Monday, 21 May 2012

साम्प्रदायिकता ए ग्राफिक एकाउंट

राम पुनियानी और शरद शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक 'साम्प्रदायिकता : ए ग्राफिक एकाउंट' जिसकी पुस्तक समीक्षा 20 मई 2012, प्रभात खबर, में प्रकाशित थी / पाठक इस समीक्षा को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएँ
http://epaper.prabhatkhabar.com/epaperpdf//2052012//2052012-md-hr-10.pdf

जैसा कि आप जानते हैं, वाणी प्रकाशन लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, उसे फेसबुक, ब्लॉग और वाणी प्रकाशन की वेब साईट पर दे रहा है / जिससे अधिक से अधिक पाठक पुस्तकों से रूबरू हो सके / पाठक वाणी प्रकाशन वेबसाइट http://vaniprakashan.in/ पर जाकर आप पुस्तकों के सन्दर्भ में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं /


Book : Sampradayikta - A Graphic Account
Author : Ram Puniyani & Sharad Sharma 
Publisher : Vani Prakashan
Price :
`495(HB)  
ISBN : 978-93-5000-741-9
Total Pages :  231
Size (Inches) :
7X8.75
Category  : Comminalism/Comics


पुस्तक के संदर्भ में .........
यह पुस्तक साम्प्रदायिकता और आतंकवाद की परिघटना पर विस्तार से नज़र डालती है, जिसने देश और दुनिया के दूसरे हिस्सों पर अपनी पकड़ बना ली है पुस्तक  सवाल-जवाब के रूप में लिखी गई है और इसे चित्रात्मक प्रस्तुति दी गई है, जो लिखे शब्दों को नया आयाम देती है ।  ये 6  दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस से शुरू होती है, जिससे भयानक हिंसा फैली ये पुस्तक उन ताकतों को भी समझने की कोशिश करती है जो बाबरी विध्वंस और उसके बाद की हिंसा को उकसाने और लगातार फैलाने के लिए जिम्मेवार हैं   ये पुस्तक गोधरा ट्रेन हादसे की बात करती है जिसे बाद के दंगों का कारण बताया गया,लेकिन किताब उस सच को सामने लाती है, जिसे नागरिक अधिकरण,बनर्जी आयोग और तहलका से खुलासे में नरसंहार के बारे में बताया गया है  ।  पुस्तक भारतीय समाज की समझ पर नज़र डालती है  धर्म के दायरे में, मिलीजुली संस्कृति और साहित्य की पृष्ठभूमि में राष्ट्र के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन की रुपरेखा को समझने की कोशिश है ब्रिटिशों के आगमन ने साम्प्रदायिकता की नींव रखी   ब्रिटिश उपनिवेशवाद के एजेंडे ने देश के ज़मींदार और उनकी सोच को साम्प्रदायिक दिशा में मोड़ा जिसका नतीजा बंटवारे और कश्मीर की समस्या की शुरुआत के रूप में सामने आया
इस पुस्तक में स्वतंत्रता आन्दोलन से निकले मूल्यों,गाँधी की भूमिका,समाज के दबे कुचले वर्गों का उत्थान और धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के आलोक में साम्प्रदायिक राजनीति का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है पुस्तक,अल्पसंख्यकों के बारे में प्रचलित कई पूर्वाग्रहों को भी धवस्त करती है,जैसे मंदिर को क्यों तोडा गया,क्यों धर्म परिवर्तन हुए,बहुविवाह और ज्यादा बच्चों के पीछे का सच क्या है, ईसाई मिशनिरयों के कार्यों का सच क्या है,आतंकवाद की राजनीति के पीछे का सच क्या है,इन सारे मसलों पर गंभीर दृष्टि डाली गई है अंत में पुस्तक समाज के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के मज़बूत होते कदमों को चित्रित करती है ।
आम पाठकों,विद्यार्थियों एवं युवाओं के बीच इस मुद्दे का सरल रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है  । जिसमे ग्राफिक का प्रयोग किया गया है । इसके लिए निशा अग्रवाल, के. कन्न (आक्सफैम-भारत ) के आभारी हैं जिन्होंने पुस्तक को इस रूप में निकालने में मदद की ।
 
लेखकों का परिचय 
राम पुनियानी .....राम पुनियानी विभिन्न धर्मनिरपेक्ष मंचों के साथ जड़ें हैं और अल्पसंख्यों के अधिकारों एवं मानव अधिकारों के उल्लंधन की जाँच के लिए गठित जन-न्यायाधिकरण की विभिन्न जांच रिपोर्टों का हिस्सा रहें है । उनकी पुस्तकें : गाँधी की दूसरी हत्या,साम्प्रदायिक राजनीति: तथ्य बनाम मिथक, संघ परिवार का फासीवाद, आतंकवाद : धारणाएं एवं वास्तविकता । उन्हें इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार 2006 और राष्ट्रीय साम्प्रदायिकता सदभावाना पुरस्कार 2007 से सम्मानित किया गया ।

शरद शर्मा .....शरद शर्मा, कार्टूनिस्ट एवं वर्ल्ड  कॉमिक्स नेटवर्क के संस्थापक हैं, जो दुनिया भर में सामाजिक परिवर्तन के लिए ग्रासरूट्स कॉमिक्स के उपयोग की वकालत करती है ।  विकास के क्षेत्र में आने से पूर्व उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय तक टीवी न्यूज़ और प्रिंट मीडिया के लिए काम किया । उन्हें विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ 600 से अधिक कॉमिक्स कार्यशालाएं भारत,पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, लाओस, बेनिन,ब्राज़ील, ब्रिटेन,फिनलैंड, स्वीडन और एस्टोनिया में आयोजित करने का अनुभव है । उन्हें वर्ष 2005 में अशोक फैलोशिप, रियल हीरो पुरस्कार 2008 और कर्मवीर पुरस्कार-2009 से सम्मानित किया गया ।   

अगर आप पुस्तकों को खरीदना चाहते हैं, तो अब आप सीधे वाणी प्रकाशन के विक्रय विभाग से   पुस्तकें मंगवा सकते हैं, पुस्ताकादेश देने के माधयमों की जानकारी निम्नलिखित है।


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