Tuesday, 3 April 2012

स्मार्ट रिपोर्टर





Book : Smart Reporter
Author(s) : Shailesh & Dr. Brajmohan
Publisher :
Vani Prakashan

Price :
` 295
ISBN : 978-93-5000-754-9
Total Pages :  176
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  : 
Journalism
 

 पुस्तक के सन्दर्भ में.........
कहते हैं सफलता का महत्त्व वही जानता है जो असफल हुआ हो और विजय की परिभाषा वही दे सकता है जो पराजय हुआ हो, इसी परिप्रेक्ष्य में शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन ने पत्रकारिता को नजदीक से देखा और परखा है/  पुस्तक के माध्यम से यह पत्रकारिता के छात्रों के लिए लेकर आये हैं, स्मार्ट रिपोर्टर पर उन्होंने अपने विचार व्यक्त किये हैं  / "टेलीविजन ग्लैमर की दुनिया है/ इस दुनिया में पैसा है, शोहरत है और इन सबसे बढ़कर खुद को साबित करने का यहां बेहतरीन मौका भी है/ लेकिन ये सब उनके लिए है, जो कामयाब हैं/  पर कोई भी इंसान पैदाइशी कामयाब नहीं होता/ लक्ष्य का निर्धारण, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन, तीन मन्त्र हैं, जो किसी को अंधेरे के गर्त से उठाकर रोशनी के अर्श तक पहुंचा सकते हैं / जिन्होंने पत्रकारिता को करियर चुना है, जिनके लिए पत्रकारिता करियर नहीं, मिशन है और जिन्हें टीवी रिपोर्टर के करियर पर फ़ख्र है, उनके लिए ये किताब तीसरा मन्त्र है/ टीवी रिपोर्टिंग  आर्ट और क्राफ्ट दोनों है और ये किताब इस तानेबाने की बारीकियों को सुलझाने में निश्चित तौर पर मदद करेगी /"

पुस्तक की विषय सूची
न्यूज़ और उसके आवश्यक तत्व,  जिसमें बताया गया है कि, न्यूज़ क्या है?, न्यूज़ की परिभाषा, न्यूज़ के आवश्यक तत्त्व / इसी प्रकार, टीवी रिपोर्टिंग, टीवी रिपोर्टर, रिपोर्टिंग के प्रकार, समाचार संग्रह, स्टोरी प्लानिंग, फील्ड में रिपोर्टर, इंटरव्यू(साक्षात्कार), पीटीसी(पीटूसी) पीस टू कैमरा, स्टोरी स्ट्रक्चर, स्क्रिप्ट राइटिंग, ग्राफिक्स, वॉईस ओवर(वाओ), स्टोरी एडिटिंग, रिपोर्टर और कैमरा, रिपोर्टर की लक्ष्मण रेखा, टेलीविजन के तकनीकी शब्द/

पुस्तक पर नवभारत टाइम्स के संपादक, रामकृपाल सिंह के विचार,
"किताब की एक बड़ी खूबी यह है कि इसकी भाषा आसान है, यानी वही भाषा है जिसकी पत्रकारिता को जरूरत है/  चीजों को समझाने का तरीका सहज है, उसमें कहीं कोई उलझाव नहीं है और तमाम विषय सिलसिलेवार दिए गए हैं / मुझे लगता है, कोई छात्र इस किताब को समझकर पढ़ता है, तो उसे तुरंत काम करने के लिए किसी और ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है/  यहां तक कि इस किताब को पढ़ने के बाद छात्रों को किसी भी न्यूज़ चैनल का दफ्तर पराया नहीं लगेगा, बल्कि अपना जाना-पहचाना सा लगेगा/" 

लेखक परिचय,
शैलेश

शैलेश ने जयप्रकाश आन्दोलन के दौरान आन्दोलनकारियों के अखबार संघर्ष समाचार से 1974 में पत्रकारिता की  शरुआत की/  जयप्रकाश आन्दोलन के दौरान ढाई वर्ष डीआईआर और मीसा के तहत जेल में बंद/  जेल से रिहा होने के बाद बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में पत्रकारिता की पढ़ाई/  देश के प्रतिष्ठित अखबारों में जैसे अमृत प्रभात, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स में  करीब 14 वर्षों तक काम किया /  वर्तमान में आजतक न्यूज़ चैनल में एक्जिक्यूटिव एडिटर/ प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में 35  वर्षों से ज्यादा का अनुभव/
लेखक परिचय, डॉ. ब्रजमोहन
डॉ. ब्रजमोहन का जन्म गाँव अवदलपट्टी, जिला छपरा बिहार में हुआ / भागलपुर से पढ़ाई करने के पश्चात् वहीँ नवभारत टाइम्स से पत्रकारिता की शुरुआत/ प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में 19 वर्षों का अनुभव/ फिलहाल IBN7 न्यूज़ चैनल में एसोसिएट एक्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर /  








