Friday, 27 April 2012

फिलस्तीन और अरब-इस्रायल संघर्ष



BOOK : PHILASTIN AUR ARAB-ISRAEL SANGHARSH
AUTHOR:  MAHENDRA MISRA
Publisher : Vani Prakashan
Price : ` 450 (HB)
ISBN : 978-93-5000-783-9
Total Pages :  248
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  : HISTORY

पुस्तक के सन्दर्भ में.....

फिलस्तीन की समस्या और अरब-इस्रायल संघर्ष मध्यपूर्व की एक अनसुलझी समस्या है । इसके मूल में है साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से इसका विभाजन और वहाँ यहूदियों के लिए धर्म और जाति पर आधारित एक सियोनवादी राष्ट्र की स्थापना इस्रायल आज अरब जगत में पश्चिम के नव साम्राज्यवाद की चौकी है । उसका निर्माण अस्तंगत साम्राज्यवाद की उपलब्धि है और उसे अमरीका के नवसाम्राज्यवाद का संरक्षण प्राप्त है। 
मध्यपूर्व में मौजूदा संघर्ष को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए पश्चिम एशिया के इतिहास का विश्लेषण और उसकी समझ जरूरी है। यह पुस्तक इस दिशा में एक ईमानदार कोशिश है। 'अरब पूर्व में इस्रायल की मौजूदगी एक खंजर की तरह है जिसने अरब जगत को काट कर टुकड़ों में बाँट दिया है।' मध्यपूर्व में हिंसा की जड़ें कितनी गहरी हैं- यह समझने के लिए राजनैतिक सियोनवाद की उत्पत्ति, विकास और उसकी क्रूर आक्रामक शक्तिमत्ता को समझना आवश्यक है। यह पुस्तक सियोनवाद के एक शताब्दी के इतिहास और फिलस्तीनी अरबों के निरन्तर विनाश की गाथा है आज पूरे अरब जगत में अशान्ति और क्रान्ति का माहौल है । 
इस बात की प्रबल सम्भावना है कि वहाँ इस्रायल विरोध और फिलस्तीनियों की सक्रिय पक्षधरता व्यापक रूप से उभरकर सामने आये । मध्यपूर्व एक प्रच्छन्न ज्वालामुखी की तरह है । इसके सम्भावित विस्फोट से ' सभ्यताओं की टकराहट' के इस युग में पूरे विश्व का भविष्य ही खतरे में है। यह पुस्तक शायद एक विराट मानवीय त्रासदी को समझने में कुछ मदद करे
 
पुस्तक की विषय सूची 
भूमिका से पहले
भूमिका
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राजनैतिक सियोनवाद का उदय
प्रथम विश्वयुद्ध और उसके बाद
बन्दूकधारी सियोनवाद
अरब-इस्रायल संघर्ष
लेबनन, हिजबुल्ला और 2006 की लड़ाई
इन्तिफ़दा
दूसरा
इन्तिफ़दा और उसकी परिणति
शान्ति-वार्ता का पाखंड और समझौतों का झूठ
मौजूदा मतभेद के प्रमुख मुद्दे
वर्तमान स्थिति
परिशिष्ट- अरब देशों के यहूदी
सन्दर्भ-ग्रन्थ

लेखक के सन्दर्भ में.....

महेन्द्र मिश्र का जन्म सन 1938 में एटा जनपद, उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हुआ इनके पिता संस्कृत साहित्य और आयुर्वेद के आचार्य थे और जीविका से शिक्षक। भाषा और साहित्य में अभिरुचि विरासत में मिली। महेन्द्र मिश्र अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. हैं । चार वर्ष आगरा और जबलपुर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के व्याख्याता रहे। सन 1962 में भारतीय रेल यातायात सेवा में प्रवेश किया और 1996 में अपर सदस्य (यातायात) रेलवे बोर्ड एवं विशेष सचिव, रेल मंत्रालय के पद से सेवानिवृत्त हुए रेल पर उन्होंने दो पुस्तकें लिखी हैं- 'रेल परिवहन का स्वरूप' और 'भारतीय रेल के सुनहरे पन्ने' । वर्तमान में वह विशाल बांधों और परियोजनाओं की मानवीय एवं पर्यावरण की त्रासदी के अध्ययन में संलग्न हैं