Tuesday, 5 March 2013

विधाओं का विन्यास




Book :  VIDHAON KA VINYAS
Author :  ANANT VIJAY
Publisher : Vani Prakashan
Total Pages : 184
ISBN : 978-93-5072-461-3(HB)
Price :  `375(HB)
Size (Inches) : 5.75x8.75
First Edition : 2013
Category  : Criticism


पुस्तक के सन्दर्भ में...
अनंत विजय के नाम से हिन्दी के सुधी पाठक अवश्य परिचित होंगे। पैतृक संस्कार के कारण पहले वे साहित्य की दुनिया में आये और फिर बाद में पत्रकारिता की ओर मुड़े लेकिन अब भी साहित्य उनसे छूटा नहीं है। आजकल वे एक बड़े प्रतिष्ठित चैनल IBN7 से जुड़े हैं। लेकिन एक अच्छी बात यह है कि अब भी वो साहित्यिक सवालों और विवादों में हस्तक्षेप करते हैं। हिन्दी की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका हंस और नया ज्ञानोदय में वो लिखते रहते हैं। यह यूँ ही नहीं है कि हंस के सम्पादक राजेन्द्र यादव अपने सम्पादकीय में अनंत विजय का उल्लेख देशी-विदेशी अंग्रेजी लेखकों की अद्यतन पुस्तकों को पढ़नेवाले के तौर पर याद करते हैं। अनंत विजय में आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास और इतिहास की अच्छी समझ है। बड़ी बात यह है कि हिन्दी पाठकों के सामने अंग्रेजी लेखकों के माध्यम से एक बड़ी दुनिया के यथार्थ से हमारा परिचय करा रहे हैं। साहित्यिक संस्कार के कारण वे बड़े से बड़े अंग्रेजी लेखकों से कभी आतंकित नहीं होते और उनकी भूल-गलतियों पर बेहिचक उँगुली रखते हैं। और सही जगह पर। उनके लेखन की यह विशेषता है कि वो जटिल और दुर्बोध अंग्रेजी लेखक की रचना को भी अपार धैर्य और साहस के साथ पढ़कर हिंदी पाठकों के लिए पठनीय ही नहीं बनाते हैं, बल्कि उसमें समीक्षित पुस्तक के प्रति उत्सुकता भी जगाते हैं। प्रस्तुत पुस्तक में संकलित अंग्रेजी पुस्तकों- विशेषतः आत्मकथा और जीवनी पर केन्द्रित पुस्तकों की समीक्षाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि लेखन के प्रति उनकी अगाध निष्ठा है और जो कुछ अच्छा वो अनायास पढ़ते हैं, उसे पाठकों से शेयर करते हैं। उनके लेख से पाठकों के सामने एक नयी दुनिया खुलती है जो बेहद आह्लादक है। 

पुस्तक के अनुक्रम...
आत्मकथा/जीवनी
सितारों की जिन्दगी के बहाने 
संघर्ष कथा में सेक्स का तड़का 
इन्दिरा की राजनीतिक जीवनी 
सोनिया गाँधी: कुछ कही, कुछ अनकही
सोनिया-जीवनी पर बवाल
घटनाओं का कोलाज
महात्मा का इश्क
मित्र से उठता विवाद
राजनीति के टर्निंग प्वाइंट्स
लोग ही चुनेंगे रंग
राजनीति का स्याह चेहरा
मित्र की आँखों देखी
आधुनिक भारत के निर्माता
व्यक्तित्वों के रंग
अमेरिका का रंगीला राष्ट्रपति
राजनीतिक बदमाशियों की ‘जर्नी’
शून्य से शिखर का सफर
फिडेल का फरेब? 
आतंक के आका की जीवनी
जांबाज की जीवनी
व्यभिचार का विमर्श
सम्पादक की कथा
आत्मकथा से दरकती छवि
सम्पादक के पूर्वग्रह
फतवा के दर्द की दास्तां
उपन्यास/फिक्शन
फिफ्टी शेड्स ऑफ फैंटेसी
सब कुछ, मगर वो नहीं...
घटनाओं का बेस्वाद कॉकटेल
कुंठा और महत्वाकांक्षा का उत्स
रिश्ते की नयी इबारत
सपनों और आकांक्षाओं का टकराव
सफलता तलाशता विवाद 
लगभग सिंगल
विचार/इतिहास/नॉन फिक्शन
महान लेखक का बुढभस
धर्म, सेक्स और महिलाएँ
न्याय की मान्यताओं को चुनौती 
किताब से धुलेगा कलंक?
महाभारत के चरित्रों का पुनःपाठ 
परम्पराओं की पड़ताल
आन्दोलन को जानने के लिए जरूरी किताब 
महाजन का कर्जा
आतंक के अंत का थ्रिलर
किताब से बेनकाब पाकिस्तान
सन्दर्भ-ग्रन्थ 

