Wednesday, 23 May 2012

खण्ड-खण्ड अग्नि



"यह प्रश्न हमेशा उलझा हुआ रहेगा कि कहाँ व्यक्ति की और समूह की विवशता मान ली जाए और कहाँ उसकी कर्मण्यता पर आक्षेप । क्योंकि हर स्थिति में व्यक्ति और समूह का आकलन कुछ ऐसे प्रतिमानों पर होता आ रहा है जिनका आधार या जड़ें अधिकतर निकट या दूर के अतीत में होती हैं ।  यानी जिनकी समय और स्थान-सापेक्षता एक ऐसे वर्तमान से होती है जो वस्तुत: होता ही नहीं और जो होता है, प्रभुसत्ता का तो सवाल ही नहीं उठता । सम्भवत: आने वाला साहित्य-चिन्तन अतीत के उसी कृशकाय वर्तमान को खोजने का प्रयास किया करता है या करता रहता है ।  क्योंकि उसके हाथ उस अतीत के एक सशक्त भविष्य की सुविधा भी लग चुकी होती है ।" -दिविक रमेश  

Book : Khand-Khand Agni
Author  : Divik Ramesh
Publisher : Vani Prakashan 
Price : `100(HB)  
ISBN : 81-7055-352-0
Total Pages : 106
Size (Inches) : 
5.75X8.75
Category  :  Poetic Drama


पुस्तक  के सन्दर्भ में.....

प्रस्तुत कृति की मूल प्रेरणा वाल्मीकि कृत रामायण का एक प्रसंग-विशेष है । कई अर्थों में यह कृति एक चुनौती सिद्ध हो सकेगी क्योंकि अपने अन्दाज, अपनी प्रस्तुति और अपने कथ्य में यह अपने जैसी पूर्व की कृतियों का सार्थक अतिक्रमण कर सकी है और एक अनूठी विधा की सम्भावनाओं से समृद्ध हो सकी है । कवि की मान्यता है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मिथ या पुरा-कथा कथ्य या उद्देश्य की उपेक्षा शिल्प या अभिव्यक्ति-उपादान ही अधिक हो सकता है, इस कृति को कालातीत बना सकने में समर्थ सिद्ध हुई है । अर्थात प्रस्तुत कृति निरी 'कथा' नहीं है बल्कि जहाँ 'कथा' समाप्त होती है वहाँ से आगे और पीछे की बात करती है


लेखक के सन्दर्भ में ........
सोवियतलैंड नेहरू पुरस्कार (कविता पुस्तकों पर), एन.सी.ई.आर.टी. का राष्ट्रीय बाल-साहित्य पुरस्कार, हिन्दी अकादमी,दिल्ली का साहित्यिक कृति और बाल-साहित्य पुरस्कार एवं भारतीय बाल-संस्थान केन्द्र, कानपुर का सम्मान । आदि सम्मानों से पुरस्कृत  दिविक रमेश ( वास्तविक नाम-रमेश शर्मा) का जन्म 1946 किराड़ी दिल्ली में हुआ । इन्होंने एम.ए.,पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की । दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज के हिन्दी विभाग में रीडर रहे । इनकी पुस्तकों का  अनुवाद अन्य भाषा साहित्य में भी हुआ है ।