Thursday, 14 June 2012

हंस अकेला



 (जैन मुनि आचार्य रूपचन्द्र के जीवन पर आधारित उपन्यास)

Book : Hans Akela
Author : Vineeta Gupta
Publisher : Vani Prakashan 
Price : `395(HB)  
ISBN : 978-93-5000-968-0
Total Pages : 292
Size (Inches) :
5.75X8.75
Category  : Novel

पुस्तक के सन्दर्भ में चित्रा मुदगल....

'हंस अकेला' की पांडुलिपि पढ़ कर महसूस कर रही हूँ कि पौ फटे का सूरज केवल पूर्व दिशा में ही नहीं जन्मता ।  उसकी दिशाएँ अनेक रूपों और आकारों में परिवर्तित होती हैं ।  उन आकारों को हम जिस रूप में देख रहे होते हैं मात्र वही और उतना ही उसका सच नहीं होता ।  कभी-कभी वह किसी दिए की कोख से बाती की लौ बन कर जन्मता है, तो कभी किसी माँ की कोख तलाश किसी भ्रूण की शक्ल अख्तियार कर जन्मने को छटपटा आता है ।  अन्धकार के प्रतिरोध में ही सूर्य जन्मता है ।  अन्धकार की अनीति से मोर्चा लेने के लिए ।  सेठ जयचंद लाल की पत्नि पाँची देवी की कोख से शिशु रूपा का जन्म दिए की कोख से उसी बाती की लौ का जन्मना है,  जिसका जन्म ही अन्धकार के प्रतिरोध के लिए हुआ है ।  
आचार्य तुलसी सरदार शहर पधारे थे चातुर्मास के लिए । विरल बालक रूपा ने जिद्द ठान ली ।   मुनि दीक्षा लेने की ।  हंस किसी ठियाँ बँधकर कैसे रह सकता था! पिता जयचंद लाल सिन्धी उसका हठ देख विचलित हो उठे। बालक रूपा ने पिता से कहा -'जो नियम जबरन दिलवाये जाते हैं या थोपे जाते हैं  उनका पालन करना मुश्किल होता है । लेकिन जब हम अपने आप कोई संकल्प लेते हैं तो उसे जीवन भर निभाना मुश्किल नहीं होता...,'  
मन्त्री मुनि ने बालक रूपा की अलौकिकता का आभास कर विचलित पिता जयचन्द जी को आश्वस्त किया था- 'रूपा के लिए इतनी आशंकाएँ मत पाल ।  देख, आज यह जिस सिंह-वृत्ति से दीक्षा लेने की बात कर रहा है, यहीं सिंह-वृत्ति उसे संन्यास के पथ पर आगे तक ले जायेगी।' बालक रूपा दीक्षित होकर मुनि रूपचन्द्र कहलाया और सत्य का यही तपोनिष्ठ महान्वेषक, मानव कल्याण का महाउपासक बनकर आज हमारे समक्ष सत-असत में से सत चुनने और उसके कंटकीर्ण मार्ग का अवलम्बन कर मानव जीवन को सार्थक करने की प्रेरणा बन गया है। मानव सेवा के उपासक जैन मुनि, कवि मन रूपचन्द्र जी के जीवन पर आधारित यह मूँदे चक्षुओं की चौखट पर दस्तक देने वाली प्रेरणास्पद औपन्यासिक कृति 'हंस अकेला' उन सभी सुधी पाठकों के अंतर्मन के प्रकोष्ठों में बाती की उजास भरने में सक्षम है- जिनके लिए अन्धकार चुनौती है...।  

लेखिका के सन्दर्भ में...
25  वर्षों से समाचार पत्र और टेलीविजन पत्रकारिता में सक्रिय, विनीता गुप्ता ने एम. ए.(हिन्दी),दिल्ली विश्वविद्यालय और पीएच.डी. की उपाधि कानपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की । इनकी कुछ प्रकाशित कृतियों में, क़तरा-क़तरा ज़िन्दगी, इन दिनों (ग़ज़ल संकलन), हिन्दी ग़ज़ल की विकास यात्रा में दुष्यन्त कुमार का योगदान (शोध प्रबन्ध), ओजस्विनी (एक साध्वी की जीवन गाथा)। वर्तमान में यह विभागाध्यक्ष हैं, स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (उत्तर प्रदेश)।