Saturday, 2 June 2012

चाँद के पार





जापान के सांस्कृतिक मास के उपलक्ष्य में 16 नवम्बर 2010 इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में चाँद पर काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया था । जिसमें जापानी दूतावास के राजनयिकों और जापान फ़ाउंडेशन के निदेशकों ने भी भाग लिया । उन्हीं कविताओं का संशोधित और परिवर्तित रूप 'चाँद के पार' नामक इस काव्य-संग्रह में संकलित है   'चाँद के पार' इस पुस्तक की यह खासियत भी है कि यह हिन्दी और जापानी भाषा में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत की गयी है । वाणी प्रकाशन का उद्देश्य है कि अनुवाद के माध्यम से एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के नज़दीक आये । जिससे संस्कृति का आदान-प्रदान हो सके । पुस्तक का द्विभाषी होना भाषा का फैलाव होना है । हम अपने प्रकाशन के माध्यम से हिन्दी भाषा, संस्कृति को बुलंदियों पर ले जाना चाहते हैं । इस काव्य-संग्रह में जापानी और हिन्दी कवियों द्वारा रचित 'चन्द्र-दर्शन' पर चुनिंदा कविताएँ संकलित हैं यजुर्वेद के अतिरिक्त इसमें आठवीं शताब्दी के कवियों से लेकर इक्कीसवीं शताब्दी के नवोदित कवियों तक की रचनाओं का जापानी से हिन्दी और हिन्दी से जापानी में अनुवाद किया गया है । आशा करते हैं,  पाठकों को रुचिकर लगेंगी ।      

Book : Chand Ke Paar
Editor's: Raj Buddhiraja, Yoshio Takakura
Translator: Raj Buddhiraja,Tomoko Kikuchi, Yoshio Takakura
Publisher : Vani Prakashan 
Price : `350(HB)  
ISBN : 978-93-5072-180-3
Total Pages : 151
Size (Inches) : 
5.50X8.75
Category  :  Poetry

पुस्तक के सन्दर्भ में......

इस काव्य-संग्रह में जापानी और हिन्दी कवियों द्वारा रचित 'चन्द्र-दर्शन' पर कुछ कविताएँ संकलित हैं ।   जापान में पारम्परिक विश्वास है कि जापान के पुराने कैलेण्डर के अनुसार आठवें महीने की पंद्रहवीं तारीख, यानी पूर्णमासी की रात को चन्द्र का दर्शन किया जाता है ।   साल में इसी दिन चाँद सबसे सुन्दर दिखता है और जापानवासी झुण्ड के झुण्ड एकत्रित होकर चाँद के छाँव में बैठ कर पारम्परिक भोजन करते है और चाँद की प्रंशसा पर गीत गाते हैं । पश्चिम कैलेण्डर के हिसाब से यह त्योहार सितम्बर या अक्टूबर में पड़ता है । इसे जापानी में 'ओत्सुकिमि' और हिन्दी में चन्द्र-दर्शन कहा जाता है ।  जापानी सभ्यता में पुष्प-दर्शन (विशेषत: वसंत में खिलने वाला सकुरा फूल), मोमिजि-दर्शन (विशेषत: मैपल के रंग-बिरंगे पत्ते) और हिम-दर्शन (शीत-ऋतु) के साथ-साथ चन्द्र-दर्शन का विशेष महत्त्व है ।  पूर्णमासी में खाया जाने वाला विशिष्ट भोजन होता है जिसमें सफेद चावल से बनाई गई त्सुकिमि दानगो ( मिठाई), सुसुकि घास और चस्टनट सम्मिलित हैं ।    

भारत में भी पूर्णिमा और चाँद का विशेष महत्त्व है । करवा चौथ चाँद से प्रत्यक्ष सम्बन्ध रखनेवाला त्योहार है । विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य की प्रार्थना के लिए व्रत रखती हैं और चाँद दिखने पर ही व्रत तोड़ती हैं । पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले त्योहारों में बुद्ध पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन तथा होली इत्यादि हैं । कुछ लोग पूर्णिमा के दिन खीर पका कर चाँदी की कटोरी में चाँद की छाया में रखते है और प्रात:काल उसको खाते हैं । भारत में बच्चे चाँद को प्यार से मामा पुकारते हैं । यह भी कहा जाता है कि चाँद में एक काकी रहती है और चर्खा कात रही है । एक दिलचस्प खोज यह है कि जापान और भारत की काव्य-परम्परा में चाँद और बच्चों का घनिष्ठ सम्बन्ध समान रूप से मिलता है । दोनों देशों के बच्चे न केवल चाँद को बेहद प्यार करते हैं, बल्कि उसे खिलौना समझकर अपनी-अपनी माँओं से ले आने के लिए जिद्द भी करते हैं । इसलिए जापान-भारत के सांस्कृतिक सम्बन्धों पर आधारित है यह काव्य-संग्रह 'चाँद के पार'।            

सम्पादकों के सन्दर्भ में.....
राज बुद्धिराजा : विख्यात शिक्षाविद एवं बहुभाषाविद, राज बुद्धिराजा का जन्म 16 मार्च 1937, लाहौर में हुआ ।  समीक्षा, कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, यात्रा-वृत्तान्त, जीवनी और स्तम्भ लेखन आदि अनेक विधाओं में कार्य ।  अब तक 66 पुस्तकें प्रकाशित ।  भारत-जापान सांस्कृतिक परिषद् की अध्यक्ष और भारत-जापान के सांस्कृतिक सम्बन्ध के विकास में अभूतपूर्व योगदान । जापान नरेश द्वारा सर्वोच्च सम्मान 'ज़ुइहोशो' प्राप्त ।   

योशिओ तकाकुरा: 25 नवम्बर 1978 को जापान के तोयोहाशी शहर में योशिओ तकाकुरा का जन्म हुआ ।  2001  में  तोक्यो विश्वविद्यालय से बी.ए.(भाषाविज्ञान) में किया ।  सन 2001  से 2003  में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, दिल्ली में हिन्दी का प्रशिक्षण । जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से एम.ए. और एम.फिल. करने के बाद अब पीएच.डी. के शोधरत।