Wednesday, 19 September 2012

दिशाओं का खुला आकाश



Book :  Dishaon Ka Khula Akash
Author : Kunwar Narain
Editor :Yatindra Mishra
Publisher : Vani Prakashan
Price : `325(HB)
ISBN : 978-93-5072-200-8
Total Pages : 180
Size (Inches) : 5X8.25
Category  : Notes

पुस्तक के संदर्भ में....
हमारे समय के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकारों में कुँवर नारायण के यह बिल्कुल निजी और अलग ढंग के नोट्स हैं। एक अत्यन्त आत्म-सजग कवि की कल्पनाशील सौन्दर्य-बोध से संपन्न दृष्टि आज के भारत के सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ पर भी उतनी ही गहरी है। ‘दिशाओं का खुला आकाश’ स्वयं से संवाद करता लेखन है जिसमें सोच की भाषा है, बयान की नहीं। इसमें किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की जल्दी नहीं है, एक ख़ास तरह की स्थिरता है। लेखक के तमाम फैले बिखरे नोट्स से चुनकर बनाया गया यह एक संकलन है, जिसमें जीवन की-सी आकस्मिकता है और एक परस्परता भी। यह देखना इन नोट्स के संदर्भ में प्रासंगिक है कि इनका विस्तार कुँवर नारायण की रचनात्मक यात्रा के एक लम्बे कालखण्ड पर भी निहायत जिम्मेदार ढंग से रोशनी डालता है, जिसमें जीवन की अधिसंख्य चीज़ें अपनी समग्रता में आलोकित होती दिखाई पड़ती हैं। यह अकारण नहीं है कि वैचारिकी की यह किताब समाज, राजनीति, दर्शन, इतिहास, धर्म, अध्यात्म, सिनेमा, संगीत, रूपंकर कलाओं से होती हुई साहित्य के सबसे आत्यंतिक पहलुओं तक जाती है। इस उपक्रम में लेखक का सर्जक मन विचारों के ध्रुवान्त पर खड़ा यथार्थ का जितना बारीक ढंग से अन्वेषण करता है, नोट्स की भाषा उतनी ही अधिक जीवन्त बनती जाती है। 
इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को पहली बार ऐसे प्रबुद्ध कवि का आत्मीय गद्य पढ़ने को सुलभ हो रहा है, जिसमें मौजूद उनकी आत्मीयता का मोहक संसार भी सर्जनात्मकता के परिसर से निकलकर ही उनसे मुख़ातिब हुआ है। ये नोट्स इसी कारण बहुत देर तक अपनी मर्मस्पर्शिता भी सँजोते हुए नज़र आते हैं, जिसमें विचार और भावना के मध्य एक अद्भुत सन्तुलन पैदा किया गया है।
‘दिशाओं का खुला आकाश’ एक ऐसी ज़रूरी गद्य-पुस्तक के रूप में हमारे सामने आती है, जिसमें डायरी की प्रचलित विधा से थोड़ा हटते हुए और नोट्स के बौद्धिक आग्रह को कहीं विराम देते हुए दोनों में एक समावेशी किस्म की मैत्री करायी गयी है। कुँवर नारायण की संवेदनशील कलम से निकली इस कृति की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें जीवन और साहित्य को देखने की दृष्टि में एक ऐसी निरन्तरता का निश्छल प्रवाह सम्भव हो सका है, जो शायद नोट्स एवं अन्तःप्रक्रियाओं के इसी विशेष संयोजन के द्वारा अपना रूपाकार गढ़ सकता। यह जानना भी अत्यन्त प्रीतिकर है कि यह डायरी इसी बौद्धिक प्रवाह की पहली कड़ी के रूप में अथवा आरम्भिक प्रस्तुति की तरह आपके सामने है।

