Friday, 6 April 2012

देश भीतर देश



       AIR (ALL INDIA RADIO) FM GOLD  पर प्रसारित होने वाला कार्यक्रम 'सुबह सवेरे'  में
'देश भीतर देश' उपन्यास की समीक्षा और लेखक से परिचर्चा को आप शनिवार 7 अप्रैल 2012 कार्यक्रम 'सुबह सवेरे' AIR (ALL INDIA RADIO) FM GOLD पर सुबह 7 : 30 से 8 बजे के  बीच सुन सकते हैं/ 
देश भीतर देश के संदर्भ में......
लोकप्रिय और चर्चित उपन्यासकार प्रदीप सौरभ के  उपन्यास 'देश भीतर देश' में कहानी है एक देश में उपज रहे उन अनेक देशों की, जहाँ दिल मुश्किल से मिलते हैं और मानवीय संवाद नहीं होता/ इस कहानी की पटकथा पूर्वोत्तर में रची- बसी है, जिसे हिन्दी कहानीकारों और उपन्यासकारों ने पहले कभी विषय नहीं बनाया/ 'देश भीतर देश' का नायक विनय है, जो 'हाशिये' से नया संवाद स्थापित करता है,  प्रेम केन्द्रित भूमिका निभाता है और पूर्वोत्तर के असम की विषय कथा को कहता है. यह अवश्य ही पढ़ने योग्य कहानी है/ (सुधीश पचौरी,'देश भीतर देश' के सन्दर्भ में) 'देश भीतर देश' सात राज्यों के माध्यम से अपनी कहानी कहता है / 'देश भीतर देश'  पूर्वोत्तर भारत के आन्तरिक कलह पर आधारित है, जो कि क्षेत्रवाद की भ्रांतियाँ  को और देश में फैले नक्सलवाद को समझने में कारगर है /  उन्होंने उपन्यास के माध्यम से भारत की एकता और अखंडता को कायम करने का सार्थक प्रयास किया है /

अपना एक कमरा


Book : Apna Ek Kamra
Author : Virginia Woolf
Translator  : Mozez Michel
Publisher : Vani Prakashan
Price : ` 295(HB)
ISBN : 978-93-5000-772-3
Total Pages :  160
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  :  Feminism


पुस्तक के संदर्भ में ....
अपना एक कमरा, स्त्री-विमर्श की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण रचना है / स्त्रियों के हित में स्वतंत्र जीवन की प्रबल पक्षधर और ध्वजवाहक वर्जीनिया वुल्फ़ ने इस पुस्तक में स्त्रीवादी चिंतन को केंद्र में रखते हुए लैंगिक विषमता और विडम्बना पर सटीक टिप्पणी की है / एक विस्तारित लेख के रूप में प्रस्तुत यह पुस्तक वस्तुत: उन व्याख्यानों पर आधारित है जो वर्जीनिया वुल्फ़ ने केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दो महिला कॉलिजों में अक्टूबर 1928 में दिए थे / मूलत: 'स्त्रियाँ और कथा साहित्य' पर दिए गए इन व्याख्यानों में वर्जीनिया वुल्फ़ ने कथा साहित्य की लेखक और कथा साहित्य की पात्र, दोनों ही रूपों में स्त्री की स्थिति का विशद विवेचन और विश्लेषण किया है /
  'ए रूम आव वन्ज़ ओन' शीर्षक से अंग्रेजी में यह पुस्तक 1929 में होगार्थ प्रेस से प्रकाशित हुई थी / यहाँ वर्जीनिया वुल्फ़ ने अपने उस मत को आगे बढ़ाया  कि यदि कोई स्त्री लेखन-कार्य करना चाहती है तो उसके पास पर्याप्त पैसा और अपना एक कमरा होना चाहिए / दरअसल, यह उस वर्चस्वशाली पुरुष मानसिकता पर प्रहार है जिसने स्त्री को शताब्दियों से रचनात्मकता से वंचित रखा है / प्रस्तुत पुस्तक की वार्ताकार एक स्त्री है, जिसका कोई भी नाम हो सकता है / वह एक प्रतिनिधि है /  यह एक निर्मम सत्य है कि पुरुष वर्ग धनी है और स्त्री निर्धन और वंचित / यहाँ गरीब के लिए कोई मौका नहीं है / 

लेखिका के सन्दर्भ में ..... वर्जीनिया वुल्फ़ का जन्म 1882 में लन्दन में हुआ / पिता सर लेज़ली स्टीफन एक जाने-माने दार्शनिक, आलोचक और जीवनी लेखक थे / स्वास्थ्य अच्छा न रहने के कारण वर्जिनिया औपचारिक शिक्षा नहीं ले पाईं और उन्होंने घर पर ही अपनी पढ़ाई की जिसमें उन्हें अपने पिता का पूरा सहयोग मिला / सामान्य शारीरिक स्वास्थ्य से वंचित वर्जीनिया वुल्फ़ अतिशय संवेदनशील भी थीं  / वह मानसिक अवसाद से ग्रस्त रहीं /  समकालीन स्थितियों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया /  युध्द ने उनके मन पर घातक प्रभाव डाला / इंग्लैंड में हुए हवाई युध्द ने उन्हें विचलित कर दिया / उन्हें लगा कि सब के रहते वह पागल हो जाएँगी और अपने पति पर बोझ बन जाएँगी, इस तरह,1941 में, उन्होंने आत्महत्या कर ली /  