मन का तुलसी चौरा

 
चर्चित पत्रकार और लेखक एवं संसद सदस्य (राज्यसभा) तरुण विजय की पुस्तक ललित निबंधो के संकलन पर आधारित 'मन का तुलसी चौरा' पर रमेशचंद्र शाह के विचार- " देश का मन और जल दोनों गंदला गये हैं, दिल्ली में यमुना का आचमन तो दूर, स्पर्श तक नहीं किया जा सकता/ पीढ़ियों से अपने  धार्मिक संस्कार सुरक्षित रखे सूरीनाम और त्रिनिदाद के लोग काशी गये तो गन्दगी से भरी गलियाँ,..और ईश्वरोपासना की पहली ही सीढ़ी पर जाति के जुगुप्साजनक अहंकार का परिचय/ अब कोई विधर्मी नहीं, जो हमारी गंगा, जमुना या मंदिरों को गन्दा करने आते हों / यह काम हम खुद करते हैं"/ 

Book : Man Ka Tulasi Chaura
Author : Tarun Vijay
Publisher : Vani Prakashan
Price :
` 495
ISBN : 978-93-5072-227-5
Total Pages :  314
Size (Inches) : 5.75X8.75
Category  : 
Social Studies

पुस्तक के संदर्भ में.....
लेखक कहता है कि लेखनी के आँगन में आकर यथार्थ के खुरदरेपन का जो बहुधा मरणान्तक अहसास हुआ उसने हिन्दू-मुस्लिम दायरों के भीतर गहरे पैठे हुए पाखंड, आत्मवंचनाएँ, दोहरे चरित्र और पूज्य फरिश्तों के खड़िया वाले पाँव दिखा दिए और उन पर बेलाग लिखना भी तय करवा दिया/ हमारे झंडों के रंग जो भी हों पर अगर हमारे मन कलुषित, खिड़कियाँ बंद और इतिहासबोध संकीर्ण हैं तो संस्कृति और सभ्यता की खुदाई हो सकती है, रक्षा नहीं / धन और पद के अहं में डूबे महंतों के चाटुकारितासिक्त दरवाजों के खुलने और बंद होने का रिवाज समाज और देश तो तोड़ता ही है, जोड़ता नहीं / लेखक व्यंग्य कसते हुए कहता है कि गंगा विलुप्त प्राय:, यमुना तिरस्कृत, हिमालय प्रदूषित और हम चले हैं, विश्व बचाने- यह कैसे चल सकता है ? जब-जब मिर्चपुर हुए, भारत हारा / हर सोमनाथ विध्वंस के पीछे गज़नी से पहले, क.मा. मुंशी के ही शब्दों में, शिवराशि या शिवराशियों का ही योगदान रहा है और है/ खेमेबाजियों से परे जो वेदना और आक्रोश का भारतीय संसार है, वह इन्द्रधनुषी है, एक रंगीय नहीं / यूरोपीय सभ्यता के संदर्भ में लेखक पं. विद्यानिवास मिश्र की बात करता है कि ' यूरोपीय सभ्यता को सबसे गहरा प्रतिरोध भारत ने ही दिया, किन्तु विश्व में यूरोपीय संस्कृति को सर्वाधिक सहानुभूति के साथ समझने वाले भी भारतीय ही हुए /' 

लेखक के संदर्भ में....
पत्रकार, लेखक एवं संसद सदस्य (राज्यसभा) तरुण विजय देहरादून ( उत्तराखंड) के निवासी हैं/ विश्व के अधिकांश देशों में भ्रमण और जनजातीय क्षेत्रों में पाँच वर्ष कार्य किया / पाकिस्तान के साथ भारतीय संपादकों में सबसे पहले अमन के एजेंडा अभियान को शुरू किया/ हिन्दी और अंग्रेजी में अनेक पुस्तकों का लेखन तथा साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए अनेक पुरस्कार प्राप्त / कैलास-मानसरोवर यात्रा पर सचित्र पुस्तक ' साक्षात शिव से संवाद' का गुजराती, मराठी, बांग्ला, संस्कृत तथा अंग्रेजी में अनुवाद/