Thursday, 5 April 2012

निर्मल वर्मा



    
देहरी पर पत्र, इतिहास स्मृति आकांक्षा, चिट्ठियों के दिन और
   ग्यारह अनुवादित पुस्तकें वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हैं/
Publisher : Vani Prakashan
 
 Books Name & ISBN No. & Price in Rs : `) & Size(Inches): 8.25X5.25

Book - Bahar Aur Pare
Author : Jiri Fried
Translator : Nirmal Verma
   Price : ` 300
  ISBN :
978-93-5000-166-0
  Total Pages : 
207
  Category :  Novel

Book - Ratn-Kangan Tatha Anya Kahaniyan
Author : Aleksander Kuprin
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 425
ISBN :
978-93-5000-159-2
Total Pages : 
293
Category :  Shortstories


Book - Bachpan
Author : Leo Tolstoy
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 200
ISBN :
978-93-5000-157-8
  Total Pages : 157,Category : Novel

Book - Parajay
Author : Aleksander Fadeyev
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 425
ISBN :
978-93-5000-163-9
  Total Pages : 314,Category : Novel

 Book - Olesja Tatha Anya Kahaniyan
Author : Aleksander Kuprin
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 425
ISBN :
978-93-5000-160-8 
Total Pages : 329,Category : Shortstories

 
Book - Jhonpadi Wale Aur Anya Kahaniyan
Author : Mihail Sadaveanu
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 250
ISBN :
978-93-5000-158-5
  Total Pages : 181,Category : Shortstories

  Book - Ticket-Sangrah
  Author : Karel Chapek
  Translator : Nirmal Verma
 
Price : ` 325
  ISBN :
978-93-5000-161-5
  Total Pages : 229
Category : Shortstories


Book - Emoke : Ek Gatha
Author : Joseph Skoversky
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 200
ISBN :
978-93-5000-156-1
Total Pages :151,Category : Novel


  Book - Khel-Khel Mein
 Translator & Collection
: Nirmal Verma
 
Price : ` 250
 ISBN :
978-93-5000-162-2
 Total Pages :235,Category : Shortstories


 Book - Romeo Juliet Aur Andhera
Author : Jan Otcenasek
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 395
ISBN :
978-93-5000-164-6
Total Pages : 253,Category : Novel


 
Book - R.U.R.
Author : Karel Chapek
Translator : Nirmal Verma
Price : ` 250
ISBN :
978-93-5000-165-3
  Total Pages : 163,Category : Play

 Book - ITIHAS SMRITI AKANKSHA
Author : Nirmal Verma
Price : ` 150
ISBN :
978-93-5000-167-7
Total Pages:78,Category : Lectures on Vatsal-Nidhi, 1990


 Book - Chitthiyon Ke Din 
Author : Nirmal Verma
Editor  : Gagan Gill
Price : ` 325
ISBN :
978-93-5000-169-1
Total Pages : 221 
Category : Letters


 Book - Dehari Par Patra
 Author : Nirmal Verma
 Editor  : Gagan Gill
 
Price : ` 375
 ISBN :
978-93-5000-168-4
 
Total Pages : 243
 Category : Letters
  
पुस्तक के संदर्भ में.....
  इतिहास स्मृति आकांक्षा ( वत्सल-निधि व्याख्यान,1990) के संदर्भ में .....इतिहास स्मृति आकांक्षा निर्मल वर्मा का चिन्तक पक्ष उभारती है/ क्या मनुष्य इतिहास के बाहर किसी और समय में रह सकता है ? रहना भी चाहे तो क्या वह स्वतंत्र है ?  स्वतंत्र हो तो भी क्या वह वांछनीय होगा ? क्या मनुष्य की उस छवि और अवधारणा का ही अंत नहीं होगा, जिसे वह इतिहास के चौखटे में जड़ता आया है ?  इतिहास बोध क्या है ? क्या वह प्रकृति की काल चेतना को खंडित करके ही पाया जा सकता है ? लेकिन उस काल चेतना से स्खलित होकर मनुष्य क्या अपनी नियति का निर्माता हो सकता है ?  जहाँ इन प्रश्नों को शब्द और स्मृति, कला का जोखिम, ढलान से उतरते हुए पुस्तकों में उन्होंने अलग-अलग प्रसंगों में स्पर्श किया है, वहाँ उन्हें इन तीन व्याख्यानों में एक सूत्रित समग्रता में पिरोने का प्रयास किया है /           