दलित दृष्टि

 
Book : Dalit Drashti
Author : Gail Omvet
Translator(s)  : Ramnika Gupta & Aqeel Qess
Publisher : Vani Prakashan
Price : ` 250(HB)
ISBN : 978-93-5000-726-6
Total Pages :  111
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  : 
Dalit Leterature/Criticism

 पुस्तक के संदर्भ में .....
भारतीय वामपंथियों ने सांस्कृतिक तथा प्रतीकात्मक मुद्दों पर समुचित ध्यान ही नहीं दिया है/ कहा जा सकता है कि उन्होंने भारतीय संस्कृति के ब्राह्मणवाद के वर्चस्ववादी अर्थ तथा स्वरूप से आँखें चुराईं/ दरअसल यह लड़ाई तो दलित जाति-विरोधी आन्दोलनों तथा कुछ हद तक हाल के दशकों के इतर सामाजिक आन्दोलनों ने लड़ी है/ हिन्दू धर्म से मुठभेड़ के इस इतिहास से सीख लेने का समय आ गया है/ ओमवेट दिखाती हैं  कि किस प्रकार दलित आन्दोलनों के विभिन्न पक्षों ने दलित पर अत्याचार-उत्पीड़न के निमित्त खड़ी की गयी संरचनाओं और दलित-उध्दार की आधारभूत शर्तों को देखने-परखने के नये मार्ग प्रशस्त किये हैं/ जोतिबा फुले ने वर्ण व्यवस्था को हिन्दू धर्म की आत्मा के रूप में देखा/ उत्पीड़न की जिस संस्कृति को यह धर्म पोषित करता है और जिस नृशंस दासता को यह स्वीकार है, उन्होंने उसका पर्दाफाश करने का प्रयास किया/
इस पुस्तक में ओमवेट ने हिन्दू धर्म को पितृसत्तावादी विचारधारा करार दिया और ब्राह्मणवादी पाठ में निहित पारंपरिक नैतिकता पर सवाल खड़े किये / उन्होंने इन मूल-पाठों को स्त्री-उत्पीड़न तथा पुरुषसत्तावादी दबदबे की जड़ माना/
पुस्तक में ओमवेट की बहस दो स्तरों पर चलती है/ पहले स्तर पर वे दलित आन्दोलन के विभिन्न चरणों, उन आन्दोलनों की आकांक्षाओं और आदर्शों, धर्म, संस्कृति और सत्ता के अंत: सम्बन्ध, जाति, लिंग और वर्ग-उत्पीड़न के मध्य सम्बन्ध तथा भाषा और पहचान के संबंधों के सन्दर्भ  में दलितों की समझ की विवेचना करती  हैं / दूसरे स्तर पर वे दलित उध्दार के विषय में अपना दृष्टिकोण सामने रखती है / विभिन्न दलित विचारधाराओं की चर्चा में लेखिका की आवाज़ सुना जा सकता है /  यह पुस्तक मान्यताओं और वर्गों को, जिन्हें हम बिना जांचे-परखे सही मान लेते हैं, चुनौती देगी / यह हमें इतिहास की अपनी समझ पर पुनर्विचार करने का आग्रह करेगी /


लेखिका के सन्दर्भ में .....
गेल ओमवेट गेल ओमवेट नये सामाजिक आन्दोलनों,विशेषतया नारी तथा किसान आंदोलनों से सम्बन्ध संगठनों के साथ जुडी हुई प्रसिध्द विदुषी के रूप में जानी जाती हैं /  कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से पीएच.डी.प्राप्त सुश्री ओमवेट 1982 से भारत की नागरिक हैं /  सत्तर के दशक से ही जाति-विरोधी अभियानों में वे सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं/ उन्होंने वर्ण, जाति तथा लिंग सम्बंधित विषयों पर कई गंभीर पुस्तकें तथा लेख लिखे हैं, जिसमें 'रिइनवेनिटंग रेवाल्यूशन : न्यू सोशल मूवमेंट्स इन इंडिया,(1993) तथा ' दलित वर्ग एंड डेमोक्रेटिक रेवाल्यूशन, (1994) चर्चित है/ लिंग-भेद, वातावरण तथा ग्राम विकास की विशेषज्ञ समाजशास्त्री  के रूप में लाभप्रतिष्ठ सुश्री गेल ओमवेट महाराष्ट्र के कासे गाँव में रहती हैं /

अनुवादक के संदर्भ में..
हिन्दी की परिचित कथाकार,कवियत्री एवं चिंतक रमणिका गुप्ता झारखण्ड के छोटानागपुर में मज़दूरों, दलितों, आदिवासियों एवं महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत रही हैं/ सम्प्रति वह प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका 'युध्दरत आम आदमी' की संपादक हैं/





वाणी प्रकाशन: निर्मल वर्मा

वाणी प्रकाशन: निर्मल वर्मा:      देहरी पर पत्र, इतिहास स्मृति आकांक्षा, चिट्ठियों के दिन और    ग्यारह अनुवादित पुस्तकें वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हैं/ Publish...