Friday, 8 March 2013

सिर्फ़ कागज़ पर नहीं



Book :  SIRF KAGAZ PAR NAHIN
Author :  RANJANA JAISWAL
Publisher : Vani Prakashan
Total Pages : 176
ISBN : 978-93-5072-208-4(HB)
Price :  `295(HB)
Size (Inches) : 5.75x8.75
First Edition : 2012
Category  : Poetry/Feminism

पुस्तक के सन्दर्भ में...
समकालीन हिन्दी कविता में रंजना जायसवाल का नाम जाना-पहचाना है। इस पाँचवें संग्रह में वह युवा रचनाधर्मिता का प्रतिनिधि स्वर बन कर सामने आयी हैं। भाषा-संयम और परिष्कृत रचाव में स्त्री मन के संशय, दुख, पीड़ा और प्रेम की गहनतर अनुभूति के साथ ही समय और समाज की खुरदरी सच्चाइयों के गहरे निशान इन कविताओं में हैं। यह काव्य-लोक उस औसत हिन्दुस्तानी स्त्री का है जो निराला के शब्दों में ‘मार खा रोई नहीं’। दर्द से आक्रोश और फिर प्रतिकार की इस तकलीफदेह यात्रा के निशान इन कविताओं में जगह-जगह हैं। ये कविताएँ सवाल की कविताएँ हैं। ज़ाहिर है जिनके जवाब नहीं हैं। कविता के पास-पड़ोस में नाते-रिश्तेदार हैं, गाँव-कस्बा है, रीति-रिवाज हैं, इन सबके बीच जीवन के घात-प्रतिघात हैं, आकांक्षाएँ और यातनाएँ हैं। गरज कि धड़कता धधकता जीवन है। ये कविताएँ समय में गहरे धँस कर लिखी गयी हैं और साफगोई से अपना पक्ष रखती हैं, समाज की विडम्बना और विद्रूपता पर इनका स्वर तल्ख है।
इन कविताओं का रचाव सहज है और इनसे लोक गीतों जैसा प्रभाव पैदा होता है। रोजमर्रे के दृश्य कविता में आते ही गहरे संकेत करने लगते हैं। कवयित्री ने सायास प्रभाव पैदा करने की प्रवृत्ति से बचते हुए कविता की स्वाभाविकता की रक्षा की है जिससे अनुभूति की प्रामाणिकता स्थापित हुई है। 
एक स्त्री के स्वप्न, संसार और यातना से गुजरते हुए आप अपने को बदला हुआ पाते हैं। ये कविताएँ मनुष्यता और प्रकृति की रक्षा साथ-साथ करती हैं।

रंजना जायसवाल 
रंजना जायसवाल, एम.ए., पीएच.डी. (हिन्दी), जन्म-स्थान पड़रौना (उत्तर प्रदेश) वर्तमान में एक मिशनरी कॉलेज में शिक्षिका हैं । वैसे तो लेखन की शुरुआत बचपन में ही हो गयी थी, यदा-कदा छपती भी रहती थी, पर 1997 से ज्यादा सक्रिय हैं । अब तक इनकी निम्न पुस्तकें प्रकाशित हैं-मछलियाँ देखती हैं सपने, दुःख पतंग, जिन्दगी के कागज़ पर, माया नहीं मनुष्य, जब मैं स्त्री हूँ (काव्य संग्रह), तुम्हें कुछ कहना है भर्तृहरि (कहानी संग्रह), स्त्री और सेंसेक्स (लेख संग्रह)।