लेखक के सन्दर्भ में...
अग्रणी कवि कुँवर नारायण उन विरल बुद्धिजीवियों में हैं जिन्होंने अपनी वैश्विक संवेदनाओं के साथ अपने देश की संस्कृति और इतिहास को पक्की ज़मीन दी है। वे प्रमुखतः कवि हैं, किन्तु साहित्य की सब तरह की  विधाओं में भी शुरू से लिखते रहे हैं -- कहानी, समीक्षा, विचार, सिनेमा, निबन्ध, डायरी आदि। उनका पहला कविता संग्रह 1956 में छपा और वे आज तक लगातार लिख रहे हैं। कुँवर नारायण के लेखन का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है तथा वे अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं, जिनमें ‘कुमारन आशान’, ‘साहित्य अकादेमी’, ‘कबीर’, ‘शलाका’, ‘ऑनर ऑफ वार्सा यूनिवर्सिटी’, रोम का ‘प्रीमियो फ़ेरोनिया’, इलाहबाद से ‘डी.लिट्. की मानद उपाधि’, ‘ज्ञानपीठ’, ‘पद्म भूषण’ तथा साहित्य अकादेमी की ‘महत्तर सदस्यता’ हैं।
जन्मः 19 सितम्बर 1927। बचपन अयोध्या-फ़ैज़ाबाद में। अधिकांश समय लखनउ में रह कर शिक्षा, अध्ययन और लेखन। पिछले पन्द्रह वर्षों से दिल्ली में रहते हैं।

सम्पादक के सन्दर्भ में... 
यतीन्द्र मिश्र: हिन्दी कवि, सम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनकी प्रकाशित प्रमुख पुस्तकों में ‘यदा-कदा’, ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’, ‘ड्योढ़ी पर आलाप’ (कविता संग्रह), ‘गिरिजा’, ‘देवप्रिया’, ‘सुर की बारादरी’ (संगीत पर एकाग्र) तथा अक्क महादेवी की कविताओं की प्रस्तुति ‘भैरवी’ हैं।  इनके अतिरिक्त अज्ञेय, कुँवर नारायण, अशोक वाजपेयी एवं गुलज़ार के रचनात्मक साहित्य से चयन सम्पादित किये हैं। उन्हें रज़ा पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार समेत कई पुरस्कार एवं शोधवृत्ति मिली हैं अयोध्या में रहते हैं तथा स्वतंत्रा लेखन में संलग्न हैं।
ब्लॉग पर -विस्मय का बखान
ब्लॉग पर भैरवी-

मीडिया रिपोर्ट 
http://epaper.jansatta.com/57192/Jansatta.com/16-September-2012#page/6/2

भैरवी




Book : Bhairavi
Presentation : Yatindra Mishra
Publisher : Vani Prakashan
Price : `200(HB)  
ISBN : 978-93-5000-913-0
Total Pages : 142
Size (Inches) : 5X8

Category  : Collection of Vachana Poems

"जब तक स्वयं को नहीं जाना था मैंने तुम कहाँ थे ? तुम थे मुझमें कंचन में सुनहरे विभास की तरह, मैंने तुममें देखा मुझमें होने का तुम्हारा विरोधाभास जबकि दिखता नहीं कोई अंग-प्रत्यंग मलिल्काशुभ्र स्वामी !- " अक्क महादेवी 

पुस्तक के संदर्भ में सुप्रसिद्ध साहित्यकार,  मृणाल पाण्डे के विचार.....
"साधकों के लिए धर्म जब किताबी ज्ञान या आचारपरक वाद-विवाद का विषय बनने की बजाय अनुभूत सत्य और भावावेश पर केन्द्रित हो जाए, तो हम भक्ति, आत्मीयता और प्रेमोल्लास के अनूठे देश में प्रवेश करते हैं  मध्यकालीन वीरशैव कवयित्री महादेवी, अक्का या अक्क महादेवी इसी अनुभव समृद्ध 'अनभै साँचा पंथ' की पथिक हैं    ऐसी रससिद्ध आदर्शवादी परम्परा में मलिल्काशुभ्र स्वामी की भक्ति को तन-मन से समर्पित करने वाली अक्क महादेवी का उदय एक सहज कुसुम के खिलते सरीखी घटना थी  
अपने पूरे फैलाव में अक्क महादेवी की कविता, जिसको यतीन्द्र ने बहुत सुन्दर, अन्तरंग और संवेदनशील ढंग से आत्मसात कर पुन: सृजित किया है,  एक तरल विषाद भरी मेधावी स्त्री दृष्टि से ओत-प्रोत है   इसमें मानवीय क्षुद्रता के अविराम प्रदर्शन को लेकर पीड़ा है किन्तु प्रतिशोध की इच्छा या चौंकाने वाली प्रदर्शनकारिता का भाव कतई नहीं   एक कठोर और लीक से हटकर जिये गए संघर्षशील जीवन से उपजे होने पर भी शिव को संबोधित यह भक्तिप्रवण वचन मन को चमत्कारिक कवि रुढियों या कटुता की ओर नहीं ले जाते   उनका मूल स्वर एक निर्मल वैराग्य का है  
नाटकीय प्रतिवादों के निरर्थक कलावादी नारीवादी तेवरों के घटाटोप में भटकते आज के सत्साहित्यविमुख पाठकों तक बारहवीं सदी की दुर्लभ काव्य धरोहर को पहुँचाने के इस विवेकी सत्प्रयास के लिए यतीन्द्र मिश्र भरपूर बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं "   

