई में स्थित बाल साहित्य की लेखिका और चित्रकार हैं। बाल साहित्य के अन्य लेखन के अतिरिक्त विज्ञान से प्रेरित कथा साहित्य भी लिखती हैं। लावण्या कार्तिक की ‘क्या देखती है अनु?’ बाल पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है, जो कि ग्यारह भाषाओं में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त एक चित्र ‘एन्डेंज़र्ड एनिमल्स ऑफ इंडिया’ किताब से मई 2014 में सिंगापुर में आयोजित एशियन फेस्टिवल ऑफ चिल्ड्रंस कॉन्टेंट में प्रदर्शित हुआ है। 

लावण्या कार्तिक की बचपन से ही किताबों में रूचि रही है। मारियो मिरांडा, आर. के. लक्ष्मण तथा प्राण जैसे कलाकारों के कार्टून्स को देखकर लावण्या कार्तिक की चित्रांकन में रूचि बढ़ी। इनके अलावा पुलक बिस्वास, अतनु रॉय, बद्री नारायण, मंजुला पद्मनाभन और बिंदिया थापर जैसी अभिव्यक्तियों से भी लावण्या बहुत प्रेरित रही हैं। साथ ही क्रिस रिडैल, पोसी सिमंड्स, रेयमंड्स ब्रिग्स और एलिसन बखडेल जैसे लेखक व चित्रकार उनको प्रेरित करते रहे हैं।

लावण्या की कला पर उनकी बेटी का गहरा प्रभाव है। उनका मानना है कि एक बच्चे को बड़ा करना हमें फिर एक बार बच्चा बनने का मौका देता है। कथाकार होने के नाते उन्हें भारतीय होने पर गर्व है। लावण्या का मानना है कि हमारी जड़े ही हमारी कला को आगे बढ़ाती हैं। 

सुश्री लावण्या हस्तकलामें सिद्धहस्त हैं। अपने चित्रों में नयी नयी तकनीक और रंगों का इस्तेमाल करना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। लावण्या के अनुसार भारत में बाल साहित्य का प्रकाशन एक रोमांचक और महत्त्वपूर्ण मोड़ पर है। 

वाणी न्यास की पहली चित्रकला फेलो को बधाई।