Wednesday, 19 September 2012

भैरवी




Book : Bhairavi
Presentation : Yatindra Mishra
Publisher : Vani Prakashan
Price : `200(HB)  
ISBN : 978-93-5000-913-0
Total Pages : 142
Size (Inches) : 5X8

Category  : Collection of Vachana Poems

"जब तक स्वयं को नहीं जाना था मैंने तुम कहाँ थे ? तुम थे मुझमें कंचन में सुनहरे विभास की तरह, मैंने तुममें देखा मुझमें होने का तुम्हारा विरोधाभास जबकि दिखता नहीं कोई अंग-प्रत्यंग मलिल्काशुभ्र स्वामी !- " अक्क महादेवी 

पुस्तक के संदर्भ में सुप्रसिद्ध साहित्यकार,  मृणाल पाण्डे के विचार.....
"साधकों के लिए धर्म जब किताबी ज्ञान या आचारपरक वाद-विवाद का विषय बनने की बजाय अनुभूत सत्य और भावावेश पर केन्द्रित हो जाए, तो हम भक्ति, आत्मीयता और प्रेमोल्लास के अनूठे देश में प्रवेश करते हैं  मध्यकालीन वीरशैव कवयित्री महादेवी, अक्का या अक्क महादेवी इसी अनुभव समृद्ध 'अनभै साँचा पंथ' की पथिक हैं    ऐसी रससिद्ध आदर्शवादी परम्परा में मलिल्काशुभ्र स्वामी की भक्ति को तन-मन से समर्पित करने वाली अक्क महादेवी का उदय एक सहज कुसुम के खिलते सरीखी घटना थी  
अपने पूरे फैलाव में अक्क महादेवी की कविता, जिसको यतीन्द्र ने बहुत सुन्दर, अन्तरंग और संवेदनशील ढंग से आत्मसात कर पुन: सृजित किया है,  एक तरल विषाद भरी मेधावी स्त्री दृष्टि से ओत-प्रोत है   इसमें मानवीय क्षुद्रता के अविराम प्रदर्शन को लेकर पीड़ा है किन्तु प्रतिशोध की इच्छा या चौंकाने वाली प्रदर्शनकारिता का भाव कतई नहीं   एक कठोर और लीक से हटकर जिये गए संघर्षशील जीवन से उपजे होने पर भी शिव को संबोधित यह भक्तिप्रवण वचन मन को चमत्कारिक कवि रुढियों या कटुता की ओर नहीं ले जाते   उनका मूल स्वर एक निर्मल वैराग्य का है  
नाटकीय प्रतिवादों के निरर्थक कलावादी नारीवादी तेवरों के घटाटोप में भटकते आज के सत्साहित्यविमुख पाठकों तक बारहवीं सदी की दुर्लभ काव्य धरोहर को पहुँचाने के इस विवेकी सत्प्रयास के लिए यतीन्द्र मिश्र भरपूर बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं "   

लेखक के संदर्भ में ......
यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, संपादक और अध्येता हैं   साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं अबु-धाबी की यात्राएँ की हैं  संगीत एवं कला-चिंतन की बानगी के तौर पर यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक 'विस्मय का बखान' प्रकाशित है   फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं और गीतों के चयन क्रमश: 'यार जुलाहे' नाम से सम्पादित किया है   यह अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउंडेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं