Wednesday, 12 December 2012

विजय तेंडुलकर के नाटक

विजय तेंडुलकर के दो नाटक




Book :  Eak Ziddi Ladki
Author  Vijay Tendulkar
Translator : Padmaji Ghorpade  
Publisher : Vani Prakashan
Total Pages : 104
ISBN : 978-93-5000-182-0Price : `195(HB)
Size (Inches) : 4
X7
Category  : Play 



पुस्तक के सन्दर्भ में ...
विजय तेंडुलकर विडम्बना बोध के सबसे बडे़ नाटककार हैं। वे सामान्य जीवन की परिस्थितियों से अपनी थीम उठाते हैं और कॉमिक हास्य पैदा करते हुए एक विराट ट्रेजेडी की सृष्टि कर डालते हैं। ‘एक जिद्दी लड़की’ उनकी इस नाटकीय प्रतिभा की एक बहुत ही दिलचस्प अभिव्यक्ति है।
कथा में विस्तार से अधिक गहराई है। एक व्यक्ति लोगों को ठग कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है और परिवार के भीतर वैसा ही अनुशासन बनाये रखता है। बच्चों में विद्रोह की भावना पैदा होती है, लेकिन वे पिता की सत्ता से व्यंग्यात्मक सामंजस्य बनाये रखने के अलावा कुछ कर नहीं पाते। इसी पृष्ठभूमि में बडे़ लड़के का विवाह होता है और घर में दाखिल होती है एक जिद्दी लड़की, जो पहले ही दिन से सब कुछ बदल डालने के लिए कृतसंकल्प है। परिणामस्वरूप अनेक विडम्बनामूलक स्थितियों का जन्म होता है। हैरत की बात यह है कि छल-कपट की जिन्दगी जीनेवाला पिता भी अन्त में उसके साथ सहयोग करने के लिए तैयार हो जाता है। पूरा घर एक कुटीर उद्योग में बदल जाता है, लेकिन नतीजे में हाथ आती है सिफर से भी बड़ी निराशा। अच्छाई एक बार फिर हारती है और बुराई को फिर सिर उठाने का मौका मिल जाता है।





Book :  Massaz
Author  Vijay Tendulkar
Translator : Sushama Bakshi 
Publisher : Vani Prakashan
Total Pages : 96
ISBN : 978-93-5000-016-8Price : `150(HB)
Size (Inches) : 4
X7
Category  : Play

पुस्तक के सन्दर्भ में ...
विजय तेंडुलकर द्वारा रचित ‘मसाज’ एकल अभिनय के लिए अद्भुत सम्भावनाएँ प्रस्तुत करता है। इससे पहले भी तेंडुलकर के नाटकों में लम्बे-लम्बे एकालाप मिलते हैं, जो किसी भी चरित्रा का दर्शकों से सीधा संवाद स्थापित करते हैं। उदाहरण के लिए सखाराम बाइंडर नाटक में शुरू में ही सखाराम की लम्बी आत्म स्वीकृति, ‘खामोश अदालत जारी है’ के अन्त में बेरणारे के अन्तर्मन से निकली हुई गूँज-सा एक लम्बा संवाद और ‘पंछी ऐसे आते हैं’ में अरुण सरनाईक की शुरुआती भूमिका-मसाज से पहले के कम-से-कम ये तीन एकालाप नाटककार की उस विलक्षण प्रतिभा की पृष्ठभूमि तैयार कर देते हैं जिसका जीता-जागता प्रमाण है, अपने अन्तिम दिनों में रचा गया मसाज। मधु जोशी नाम के चरित्र की आत्मकथा के माध्यम से मानो मुम्बई जैसे महानगर की उस मायावी दुनिया की ऐसी सच्ची किन्तु वीभत्स तस्वीर सजीव हो उठती है जिसमें हम जैसे सभ्य-शालीन लोगों का शायद ही कभी साबका पड़ता हो। यह तस्वीर हमें उस दुनिया की बाहरी-भीतरी परतों को उघाड़कर रखने के साथ-साथ हमारी अपनी ऊपर से ओढ़ी हुई सभ्यता, नैतिकता और बौद्धिकता की भी धज्जियाँ उड़ाकर रख देती है।



शीघ्र प्रकाश्य
भीतरी दीवारें
विजय तेंडुलकर
ISBN: 978-93-5072-308-1  
मूल्य:`150 (सजिल्द)

कौओं की पाठशाला
विजय तेंडुलकर
ISBN: 978-93-5072-309-8 
मूल्य:`150 (सजिल्द)

फुटपाथ का सम्राट
विजय तेंडुलकर
ISBN: 978-93-5072-310-4
मूल्य:`75 (सजिल्द)

भल्या काका
विजय तेंडुलकर
ISBN: 978-93-5072-305-0 
मूल्य:`100 (सजिल्द)

मोम का घरौंदा
विजय तेंडुलकर
ISBN: 978-93-5072-307-4
मूल्य:`125 (सजिल्द)

सावधान! दूल्हे की तलाश है
विजय तेंडुलकर
ISBN: 978-93-5072-304-3  
मूल्य:`200 (सजिल्द)



लेखिक के सन्दर्भ में...
वर्तमान भारतीय रंग-परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण नाटककार के रूप में समादृत श्री तेण्डुलकर मूलतः मराठी के साहित्यकार हैं जिनका जन्म 7 जनवरी, 1928 को हुआ। उन्होंने लगभग तीस नाटकों तथा दो दर्जन एकांकियों की रचना की है, जिनमें से अनेक आधुनिक भारतीय रंगमच की क्लासिक कृतियों के रूप में  शुमार होते हैं। उनके नाटकों में प्रमुख हैं- शांतता! कोर्ट चालू आहे (1967), सखाराम बाइन्डर (1972), कमला (1981), कन्यादान (1983)। श्री तेण्डुलकर के नाटक घासीराम कोतवाल (1972) की मूल मराठी में और अनुदित रूप में देश और विदेश में छह हजार से ज्यादा प्रस्तुतियाँ हो चुकी हैं। मराठी लोकशैली, संगीत तथा आधुनिक रंगमंचीय तकनीक से सम्पन्न यह नाटक दुनिया के सर्वाधिक मंचित होने वाले नाटकों में से एक का दर्जा पा चुका है। महान नाटककार होने के साथ साथ श्री तेण्डुलकर ने ‘कादम्बरी-एक’ व ‘कादम्बरी-दो’ उपन्यास भी लिखे हैं।
श्री तेण्डुलकर ने बच्चों के लिए भी ग्यारह नाटकों की रचना की है। उनकी कहानियों के चार संग्रह और सामाजिक आलोचना व साहित्यिक लेखों के पाँच संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इन्होंने दूसरी भाषाओं से मराठी में अनुवाद किये है, जिसके तहत नौ उपन्यास, दो जीवनियाँ और पाँच नाटक भी उनके कृतित्व में शामिल है। इसके अलावा बीस के करीब फिल्मों का लेखन। हिन्दी की ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘आक्रोश’, ‘अर्धसत्य’ आदि के लिए संवाद लेखन। दूरदर्शन धारावाहिक-‘स्वयंसिद्धा’, ‘प्रिया तेण्डुलकर टॉक शो’ के लिए लेखन, संयोजन।
सम्मान/पुरस्कारः नेहरू फेलोशिप (1973-74), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में अभ्यागत प्राध्यापक के रूप में (1979-1981), पदम् भूषण (1984), फिल्मफेयर से पुरस्कृत।
19 मई, 2008 को पुणे (महाराष्ट्र) में महाप्रस्थान।