Thursday, 10 May 2012

सच कहता हूँ


पुस्तक 'सच कहता हूँ' की पहली कहानी पृष्ठ संख्या 15 'यही मुम्बई है' पर प्रसिद्ध साहित्यकार एवं संपादक 'हंस', राजेन्द्र यादव के विचार "यही मुम्बई है, कहानी में एक अँधेरी दुनिया है । एक ऐसी दुनिया, जहाँ हम सब खुद को सीमित महसूस करते हैं, तन्हा महसूस करते हैं । ये एक बच्चे की कहानी है, बच्चे के प्रति करुणा की और उसकी मजबूरियों की...ये सारी चीजें अपनी जगह सही हैं और प्रामाणिक हैं । कहानी की खूबसूरती ये है कि ये अपनी सीमाओं  के पार चली जाती है...जो कथ्य है, जो कहा गया है, जो कहानी है, उसके पार ले जाती है और इसलिए ये मेटाफर है 
पृष्ठ संख्या 27 'चौथा कन्धा' पर विश्वनाथ त्रिपाठी जी के विचार "कहानी बदलते हुए देहाती जीवन में चल रही हलचलों को तात्कालिकता के विश्वसनीय बिम्बों में प्रस्तुत करती है। गाँव से एक किलोमीटर की दूरी पर रेल गुजरने लगी है । गुजरती हुई ट्रेन का दृश्य और उसकी छुक-छुक आवाज़ गाँववालों में कैसा रोमांच और नये के प्रति कौतूहल स्वागतभाव पैदा करती है ।  इसे पढ़कर फणीश्वर नाथ 'रेणु' की कहानी 'पंचलैट' की याद आ जाती है । कहानीकार नयी फैशनेबल कथा-रूढ़ियों का सहारा लिए बिना नये के प्रति गाँववालों  के कौतूहल उनकी काँइयाँ व्यावहारिकता और हमारे दौर में मानव जीवन के अवमूल्यन को रचनात्मक अन्तर्गठन के माध्यम से व्यंजित कर सका है

Book : Sach Kahta Hoon
Author : Harish Chandra Burnwal
Publisher : Vani Prakashan
Price :
`175(HB)
ISBN : 978-93-5000-840-9
Total Pages :  96
Size (Inches) :   5.75X8.75
Category  :  Collection of Short Stories

पुस्तक के सन्दर्भ में.....

हिन्दी कहानियों की एक बड़ी लम्बी और समृद्ध परम्परा रही है, लेकिन इस परम्परा में तूफान जैसी स्थिति कभी-कभार ही पैदा हुई है। दशकों में ऐसा हुआ जब कहानियों की पूरी लीक ही बदल गयी हो । पुराने उदाहरणों में न जाएँ तो हरीश चन्द्र बर्णवाल की पुस्तक 'सच कहता हूँ' की प्रत्येक कहानियाँ व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को झकझोर कर सोचने-विचारने पर विवश करती हैं। आखिर क्यों एक छोटा बच्चा बलात्कार की इच्छा जताता है ? क्यों एक शख्स ट्रेन हादसे में इनसानों के मरने पर खुश होता है ? कैसे एक पत्रकार की सफलता या कहें संवेदनशीलता पोप के मरने से जुड़ जाती है ? क्यों एक इंसान को तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं के चेहरे लुटेरे जैसे नज़र आने लगते हैं 'सच कहता हूँ' पुस्तक की हर कहानी यथार्थ के धरातल पर लिखी गयी है । अगर कल्पना की दुनिया में हिचकोले लें तो हर कहानी एक-एक युग जीने सरीखी है । चाहे वो अन्धे बच्चों पर लिखी गयी कहानी 'यही मुंबई है' हो या फिर जातिवाद पर प्रहार करती हुई 'अंग्रेज ब्राह्मण  और दलित' । पुस्तक में कहानियों का बेजोड़ संग्रह है । चाहे वह बच्चों की बदलती मानसिकता पर सवाल खड़ा करती है । और इसका कारण समाज से पूछती है । नेत्रहीन बच्चों का मायानगरी मुम्बई में अनुभव हो या फिर अपने बेटे की गम्भीर बीमारी के दौरान अस्पताल के कभी न याद करने लायक हालात हों।  यही नहीं लघुकथाओं में टेलीविजन मीडिया की अंदरूनी गन्दगी को भी लेखक ने स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया है

पुस्तक के अनुक्रम

कहानियाँ ......
यही मुम्बई है

चौथा कन्धा

तैंतीस करोड़ लुटेरे देवता

अंग्रेज, ब्राह्मण और दलित

काश मेरे साथ भी बलात्कार होता !
अन्तर्विरोध


लघुकथाएँ...

बेड नम्बर 6

मेडिकल इंश्योरेंस

प्ले स्कूल

बहाना

दो बच्चे

दो बड़ा या दो लाख

आखिरी चेहरा

गरीब तो बच जायेंगे...

मायूसी
सिर्फ 40  मरे

बड़ी खबर

तीन गलती

फ्लॉप फिल्म

कब मरेंगे पोप ?

लेखक के सन्दर्भ में......

हरीश चन्द्र बर्णवाल का जन्म पश्चिम बंगाल में आसनसोल के पास नियामतपुर में हुआ । दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक ( टॉपर) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से टेलीविजन पत्रकारिता में स्नातकोत्तर ।  हरीश चन्द्र बर्णवाल पिछले 10  वर्षों से टेलीविजन पत्रकारिता से जुड़े हैं । आईबीएन 7  से पहले स्टार न्यूज़ में कार्यरत रहे । 'रोजगार की तलाश में' कहानी के लिए हिन्दी अकादमी दिल्ली सरकार द्वारा पुरस्कृत, 'यही मुम्बई है' कहानी के लिए अमृतलाल नगर पुरस्कार। 'चौथा कन्धा' कहानी के लिए कादम्बिनी सम्मान और 'संवेदनहीनता' कहानी के लिए कथादेश पुरस्कार से सम्मानित एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा विशिष्ट सम्मान से सम्मानित ।  वर्तमान में आईबीएन 7  में एसोसिएट एक्जिक्यूटिव प्रोडूयसर हैं । 

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मीडिया रिपोर्ट 

13  मई 2012 , नवभारत टाइम्स 
http://navbharattimes.indiatimes.com/sach-kahta-hun/articleshow/13106279.cms 


bhadas4media के आर्टिकल को पढ़ने के लिए इस लिंक का प्रयोग करें http://bhadas4media.com/print/4245-harish-novel.html

3  जून 2012  हिन्दुस्तान (हिन्दी) अखबार  
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=4168917504355&set=a.1344581497720.2049315.1326722260&type=1&theater

14 जून 2012 thehindu. (हिन्दू अखबार )  में प्रकाशित रिपोर्ट http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/article3525907.ece


26 अगस्त 2012 अमर उजाला (अखबार) समीक्षा

http://epaper.amarujala.com/svww_zoomart.php?Artname=20120826a_013105002&ileft=227&itop=1143&zoomRatio=140&AN=20120826a_013105002 

30 सितम्बर 2012 राष्ट्रीय सहारा(अखबार) पृष्ठ संख्या-11 में प्रकाशित पुस्तक समीक्षा  http://www.rashtriyasahara.com/epaperpdf//3092012//3092012-md-hr-11.pdf