Friday, 11 May 2012

सआदत हसन मंटो


वाणी प्रकाशन की ओर से  सआदत हसन मंटो की जन्मशताब्दी पर शत शत  नमनमंटो फ़रिश्ता नहीं, इंसान हैं । इसलिए उनके चरित्र गुनाह करते हैं । दंगे करते हैं । न  उसे किसी चरित्र से प्यार है न हमदर्दी । मंटो न पैगम्बर हैं, न उपदेशक । उनका जन्म ही कहानी कहने के लिए हुआ । इसलिए फ़साद की बेरहम कहानियाँ लिखते हुए भी उनकी कलम पूरी तरह काबू में रही मंटो की खूबी यह भी थी कि वो चुटकी बजाते एक कहानी लिख लेते थे । उनकी लिखी हुई उर्दू-हिन्दी की कहानियाँ आज एक दस्तावेज बन गये हैं सआदत हसन मंटो  उर्दू-हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं महत्वपूर्ण कथाकार माने जाते हैं । उनका जन्म 11 मई 1912 को जिला लुधियाना में हुआ था। आरम्भिक शिक्षा अमृतसर एवं अलीगढ़ में हुई। विभाजन एवं दंगा संस्कृति पर लिखी समस्त कहानियाँ आज दस्तावेज बन चुकी हैं।  मंटो ने मुम्बई की बालीवुड नगरी में भी संवाद लेखक के तौर पर काम किया ।  एक साप्ताहिक पत्रिका 'मुसव्वर' का संपादन भी किया । मुम्बई में फिल्मसिटी, फिल्म कम्पनी और प्रभात ताकीज में भी नौकरी की । मंटो की पहली कहानी 'तमाशा' थी । मंटो ने बगैर उन्वान के नाम से इकलौता उपन्यास लिखा । उनकी अंतिम कहानी 'कबूतर और कबूतरी' थी

वाणी प्रकाशन समाचार,मई 2012