लेखक के संदर्भ में ......
यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, संपादक और अध्येता हैं   साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं अबु-धाबी की यात्राएँ की हैं  संगीत एवं कला-चिंतन की बानगी के तौर पर यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक 'विस्मय का बखान' प्रकाशित है   फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं और गीतों के चयन क्रमश: 'यार जुलाहे' नाम से सम्पादित किया है   यह अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउंडेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं   

Friday, 7 September 2012

दस्तक



Book : Dastak 
Author : Yashoda Singh
Introduction : Uday Prakash
Price : `250(HB)
ISBN : 978-93-5072-295-4
Price : Rs.175(PB)
ISBN : 978-93-5072-301-2 ((PB)
Total Pages : 168
Size (Inches) : 5.50X8.50
Category  : Social Science

''यहाँ कहीं कोई सनसनी नहीं है, कोई 'सेंसेशनल' छौंक-बघार नहीं, कोई उस्तादाना 'स्पाइस' या हुनर नहीं। यहाँ बस एक सर्जनात्मक इत्मीनान है। "- उदय प्रकाश    

पुस्तक के सन्दर्भ में...
पाठकों को नयी-नयी पुस्तकों से और ऐसी पुस्तकें जो जीवन की वास्तविकताओं से परिचय कराती हैं । इसी को सार्थक रूप देना 'वाणी प्रकाशन' का उद्देश्य है । उसी श्रृंखला में प्रस्तुत है, यशोदा सिंह की पुस्तक 'दस्तक' जिसमें में कोई 'सनसनी' नहीं है, कोई 'सेंशेनल' या छौंक-बघार नहीं है । और न ही कोई उस्तादाना 'स्पाइस'  या हुनर । यहाँ सिर्फ एक सर्जनात्मक इत्मीनान है । इस पुस्तक में दिल्ली की किसी पुरानी बस्ती या उपनगर या हाशिये पर पड़ी मानवीय बसावट का वृत्तान्त है । जिसमें सिर्फ कई पात्र धीरे-धीरे, एक-एक कर आते हैं और फिर ओझल हो जाते हैं । जैसे कोई कैमरा है, जो कई छवियाँ कागज़ पर उतारता है । ये छवियाँ हमारी स्मृति में अपनी जगह तलाशती हमेशा वहीं रह जाती हैं । पुस्तक मामूली लोगों की गैर-मामूली सहभागिता और पारस्परिकता के ताने-बाने को परत-दर परत उजागर करती एक संवेदनशील मानवीय-गाथा है । आशा है पुस्तक पाठकों को पठनीय और रुचिकर लगेगी 

लेखिका  के सन्दर्भ में...
यशोदा  सिंह का जन्म दिल्ली में हुआ 2001 में वह युवा लेखकों की एक टोली में जुड़ीं। यहाँ उनके नये साथियों ने उनके लिखे पन्ने पढ़े और उनकी लेखनी को सराहा । उनके लिखे कुछ टुकड़े 'बहुरूपिया शहर' और 'फर्स्ट सिटी' पत्रिका के अलग-अलग अंकों में प्रकाशित हुए। उन्होंने 2004 में हेम्बुर्ग, जर्मनी में हुए इंटरनेशनल यंग परफोर्मेंस फेस्टिवल प्लेमास 2004 -में हिस्सा लिया 'दस्तक'  उनकी पहली पुस्तक है