इतिहास स्मृति आकांक्षा का कुछ अंश पृष्ठ संख्या 40 "जिसे हम 'विस्मृत' कहते हैं, वह मृत नहीं है, वह सिर्फ 'अनुपस्थित' है, उन खाली विरामों की तरह, जो शब्दों के बीच रहते हैं/ वे अदृश्य भले ही हों, अर्थहीन नहीं हैं, बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा, वे ऐसे रिक्त स्थान हैं, जहाँ शब्दों के स्थगित अर्थ वास करते हैं, उनकी सुरक्षा इसी में है कि वे अदृश्य रह कर स्वयं इतिहास के भीतर शरण पा सकें... इतिहास के हाशिये पर शरणार्थी अर्थ / हम जिसे 'परम्परा' कहते हैं, वह इन्हीं विस्मृत अर्थों की श्रृंखला से बनी होती है / जब मनुष्य पर इतिहास का बोझ असह्य हो जाता है, तो वह इन्हीं में अपना आश्रय खोज लेता है/"
इतिहास स्मृति आकांक्षा का कुछ अंश पृष्ठ संख्या 73-74 "किसी महान कलाकृति का  सत्य केवल विभिन्न संस्कृतियों की सीमाओं का ही अतिक्रमण नहीं करता, वह हमारे काल-बोध के ऐतिहासिक कठघरों को भी भंग कर देता है/ अतीत और भविष्य का कृत्रिम वर्गीकरण इतिहास करता है, एक कलाकृति में काल को विभाजित करना उतना ही असम्भव है, जितना समुन्द्र के अथाह जल को छड़ी से बाँट कर अलग करना / जिस तरह एक व्यक्ति का अतीत उसके वर्तमान में बसा होता है और वर्तमान में उन समस्त संभावनाओं के संकेत मिलते हैं, जो उसके भविष्य में होने वाला है- ठीक उसी तरह से एक साहित्यिक कृति में काल का सम्पूर्ण बोध सिनेमा के स्क्रीन की तरह लगा रहता है, जिसके रहते ही मनुष्य का हर बीता अनुभव और आने वाली हर संभाव्य घटना एक सुसंगत और व्यवस्थित पैटर्न उदघाटित करती है"/

लेखक के सन्दर्भ में....
भारतीय मनीषा की उस उज्ज्वल परम्परा के प्रतीक पुरुष निर्मल वर्मा का जन्म 3 अप्रैल 1929 शिमला हिमाचल प्रदेश में हुआ था / इनके जीवन में कर्म, चिन्तन और आस्था के बीच कोई फाँक नहीं रह जाती है/ कला का मर्म जीवन का सत्य बन जाता है और आस्था की चुनौती जीवन की कसौटी / ऐसा मनीषी अपने होने की कीमत देता है और माँगता भी / अपने जीवनकाल में गलत समझे जाना उसकी नियति है और उससे बेदाग उबर आना उसका पुरस्कार / निर्मल वर्मा के हिस्से में भी ये दोनों बखूबी आये /  इन्होंने अपनी प्रथम कहानी 1950 में एक पत्रिका के लिए लिखी / स्वतन्त्र भारत की आरम्भिक आधी से अधिक सदी निर्मल वर्मा की लेखकीय उपस्थिति से गरिमांकित रही / वह उन थोड़े से रचनाकारों में थे जिन्होंने संवेदना की व्यक्तिगत स्पेस और उसके जागरूक वैचारिक हस्तक्षेप के बीच एक सुन्दर संतुलन का आदर्श प्रस्तुत किया / उनके रचनाकार का सबसे महत्त्वपूर्ण, साठ का दशक, चेकोस्लोवाकिया के विदेश प्रवास में बीता / अपने लेखन में उन्होंने न केवल मनुष्य के दूसरे मनुष्यों के साथ सम्बन्धों की चीर-फाड़ की, वरन उसकी सामाजिक, राजनीतिक भूमिका क्या हो, तेजी से बदलते जाते हमारे आधुनिक समय में एक प्राचीन संस्कृति के वाहक के रूप में उसके आदर्शों की पीठिका क्या हो ? इन सब प्रश्नों का भी सामना किया /  अपने जीवन काल में निर्मल वर्मा साहित्य के लगभग सभी श्रेष्ठ सम्मानों से समादृत हुए, जिसमें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1985), ज्ञानपीठ पुरस्कार (1999), साहित्य अकादमी महत्तर सदस्यता (2005) और सन 2002 में पद्मभूषण  ( भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान )  से अलंकृत हुए /  25 अक्तूबर 2005 को इनका निधन हुआ /
प्रमुख कृतियाँ -

उपन्यास - अंतिम अरण्य, रात का रिपोर्टर, एक चिथड़ा सुख, लाल टीन की छत, वे दिन।
कहानी संग्रह - परिंदे, कौवे और काला पानी, सूखा तथा अन्य कहानियाँ, बीच बहस में, जलती झाड़ी, पिछली गर्मियों में।
संस्मरण यात्रा वृत्तांत - धुंध से उठती धुन, चीड़ों पर चाँदनी।
नाटक - तीन एकांत
निबंध - भारत और यूरोप, प्रतिभूति के क्षेत्र, शताब्दी के ढलते वर्षों से, कला का जोखिम, शब्द और स्मृति, ढलान से उतरते हुए।