Wednesday, 2 May 2012

विस्मय का बखान

 
Book : Vismaya Ka Bakhan
Author : Yatindra Mishra
Publisher : Vani Prakashan
Price :
` 395(HB)
ISBN : 978-93-5072-201-5
Total Pages :  183
Size (Inches) :  5.75X8.75
Category  : Essays

 
पुस्तक के संदर्भ में .....
पिछले एक दशक में फैली हुई यतीन्द्र मिश्र के संगीत एवं कला- चिंतन की बानगी के तौर पर यह पुस्तक विस्मय का बखान आपसे संवादरत है इस दौरान लेखक के द्वारा लिखे कला सम्बन्धी डायरियों के अंश, पढ़ी हुई पुस्तकों की स्मृतियाँ, स्मृति की खिड़की से खोजी गयी रूपंकर कलाओं की दुनिया, वरिष्ठ कलाकारों एवं मूर्धन्यों की कला-यात्रा के प्रभावों की स्नेहिल झिलमिल तथा समय-समय पर साहित्य एवं संस्कृति के समाज में रमते हुए कुछ उत्साह, तो कुछ जिज्ञासा के साथ उसके शाश्वत व समकालीन प्रश्नों को भेदने के प्रयास  का एक हार्दिक संगुम्फन है यह संचयन
इस बहाने विभिन्न कला-रूपों पर एकाग्र इस आयोजन में भाषा भी कला के साथ अपनी समावेशी प्रकृति को साथ लेकर आगे बढ़ती है, जिसके चलते कलाओं के आँगन में भाषा का प्रवेश तथा भाषा के संसार में कलाओं की जुगलबंदी को कुछ अभिनव आशय सुलभ होता है  ।  एक तरफ जहाँ यह पुस्तक रूपंकर अभिव्यक्तियों के समाज एवं उनकी स्वायत्तता पर गंभीरता से विचार करती है, तो दूसरी ओर इसका वितान पं. मल्लिकार्जुन मंसूर, उस्ताद अमीर खां, पं. भीमसेन जोशी से होता हुआ कशी की बाईयों समेत शैलेन्द्र, सत्यजित रे, साहिर लुधियानवी, निर्मल वर्मा, कुँवर नारायण, रसन पिया, लता मंगेशकर एवं ग़ालिब की दुनियाओं तक फैला है
संगीत और नृत्य पर विमर्श के बहाने, सिनेमा और साहित्य के आंतरिक रिश्तों के चलते तथा तमाम सारे कलाकारों, मूर्धन्यों, वाग्गेयकारों, कवियों-लेखकों, नर्तक-नर्तकियों के संस्मरणों व संवादों को आधार बनाकर उनकी कला-व्याप्ति का बखान, यह पुस्तक अपनी पूरी आत्मीयता के साथ करती हैं,  जिसका कला-परक आमन्त्रण हर पृष्ठ पर पूरी प्रखरता से उजागर हुआ है
लेखक के संदर्भ में ......
यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, संपादक और अध्येता हैं साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं अबु-धाबी की यात्राएँ हैं उन्होंने हाल ही में कन्नड़ शैव कवयित्री अक्का महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन किया है, जो 'भैरवी' नाम से प्रकाशित है  फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं और गीतों के चयन क्रमश: 'यार जुलाहे' तथा 'मीलों से दिन'  नाम से सम्पादित हैं यह अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउंडेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं