Friday, 18 January 2013

'वाक्'-12






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'वाक्' नए विमर्शों का त्रैमासिक 


सम्पादक- सुधीश पचौरी 
प्रबंध संपादक -अरुण महेश्वरी 
संपादन सहयोग -उमा शंकर चौधरी

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वाक्'-12 के इस अंक में प्रस्तुत है ...

आलेख
उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श और पद्मावत’ -राजकुमार
द्वैधता का द्वंद्व बनाम उन्मुक्त दलित-विमर्श -नरेन्द्र कुमार आर्य
जाने हम दफ्न हों बोसीदा किताबों में कहां -सुषमा भटनागर
समकालीन हिंदी कविता: यानी 1960 के बाद की हिंदी कविता -देव शंकर नवीन

पत्र
अज्ञेय के पत्र शमशेर बहादुर सिंह, केदारनाथ अग्रवाल
और मुक्तिबोध के नाम
गजानन माधव मुक्तिबोध और फणीश्वरनाथ 
रेणु के पत्र अज्ञेय के नाम

पुनःपाठ
त्रिवेणी की तीसरी वेणी: तोड़ती पत्थर -श्रीराम त्रिपाठी
पंचलाइट के बहाने अंधेरों और वर्जनाओं से लड़ने की कोशिश -ज्योति चावला

आत्मकथा
बोलेंगे कि बोलता है-सूरजपाल चौहान

कहानी
सपने -चरण सिंह पथिक
देह भी बोलती है-दिनेश कर्नाटक 

कविताएं
पवन करण की कविताएं
निर्मला पुतुल की कविताएं
हरिओम की कविताएं

समीक्षा
अकूत कहिश: आदिवासियों की यातना कथा-परमानंद श्रीवास्तव
अस्मिता के लिए संघर्ष करती कहानियां -वंदना

विशेष सदस्यता अभियान पर पाठकों के लिए विशेष छूट।

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वाक्
नए विमर्शों का त्रैमासिक
मूल्य : एक अंक 75/-रुपये
व्यक्तिगत वार्षिक शुल्क : 400 रुपये ( चार अंक) डाक व्यय सहित 

ऑफर : 3 वर्ष की सदस्यता (12 अंक)
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वाक्' की तीन वर्षीय सदस्यता के लिए आपको देना होगा 1200 रुपये जिसपर आप प्राप्त कर सकते हैं अपनी मनपसन्द 800 रुपये की (सजिल्द) पुस्तकें बिल्कुल मुफ्त। 

ऑफर : 5 वर्ष की सदस्यता (20 अंक) 
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वर्ष की सदस्यता के लिए आपको देना होगा 2000 रुपये । जिसपर आप प्राप्त कर सकते हैं अपनी मनपसन्द 1200 रुपये की (सजिल्द) पुस्तकें बिल्कुल मुफ्त। 

ऑफर : आजीवन सदस्यता ( 48 अंक )
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वाक्' की आजीवन सदस्यता सिर्फ 4000 रुपये में प्राप्त करें। साथ ही दो वर्ष की सदस्यता उपहार स्वरुप यानि 12 वर्षों तक लगातार आप को 'वाक्' मिलती रहेगी।

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वाणी प्रकाशन 
21-
, दरियागंज, नयी दिल्ली -110002
फ़ोन नं- 011-23273167

नोट : यह ऑफर सीमित अवधि 31 मार्च 2013 तक वैध है।