Thursday, 19 July 2012

वर्तिका



वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, हिन्दी तैमासिक पत्रिका 'वर्तिका' (विकल्प विमर्श-5), 'भ्रष्टाचार और अन्ना आन्दोलन' पर केन्द्रित है । 

सम्पादक- महाश्वेता देवी और अरुण कुमार त्रिपाठी 

इस अंक के अनुक्रम में पढ़े....
एक विधेयक से खत्म नहीं होगा भ्रष्टाचार- महाश्वेता देवी
एक आन्दोलन जो मैंने देखा- अमित सिंह
जनता के साथ तो आना ही होगा ! -अमित सिंह
अब तो सारा देश है अन्ना- सत्येन्द्र सिंह
अन्ना आन्दोलन से टूटते मिथक- अमरेश मिश्र
जन आकांक्षाएँ और कांग्रेस की बौखलाहट- प्रभात कुमार राय
नयी करवट और पुरानी राजनीति- राहुल देव
नागरिक समाज : आलतू-फालतू- पुष्पेश पन्त
माहौल बनाए रहिए- अरुण कुमार त्रिपाठी
जनता बनाम संसद की छद्म बहस -रवीन्द्र त्रिपाठी
आत्ममंथन की जरूरत- डॉ सुनीलम
नया जनादेश लेने का समय -कुलदीप नैयर
अन्ना चाहते हैं परिवर्तन -डॉ सुनीलम
अन्ना आन्दोलन का आगा-पीछा -एच.एल. दुसाध
कारपोरेट को बचाने वाली क्रान्ति-सत्येन्द्र सिंह
भ्रष्टाचार विरोध का प्रहसन -प्रेम सिंह
आसमान की ओर एक पत्थर - अनिल सिन्हा
उठाने होंगे अहम मुद्दे - मेधा पाटकर
अतिक्रन्तिकारी और अन्ना आन्दोलन -डी.आर. चौधरी
अन्ना आन्दोलन का भविष्य -डॉ . योगेन्द्र
भ्रष्टाचार का इलाज समता -डॉ. ए.के. अरुण
भारतीय राष्ट्र का सहोदर है भ्रष्टाचार - कृष्णकांत
विज्ञान जगत के भ्रष्टाचार - यादवेन्द्र पाण्डेय
घोटाले और राजनीति - सुनील
काली अर्थव्यवस्था और याराना पूँजीवाद :
नवउदारवाद के अन्तरंग दुष्फल - कमल नयन काबरा
काली अर्थव्यवस्था : दलदल में फँसा विकास - अरुण कुमार और अरुण कुमार त्रिपाठी
भारत और भ्रष्टाचार - सच्चिदानंद सिन्हा
नये बौद्धिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक समूह की दरकार- किशन पटनायक

सम्पादकीय सम्पर्क
वाणी प्रकाशन 21 -ए, दरियागंज, नयी दिल्ली-110001

मूल्य : एक अंक 60/ रुपये
व्यक्तिगत वार्षिक शुल्क : 240 ( चार अंक)
(व्यक्तिगत अंक माँगने पर डाक व्यय 25 रुपये अतिरिक्त देना होगा)
संस्थाओं के लिए वार्षिक शुल्क : 400 रुपये
संस्थाओं के लिए एक अंक : 100 रुपये
नोट : मनीआर्डर/बैंक ड्राफ्ट 'वाणी प्रकाशन' नयी दिल्ली के नाम भेजें