Tuesday, 10 April 2012

"परिन्दे"

आधुनिक नॉर्वीजी क्लासिक फ़ुग्लाने का अनुवाद "परिन्दे",'अत्युत्कृष्ट कृति' - लिट्रेरी रिव्यू

Book : Parinde

Author : Tarjei Vesaas
Translator: Teji Grover
 
Publisher : Vani Prakashan
Price :
` 395(HB)
ISBN : 978-93-5072-215-2
Total Pages :  224
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  : 
Novel

पुस्तक के संदर्भ में.... 
उत्तरी यूरोप के आधुनिक उपन्यासकारों की अव्वल श्रेणी में रखे जाने वाले थारयै वेसोस का उपन्यास परिन्दे उनकी अत्युत्कृष्ट कृति मानी जाती है/  परिन्दे माटिट्स नामक एक ऐसे शख्स की कहानी है जो अपनी मानसिक विशिष्टता के चलते पूरे कथानक में अनजाने में ही ज़िन्दगी के सबसे अहम सवाल पूछता चला जाता है/ झील के नज़दीक एक कॉटेज में अपनी कामगार बहन हेगे के साथ रहते हुए वह एक दिन अपनी नाव में एक अजनबी लकड़हारे को बिठाकर घर लाता है/ आगन्तुक योर्गेन और हेग की प्रेम कहानी माटिट्स के लिए अप्रत्याशित स्थितियों का सबब बनती चली जाती है/  वेसोस का शायद ही कोई अन्य पात्र लेखक के स्नेह और ममत्व से इस क़दर घिरा हुआ हो/ वेसोस ने माटिट्स को सबसे अधिक समझा भी है - माटिट्स जो रोज़मर्रा की परिस्थितियों में एकदम निरीह और निरुपाय है, लेकिन जो तथाकथित चतुर-सुजान लोगों की तुलना में चीजों को कहीं अधिक गहराई से समझता है / प्रकृति उसके लिए कई रहस्यों को उदारता से प्रकट करती है / वह पक्षियों की भाषा समझता है और वन-कुक्कुट द्वारा चोंच से लिखे हुए सन्देशों को पढ़ सकता है / पक्षियों के लिखे सन्देश 'प्रिक्क प्रिक्क प्रिक्क' से माटिट्स ने अनजाने में ही वेसोस के पाठकों के लिए एक सहज और स्नेहिल भाषा का आविष्कार भी कर डाला है जिसे नॉर्वे में सब अच्छी तरह से समझते हैं/
लेखक, थारयै वेसोस के संदर्भ में......
थारयै वेसोस का जन्म 20 अगस्त 1897 में टेलिमार्क, नार्वे,के एक छोटे से गाँव विन्ये में हुआ/ खास तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इनका नाम   उत्तरी यूरोप के सबसे अहम उपन्यासकारों में शुमार हुआ / परिन्दे और बर्फ़ महल इनकी सर्वश्रेष्ठ कृतियाँ मानी जाती हैं/ ये नार्वे के लगभग सभी अहम पुरस्कारों से सम्मानित हैं, जिनमें नॉर्डिक काउंसिल्ज़ लिट्रेचर पुरस्कार (1963), वेनिस पुरस्कार (1953), पूरी दुनिया में इनके उपन्यास, नाटक और कविताओं का अनुवाद बीस भाषाओँ में हो चुका है/ 15 मार्च 1970 को इनका देहांत हुआ /
अनुवादक, तेजी ग्रोवर के संदर्भ में.....
वर्ष 1995-1997 के दौरान प्रेमचंद सृजनपीठ, उज्जैन की अध्यक्षता एवं वर्ष 1989 में भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, 2003 में  रज़ा फाउंडेशन फेलोशिप और वरिष्ठ कलाकारों हेतु नेशनल कल्चरल फ़ेलोशिप प्राप्त करने वाली तेजी ग्रोवर का जन्म 7 मार्च 1955 को पठानकोट में हुआ / चंडीगढ़ के एक कॉलेज में कई वर्षों तक अंग्रेजी पढ़ाने का काम छोड़ कर इन दिनों मध्यप्रदेश में रह रही हैं/ लेखन के अलावा पेंटिंग करना, बच्चों के साहित्य का सम्पादन, संकलन, अनुवाद और सृजन, नर्मदा जी के सान्निध्य में / इनके द्वारा अनुवाद पुस्तकें-भूख(नार्वीजी लेखक क्नुत हाम्सुन का उपन्यास), बर्फ़ की खुशबू(स्वीडी कविता का संकलन), इत्यादि पुस्तकें प्रकाशित हैं/