Monday, 14 July 2014

ढलान से उतरते हुए



Book - DHALAN SE UTARTE HUE
Author - MUNAWWAR RANA
Publisher - VANI PRAKASHAN

Total Pages : 175
ISBN :978-93-5072-550-4(HB)
ISBN : 978-93-5072-551-1(PB)
Price :  Rs. 300/- (HB)/  Rs. 175/- (PB)
Size (Inches) : 5.50x8.50
First Edition : 2013
Category  : Memoirs

पुस्तक के संदर्भ में - 

मुनव्वर राना की ज़िंदगी ने देखते ही देखते उम्र के साठवें ज़ीने पर पाँव रख दिये लेकिन उनकी इल्मी लियाक़त और अदबी सूझ-बूझ रायबरेली के शोएब विद्यालय के दर्जा पाँच के क्लास में बिछी टाट पट्टी पर ही बैठी रह गयी, उन्होंने ऐसा कुछ नहीं लिखा जिस पर उन्हें बेजा फ़ख्र हो, लेकिन हाँ! उन्होंने ऐसा भी कुछ नहीं किया कि उन्हें अपने किये पर शर्मिन्दगी महसूस हो। अदब तख़लीक़ करने का दावा उन्होंने कभी नहीं किया, क्योंकि उनकी कम इल्मी ने उनमें ऐसी किसी बीमारी को पनपने नहीं दिया जिसे गुरूर कहा जाता हो, उन्हें शेर कहने से ज़्यादा नस्र निगारी का शौक था, लेकिन वह इस खुद एतमादी से महरूम थे जिसे उर्फ़े आम में एहसासे बरतरी कहा जाता है।... लिहाज़ा इन संस्मरणात्मक लेखों के ज़रिये मुनव्वर राना अपने क़द्रदानों का शुक्रिया अदा करना अपना फ़र्ज़ समझते हैं।


लेखक के संदर्भ में - 

मुनव्वर राना का जन्म 26 नवम्बर, 1952 को रायबरेलीउत्तर प्रदेश में हुआ था। सैयद मुनव्वर अली राना यूँ तो बी. कॉम. तक ही पढ़ पाये किन्तु ज़िन्दगी के हालात ने उन्हें ज्यादा पढ़ाया भी उन्होंने खूब पढ़ा भी। माँग़ज़ल गाँवपीपल छाँवमोर पाँवसब उसके लिएबदन सरायघर अकेला हो गयामुहाजिरनामासुखन सरायशहदाबा,सफ़ेद जंगली कबूतरफुन्नक तालबग़ैर नक़्शे का मकानढलान से उतरते हुए और मुनव्वर राना की सौ ग़ज़लें हिन्दी व उर्दू में प्रकाशित हुईं। कई किताबों का बांग्ला व अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुआ।