Tuesday, 22 May 2012

खुला घर



मीलोष की कविता साहस और निर्भीकता के साथ गवाही देने वाली कविता है ।  उसमें यह उम्मीद शामिल है कि सर्वनाश असम्भव है, कि मनुष्यता अन्तत: अपराजेय है, कि कविता स्वयं भाषा और मानवीय संवेदना का अति जीवन है, कि बचना और बचाना संभव है, कि इस खूँखार हत्यारे समय में आशा और आस्था आवश्यक है ।  

Book : Khula Ghar
Author  : Czeslaw Milosz
Translator : Ashok Vajpeyi Renata Czekalska  

Publisher : Vani Prakashan
Price :
`495(HB) 
ISBN : 81-8143-080-8
Total Pages : 233
Size (Inches) :
5.75X8.75
Category  :  Poetry

पुस्तक के सन्दर्भ में......
संसार में अनिवार्य रूप से मौजूद बुराई और मानवीय यातना को अपनी कविता के केन्द्र में रखनेवाले पोलिश कवि चेस्लाव मीलोष बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में विश्व-कविता के अधिकतर उलझे परिदृश्य में एक अनिवार्य नाम रहे हैं ।  इस समय वे सम्भवत: विश्व-कविता के सबसे जेठे सक्रिय कवि हैं ।   अपनी जातीय ईसाई परम्परा से मीलोष ने मनुष्य में अनिवार्यत: मौजूद बुराई का तीखा अहसास पाया था ।  उन्हें पोलैण्ड में पहले नाज़ी और बाद में साम्यवादी तानाशाहियों द्वारा दमित-शोषित किये जाने के दुखद ऐतिहासिक अनुभवों ने मीलोष को इस बुराई को उसकी सारी विकृतियों और उसमें लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण साझेदारी या उनके बारे में अवसरवादी चुप्पी के साथ नजदीक से देखने-समझने का अवसर दिया ।  कविता उनके लिए  इसके विरुद्ध संघर्ष की रणभूमि बनी । 
1911  में जन्मे  मीलोष पिछली शताब्दी में उन महान लेखकों में से हैं, जिन्हें लगभग सारी जिन्दगी अपने देश और भाषा से निर्वासित रहना पड़ा है  ।  उनकी कविता बार-बार हमारे समय में बुराई की शक्तियों द्वारा लोगों के पोषक सम्बन्धों जैसे परिवार, धर्म, पड़ोस, साझी विरासत के ध्वंस की चेष्टाओं के प्रति सचेत रहने की कविता है  ।  उसमें पोलैण्ड में नाजियों द्वारा किये गये यहूदियों के नरसंहार और साम्यवादी सत्ता द्वारा किये गये दूसरे संहारों की तीखी स्मृति सदा सक्रिय है  ।  

लेखक के सन्दर्भ में.....
कवि, आलोचक, उपन्यासकार, अनुवादक चेस्लाव मीलोष का जन्म 1911 में लिथुआनिया में हुआ ।  इन्हें साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार 1980 में दिया गया । इनकी काव्यकृतियाँ : पालालगे समय में कविता, तीन जाड़े, दिन का उजाला, कविता पर प्रबन्ध, नामहीन शहर, जहाँ सूरज उगता और जहाँ अस्त होता है, मोती के बारे में स्तुति, अप्राप्य पृथ्वी, वृत्तान्त, नदी किनारे, गली का कुत्ता, यह, दूसरा स्थान, आरफियस और यूरीडीसी । 
अन्य पुस्तकें : क़ैदी दिमाग़, सत्ता हथियाते हुए, इस्सा की घाटी, सुपरिचित यूरोप, महाद्वीप, निजी कर्त्तव्य, उलरो का देश, मातृभूमि की खोज में, मीलोष का कखग । 
विश्व की अनेक भाषाओं में अनूदित मीलोष को कैलिफोर्निया, मिशीगन, हार्वर्ड, लूथ्लीन, याग्येलोन्यन, वीतोल्द महान, रोम, बोलोन आदि अनेक विश्वविद्यालयों  द्वारा मानद उपाधियों से विभूषित किया गया है । उन्हें गुगेनहाइम नोइश्टाड पुरस्कार, लिथुआनिया का सर्वोच्च पुरस्कार आदि अनेक अलंकरण मिले हैं । वर्तमान में पोलैण्ड की सांस्कृतिक राजधानी क्रोकूव में मीलोष इन दिनों रहते हैं । 

अनुवादकों के सन्दर्भ में......
'खुला घर' का हिन्दी अनुवाद कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी और पोलैण्ड की हिन्दी विदुषी डॉ. रेनाता चेकाल्स्का ने किया है ।