अनंत विजय
अनंत विजय का जन्म 19, नवम्बर 1969 में हुआ। स्कूली शिक्षा जमालपुर (बिहार) में हुई। भागलपुर विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स (इतिहास), दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट, बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट।
प्रकाशित कृति: प्रसंगवश, कोलाहल कलह में, मेरे पात्र।
सम्पादन: समयमान।
स्तम्भ लेखन: नया ज्ञानोदय, पुस्तक वार्ता, चौथी दुनिया।

पानी भीतर फूल



Book :  PANI BHEETAR PHOOL
Author :  EKANT SHRIVASTAVA
Publisher : Vani Prakashan
Total Pages : 180
ISBN : 978-93-5072-409-5(HB)
Price :  `300(HB)
Size (Inches) : 5.75x8.75
First Edition : 2013
Category  : Novel

पुस्तक के सन्दर्भ में प्रख्यात कवयित्री अनामिका के विचार...
भाव का अभाव से नाता उतना ही गहरा होता है जितना ग्रामीण शिक्षक, निताई-गुरुजी का अपनी भाविनी सखा से। जिस तर्क पर टी.एस. एलियट ने कविता को नाटकीय बाना दिया था और काव्य-नाटक लिखे थे, प्रायः उसी तर्क पर एकान्त ने कविता के कलेवर में ‘पानी भीतर फूल’ लिखा है। निताई-श्यामली का पर्यावरण-सजग प्रगाढ़ दाम्पत्य (जुगनुओं की तरह के जो) आत्मदीप्त क्षण पकड़ने की कोशिश करता है, अवचेतन के पानियों में एक सतरंगी स्वप्न, एक सतरंगी फूल पकड़ने-जैसी कोशिश है। 
‘टूट टाट घर टपकत खटियो टूट’ की स्थिति हो, ‘झोपरिया में आग’ लगने की स्थिति या भूख-अपमान-असमंजस की स्थिति-आन्ना केरिनिना के लेविन-जैसा निश्छल-सरल जीवन जिया तो जा ही सकता है, एक बछुरिया के जन्म की खुशी भी उतनी ही उत्फुल्ल कर सकती है कि लगे, जहान जीत लिया! आस-पास का साग-पात टूँगकर, अगल-बगल के पशु-पक्षियों, फूल-फलों-पानियों से भी जीवन स्निग्ध और तरल किया जा सकता है। एक ग्रामीण दम्पती की सीधी-सादी दिनचर्या, उनके रोजमर्रे की जिन्दगी का छन्द उसी तन्मयता से पकड़ा जा सकता है कि वह परीकथा दीखने लगे-यह काव्यभाषा के जादू से, उसके मांसल विनियोग से ही सम्भव है जिसके लिए कवि एकान्त श्रीवास्तव जाने-माने जाते हैं। 
छत्तीसगढ़ का यह हरा-भरा गाँव ‘हिन्द स्वराज’ के सपनों का गाँव है जहाँ आपसदारी सजग-सहज संवादों में, दोस्ताना पंचायतों में, सूफियाना मनोछन्द में अभी बची हुई है! यह दूसरी तरह का ‘आधा गाँव’ है, या कहिए ‘आधा बनारस’-‘आधा जल में, आधा दूब में,’ ‘आधा है, आधा नहीं है,’ और इस अधूरेपन में भी एक तरह की सम्पूर्णता, जैसे भगोली और मंगलू, रामबाई, चण्डहीन आदि के जीवन में  और एक सूफी एहसास-भवानी प्रसाद मिश्र वाला और अनुपम मिश्र वाला भी कि कहीं कोई वियुक्त नहीं है-पशु-पक्षी-पेड़ सब छोटे-बड़े मनुष्य एक बड़े सूत्र में बँधे हैं और फिर भी अपने-आप में पूर्ण-जैसे इस उपन्यास की सारी कथाएँ-लहरियाँ-
”आकाश का विस्तार आमन्त्रण है!/बाधा नहीं है!/कोई भी बड़ा-छोटा पंछी/आधा नहीं है।“
कोई इसे एक अन्तरंग यूटोपिया भी कह सकता है, और छत्तीसगढ़ की पृष्ठभूमि इसे एक राजनीतिक पाठ भी बनाती है। निताई जो फूल अपनी पत्नी के जूड़े में खोंसना चाहता है, लोकसंवेदना के गहरे पानियों में उसकी जड़ें  हैं,  मौत से गले मिलने की सारी चुनौतियाँ हैं वहाँ, प्रेम और मृत्यु, संयोग और वियोग के तारों पर लोकजीवन का ध्रुपद बज रहा है! विनोद कुमार शुक्ल की तरह की मद्धिम लय पूरे उपन्यास पर तारी है जो शायद एकान्त-चिन्तन की अपनी स्वाभाविक लय होती है!  

