Tuesday, 12 June 2012

वाणी प्रबुद्ध पाठक मंच-जून, 2012

पाठकों के लिए वाणी प्रकाशन ने 'वाणी प्रबुद्ध पाठक मंच' स्थापित किया है । जहाँ पाठक पुस्तकों पर खुलकर चर्चा कर सकेंगे और कम दर पर पुस्तकें खरीद भी सकेंगे । वाणी प्रकाशन समाचार के मई अंक में इसके नियम और शर्तें प्रकाशित हैं । इस अंक में प्रस्तुत है वाणी प्रबुद्ध पाठक मंच के सदस्यों के लिए प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव द्वारा चयनित पुस्तकें । अगर आप पुस्तकों को खरीदना चाहते हैं, तो आप सीधे वाणी प्रकाशन के विक्रय विभाग से पुस्तकें मंगवा सकते हैं, पुस्ताकादेश देने के माध्यमों की जानकारी निम्नलिखित है।


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वे देवता नहीं हैं...


Book : Ve Devta Nahin Hain
Author : Rajendra Yadev
Publisher : Vani Prakashan 
Price : `195(HB)  
ISBN : 81-7055-733-X
Total Pages : 216
Size (Inches) :
5.75X8.75
Category  : Memoirs/Criticism

पुस्तक के सन्दर्भ में.....

प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव द्वारा लिखित पुस्तक 'वे देवता नहीं हैं' जो समकालीनों के संस्मरण और विश्लेषणों में रामविलास शर्मा, अज्ञेय, यशपाल, मोहन राकेश, कमलेश्वर, मनमोहन ठाकौर, नजीर अकबराबादी, शानी, धर्मवीर भारती, भैरवप्रसाद गुप्त, मीरा महादेवन, शैलेश मटियानी, नरेशचन्द्र चतुर्वेदी, निर्मला जैन, लक्ष्मीचन्द्र जैन, भंवरमल सिंघी और स्वयं राजेन्द्र यादव। अंत में राजेन्द्र यादव पर अश्क का संस्मरण और राजेन्द्र यादव बनाम अश्क पत्राचार भी सम्मिलित है । लेकिन संस्मरणकार और विश्लेषणकार राजेन्द्र यादव का कहना है कि अचानक ख्याल आया कि अगर कानूनी रूप से अग्रिम जमानत ली जा सकती है तो अग्रिम श्रद्धांजलि क्यों नहीं लिखी जा सकती ? आज जिन्दा बने रहना भी तो अपराध ही है । मरने के बाद लोग दिवंगत के बारे में पता नहीं क्या-क्या लिखते और बोलते हैं,  वह बेचारा न उसका प्रतिवाद कर सकता है, न उसमें कुछ घटा-बढ़ा सकता है । दरअसल मेरे ये संस्मरण उसी लाचार आदमी के प्रतिवाद हैं । माध्यम मैं हूँ, मगर गुहार उस असहाय की है जो बलात्कार के खिलाफ न्याय की माँग कर रहा है । सचमुच यह कितना बड़ा राक्षसी षड्यंत्र है कि हम धो-पोंछकर, काट-छिल कर हर किसी को एक ही साँचे में घोंट-पीस डालते हैं कि उसकी सारी 'अद्वितीयता' समाप्त हो जाती है । सब एक-दूसरे के  प्रतिरूप देवता बने काँच के बक्सों से हमें घूरते रहते हैं । 
'औरों के बहाने' के साथ 'वे देवता नहीं हैं' मिलाकर पढ़ने से राजेन्द्र यादव के जीवन का काफी हिस्सा जाना जा सकता है । राजेन्द्र जी का कहना है कि उनके द्वारा लिखे संस्मरण, कहानियाँ-उपन्यास सब मिलाकर मेरी ही आत्मकथा के टुकड़े हैं । 

लेखक के सन्दर्भ में....
प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव का जन्म 28 अगस्त, 1929 आगरा, उत्तर प्रदेश में हुआ । आगरा से एम.ए. करने के बाद मथुरा, झाँसी, कोलकाता होते हुए दिल्ली में ।  पहली रचना 'प्रतिहिंसा' 1947 में 'चाँद' के भूतपूर्व सम्पादक श्री रामरखसिंह सहगल के मासिक 'कर्मयोगी' में प्रकाशित । पिछले 25  वर्षों से साहित्यिक पत्रिका 'हंस' का सम्पादन करते हुए दलित और स्त्री विमर्श को हाशिये से साहित्य की मुख्य धारा में लाने के ऐतिहासिक योगदान ।  प्रसार भारती बोर्ड में रहे ।  उपन्यास , कहानी संग्रह, समीक्षा निबन्ध, सम्पादन, अनुवाद, आदि विधाओं में लेखन । 'सारा आकाश', 'उखड़े हुए लोग', 'शह और मात', 'एक इंच मुस्कान' (मन्नू भंडारी के साथ) जैसे चर्चित उपन्यासों के लेखक ।