Friday, 6 December 2013

यह अफसोस की बात है

यह अफसोस की बात है कि भारतीय साहित्य के नाम पर दुनिया केवल भारत के अंग्रेजी साहित्य से परिचित है।







Monday, 11 November 2013

नये सृजन एवं प्रकाशन से ही मुझे सच्चे मायने में शांति मिलेगी।


बिज्जी लोक संस्कृति के अमर चारण हैं। बिज्जी का साहित्य लोक कथाओं, लोक सम्पदा की अनूठी बोली में करोड़ों पाठकों को अनुपम भेंट है। 











अब बस यादें ही शेष हैं... हमारे बिज्जी!

बिज्जी व अरुण माहेश्वरी, साथ में प्रिय मित्र उदय प्रकाश, जो कि कैमेरे के पीछे हैं.


वाणी प्रकाशन समाचार, नवम्बर 2013