एकान्त श्रीवास्तव
शरद बिल्लौरे, रामविलास शर्मा, ठाकुर प्रसाद, दुष्यन्त कुमार, केदार, नरेन्द्र देव वर्मा, सूत्र, हेमन्त स्मृति, जगत ज्योति स्मृति, वर्तमान साहित्य-मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार आदि से सम्मानित एकान्त श्रीवास्तव का जन्म 8 फरवरी, 1964, कस्बा छुरा जिला रायपुर (छत्तीसगढ़) में हुआ। इन्होंने एम ए (हिन्दी), एम एड , पीएच डी की उपाधि प्राप्त की।
प्रकाशित कृतियाँ: अन्न हैं मेरे शब्द, मिट्टी से कहूँगा धन्यवाद, बीज से फूल तक (कविता-संग्रह); नागकेसर का देश यह (लम्बी कविता); मेरे दिन मेरे वर्ष (स्मृति कथा); कविता का आत्मपक्ष (निबन्ध); शेल्टर फ्रॉम दि रेन (अंग्रेजी में अनूदित कविताएँ); बढ़ई, कुम्हार और कवि (आलोचना)। अनुवाद: कविताएँ अंग्रेजी व कुछ भारतीय भाषाओं में अनूदित; लोर्का, नाज़िम हिकमत और कुछ दक्षिण अफ्रीकी कवियों की कविताओं का अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद।
सम्पादन: नवम्बर 2006 से दिसम्बर 2008 तक तथा जनवरी 2011 से पुनः वागर्थ का सम्पादन।

'प्रतिमान' समय समाज संस्कृति (अर्धवार्षिक पत्रिका)



प्रतिमान क्यों? -अभय कुमार दुबे
बारह साल पहले विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस) के भारतीय भाषा कार्यक्रम ने हिन्दी में व्यवस्थित अनुसंधानपरक चिन्तन और लेखन को बढ़ावा देने की कोशिशें शुरू की थीं। अब यह उद्यम अपने दूसरे चरण में पहुँच गया है। पहला दौर मुख्यतः अंग्रेज़ी में और यदा-कदा अन्य भारतीय भाषाओं में लिखी गयी बेहतरीन रचनाओं को अनुवाद और सम्पादन के जरिये हिन्दी में लाने का था। इसमें मिली अपेक्षाकृत सफलता के बाद अंग्रेज़ी से अनुवाद और सम्पादन पर जोर कायम रखते हुए भारतीय भाषाओं में भी समाज-चिन्तन करने की दिशा में बढ़ने की जरूरत महसूस हो रही थी। लेकिन इस पहलकदमी के साथ व्याहारिक और ज्ञानमीमांसक धरातल पर एक रचनात्मक मुठभेड़ की पूर्व-शर्त जुड़ी हुई थी। सीएसडीएस के स्वर्ण जयंती वर्ष में समाज-विज्ञान और मानविकी की अर्धवार्षिकी पूर्व-समीक्षित पत्रिका प्रतिमान समय समाज संस्कृति का प्रकाशन इस शर्त की आंशिक पूर्ति कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में अध्ययन पीठ में अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी में भी लेखन करने वाले विद्वानों की संख्या बढ़ी है। साथ ही भारतीय भाषा कार्यक्रम के इर्द-गिर्द कुछ युवा और सम्भावनापूर्ण अनुसंधानकर्त्ता भी जमा हुए हैं। प्रतिमान का मक़सद इस जमात की जरूरते पूरी करते हुए हिन्दी की विशाल मुफस्सिल दुनिया में फैले हुए अनगिनत शोधकत्ताओं तक पहुँचना है। समाज-चिन्तन की दुनिया में चलने वाली सैद्धान्तिक बहसों और समसामयिक राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श का केन्द्र बनने के अलावा यह मंच अन्य भारतीय भाषाओं की बौद्धिकता के साथ जुड़ने के हर मौके का लाभ उठाने की फ़िराक़ में भी रहेगा।


  
वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित विकासशील समाज अध्ययन पीठ (CSDS) की पत्रिका 'प्रतिमान' समय समाज संस्कृति 
समाज-विज्ञान और मानविकी की पूर्व-समीक्षित अर्धवार्षिक पत्रिका 

एक अंक -325 +25 रूपये डाक 
सदस्यता एक वर्ष : रूपये 500 ( दो अंक) डाक खर्च सहित 
दो वर्ष : 1000/रुपये (चार अंक डाक खर्च सहित)
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संस्थाओं के लिए प्रतिमानका वार्षिक शुल्क 1000/रुपये है। (दो अंक डाक खर्च सहित)
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वाणी प्रकाशन 21 -, दरियागंज, नयी दिल्ली-110001


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